सिविल अस्पताल का पुराना भवन डिस्मेंटल, इसलिए नए भवन में शुरू हो संचालन
वर्षाकाल के दौरान पुराने भवन की छत से टपकता है पानी, प्रसूति महिलाएं व मरीज होते परेशान
सत्यार्थ न्यूज़ लाइव
से मनोज कुमार माली सोयत कला नगर

सुसनेर नगर में लग भग 120 से भी अधिक गांव के लोग जिस सिविल अस्पताल पर इलाज कराने के लिए निर्भर है। उस अस्पताल का पुराना भवन डिस्मेंटल हो चुका है। हालात यह है कि वर्तमान में जहां ओपीडी संचालित होती है वहाँ वर्षाकाल के समय छत से पानी टपकता है। ऐसे में मरीजो के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो इस वर्ष बारिश के मौसम में दिक्कतें बढ़ सकती है। इसलिए समय रहते नय भवन में सिविल अस्पताल का संचालन शुरू होना चाहिए। प्रभारी सी बीएमओ डॉक्टर बृजभूषण पाटीदार के अनुसार अस्पताल को नए भवन में शुरू करने को लेकर तैयारियां की जा रही है गत दिवस प्रशासन के दल में नए भवन का निरीक्षण भी किया है और जल्द ही शेष बचे कार्य को पूरा करने के निर्देश दिये है। पुराने अस्पताल भवन के जर्जर होने के चलते जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने भी प्रशासन के जिम्मेदारो से इसे जल्द ही नवीन भवन में शिफ्ट करने की मांग की है।
प्रसूति वार्ड की छत से टपकता है पानी
सिविल अस्पताल के प्रभारी सीबीएमओ डॉक्टर बृजभूषण पाटीदार ने जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल के पुराने भवन में प्रस्तुति वार्ड भी संचालित होता है जिसमें बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है इसके चलते प्रस्तुति महिलाओ एवं नवजात शिशुओ के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसलिए नए भवन में सबसे पहले मैटरनिटी वार्ड को शिफ्ट किया जाएगा।
नए भवन में शिफ्ट होने इसलिए हो रही रही देरी
दरअसल सिविल अस्पताल के नवीन भवन को लेकर किये गए निर्माण में गड़बड़ियों और कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे है। इसको लेकर प्रशासन ने जांच की कमान संभाल ली है। इसलिए अस्पताल को नए भवन में शिफ्ट होने में देरी हो रही है।
अपर कलेक्टर का जांच दल कर रहा मामले की जांच
अपर जिला कलेक्टर आर पी वर्मा ने 4 सदस्यीय जांच दल का गठन किया है, जिसे एक सप्ताह में जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच दल ने गत दिवस नए भवन का निरीक्षण भी किया है। जांच दल ने हाल ही में अस्पताल परिसर का दौरा कर निर्माण कार्य की बारीकियों की जांच की। दल ने कमरों की लंबाई-चौड़ाई की माप-तौल की, लगाए गए टाइल्स की गुणवत्ता परखी और मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति का जायज़ा लिया। साथ ही निर्माण कार्य के बदले में किए गए भुगतान की जानकारी जुटाते हुए संबंधित बिल और भुगतान वाउचर की मांग की गई है।
प्रशासन गंभीर, कार्रवाई के संकेत
अपर कलेक्टर वर्मा ने बताया कि जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
8.68 करोड़ की लागत से बना है भवन
गौरतलब है कि यह नवीन भवन 8 करोड़ 68 लाख रुपए की लागत से तैयार हुआ है। कार्य पूर्ण होने के बाद भी कुछ बिंदुओं पर कमियां शेष हैं, जिन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

















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