Advertisement

“पत्रकारों की एकजुटता से ही प्रदेश की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर ले जाकर देश को नई दिशा -: हरिशंकर पाराशर

“पत्रकारों की एकजुटता से ही प्रदेश की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर ले जाकर देश को नई दिशा -: हरिशंकर पाराशर

पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों का बिखराव ही आजकल सबसे बड़ी समस्या है और इस बिखराव को रोकने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर देश को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे इसमें कोई शक शुबहा नहीं है और वो समय आ चुका है आप सभी कन्धे से कन्धा मिलाकर अपनी एकजुटता का परिचय दिजिए आज हरिशकर पाराशर से हुई वार्ता के दौरान जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इण्डिया की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सलाहकार समिति के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार राजू चारण ने एक दूसरे के बीच में साझा किया।

वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर पाराशर ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का वह स्तंभ है, जो समाज और राष्ट्र को सत्य और जागरूकता से जोड़ता है। आज, जब देश राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, पत्रकारों की भूमिका अभूतपूर्व रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। यह समय है कि प्रदेश स्तर के सभी पत्रकार एक बैनर के नीचे एकजुट होकर स्थानीय समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर लाएं, देश की राजनीति में सक्रिय योगदान दें और जनता को राजनीतिक शोषण से मुक्ति दिलाएं। यह प्रयास पत्रकारिता के लिए एक नया मानदंड स्थापित करेगा।

जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इण्डिया संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनुराग सक्सेना ने कहा कि प्रदेश स्तर की कई समस्याएं राष्ट्रीय नीति निर्माण से सीधे जुड़ी हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश और बिहार में बाढ़ की आवर्ती समस्या, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, या राजस्थान और गुजरात में जल संकट—ये मुद्दे स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की मांग करते हैं। पत्रकारों को खोजी पत्रकारिता के माध्यम से इन समस्याओं को उजागर कर नीति निर्माताओं और जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहिए। प्रदेश के पत्रकार, चाहे वे स्थानीय अखबारों, डिजिटल मंचों या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से हों, एक साझा मंच के तहत एकजुट होकर अपनी आवाज को प्रभावी बना सकते हैं। यह एकजुटता स्थानीय समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने और राजनीतिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक होगी। उदाहरण के तौर पर, ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा में भ्रष्टाचार या किसानों की आत्महत्या जैसे मुद्दों पर संयुक्त अभियान राष्ट्रीय नीतियों में बदलाव ला सकता है।

देश की जनता आज वोट बैंक की राजनीति, भ्रष्टाचार और नीतियों के दुरुपयोग जैसे राजनीतिक शोषण का शिकार है। पत्रकारों को निष्पक्ष और साहसी पत्रकारिता के जरिए इन मुद्दों को बेनकाब करना होगा। प्रदेश स्तर पर स्थानीय प्रशासन और नेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए पत्रकार राष्ट्रीय स्तर पर इन मुद्दों को उठा सकते हैं। मिसाल के तौर पर, किसी जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ न पहुंचने की गहन पड़ताल राष्ट्रीय बहस को जन्म दे सकती है।

प्रदेश के पत्रकारों को एक ऐसा मंच बनाना चाहिए, जो स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाए और पत्रकारिता के उच्च मानदंड स्थापित करे। यह मंच नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणा बनेगा। अवैध खनन, पर्यावरणीय शोषण या अन्य ज्वलंत मुद्दों पर एकजुट अभियान पत्रकारिता की शक्ति को रेखांकित करेगा।

प्रदेश के पत्रकारों को अब एकजुट होकर स्थानीय समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर लाने और देश की दशा-दिशा बदलने का समय है। एक बैनर के नीचे एकत्रित होकर वे राजनीतिक शोषण के खिलाफ लड़ सकते हैं और देश को नई दिशा दे सकते हैं। यह एकजुटता पत्रकारिता के लिए एक मिसाल कायम करेगी और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। आइए, सत्य, निष्पक्षता और जनहित के लिए एक नया अध्याय लिखेंगे।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!