विशेष संवाददाता देवव्रत टांडिया भानुप्रतापपुर कांकेर ✍️✍️ 20 साल से किसानों की ज़मीन पर रखा गया था चोरी का लोह अयस्क, अब वन विभाग ने करोड़ों में बेचा, लेकिन किसानों को न मुआवज़ा मिला न किराया – शिवसेना नेता सुखचंद मडावी ने खोला भ्रष्टाचार का बड़ा मामला

भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम साल्हे में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ किसानों की निजी भूमि पर बीते दो दशकों से वन विभाग द्वारा रखे गए चोरी के लोह अयस्क को बिना किसी पूर्व अनुमति, सहमति या भुगतान के भंडारित किया गया। अब जब वन विभाग ने उक्त अयस्क को नीलामी के माध्यम से करोड़ों रुपए में बेचा, तब भी किसानों को एक रुपए का मुआवज़ा या भूमि किराया तक नहीं दिया गया। इस मामले में शिवसेना नेता सुखचंद मडावी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित भ्रष्टाचार और किसानों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
साल्हे गाँव के किसानों के साथ दो दशक पुराना अन्याय – अब बन गया करोड़ों का सरकारी लाभ, लेकिन किसान खाली हाथ
सुखचंद मडावी के अनुसार, लगभग 20 वर्ष पूर्व वन विभाग ने चोरी के लोह अयस्क को जप्त करने के बाद ग्राम साल्हे में कई किसानों की निजी भूमि पर बिना अनुमति भंडारित किया था। यह कार्य उस समय बिना किसी वैधानिक दस्तावेज या सहमति पत्र के किया गया। वर्षों तक वह अयस्क जमीन पर पड़ा रहा, जिससे किसानों की भूमि कृषि योग्य भी नहीं रही और न ही वे किसी अन्य उपयोग में ला सके। यह ज़मीन बंजर में तब्दील हो गई, और इसके एवज में किसानों को न किराया, न मुआवजा और न ही सरकारी सहयोग मिला।
अवैध बिक्री और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल
शिवसेना नेता ने प्रेस को बताया कि वर्तमान में जब इस अयस्क को नीलामी के माध्यम से करोड़ों में बेचा गया, तो किसानों ने सवाल उठाए कि उनकी ज़मीन का उपयोग कर लाभ कमाने वाली एजेंसी उन्हें क्यों मुआवजा नहीं दे रही है। इस संबंध में जब पूर्व वन मंडल अधिकारी दुलेश्वर प्रसाद साहू से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर टालमटोल शुरू कर दी।
मडावी का कहना है कि –
> “ग्राम साल्हे में रखे गए हजारों टन लोह अयस्क में से काफी बड़ी मात्रा अवैध रूप से निजी कंपनियों को बेच दी गई है, और इसमें पूर्व वन मंडल अधिकारी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से संदिग्ध है। एक बड़ा हिस्सा बिना नीलामी, दस्तावेज और रिकॉर्ड के काले बाज़ार में चला गया, और अब विभाग पारदर्शिता से भाग रहा है।”
शिवसेना की चार प्रमुख मांगें – मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
सुखचंद मडावी ने छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस मामले में हस्तक्षेप कर नीचे दिए गए चार प्रमुख बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई की माँग की है:
1. जिन किसानों की निजी भूमि पर अयस्क रखा गया, उन्हें भूमि उपयोग का किराया और मुआवजा शीघ्र दिया जाए।
2. हजारों टन अवैध रूप से बेचे गए लोह अयस्क की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों की पहचान की जाए।
3. पूर्व वन मंडल अधिकारी दुलेश्वर प्रसाद साहू पर कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की छवि को सुदृढ़ करने के लिए इस घोटाले को उदाहरण बनाकर पारदर्शी कार्रवाई की जाए।
न्याय न मिला तो शिवसेना आंदोलन करेगी – मडावी
मडावी ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को शीघ्र न्याय नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो शिवसेना सड़क से लेकर सदन तक इस मामले को उछालेगी। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ ग्राम साल्हे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे सरकार की आंखों के सामने किसानों की जमीन का शोषण कर सिस्टम में बैठे कुछ अधिकारी करोड़ों की हेराफेरी कर रहे हैं।


















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