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माउंट आबू की तलेटी पर स्थित टोकरा गांव में भीषण गर्मी के बीच संत जोतनाथ महाराज की तपस्या जारी, खुले मैदान में तप कर रहे संत

माउंट आबू की तलेटी पर स्थित टोकरा गांव में भीषण गर्मी के बीच संत जोतनाथ महाराज की तपस्या जारी, खुले मैदान में तप कर रहे संत

संवाददाता:- हर्षल रावल
सिरोही/राज.
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सिरोही। सिरोही को देवनगरी कहा जाता है। क्योंकि इस धरा पर कई ऐतिहासिक मंदिर तपस्वी स्थल आज भी उपस्थित है। जहां पर संत-महात्माओ ने कठोर तपस्या करके सिद्धि को प्राप्त किया। वैसे तो आपने कई प्रकार के साधु संत व उनकी तपस्या देखी होगी। लेकिन राजस्थान में भीषण गर्मी में “अग्नि तपस्या” कर रहे साधुओं की साधना आपको चौका देगी।

संत जोतनाथ महाराज की ऐसी तपस्या देखने को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना जाना आरंभ हो गया है। मंदिर में सुबह 10 बजे से भक्त पहुंच जाते हैं। महाराज शिष्यों के साथ कंडे लेकर आते हैं और पंच धूना के ऊपर थप्पी लगाते हैं। फिर साधु हनुमानजी के दर्शन करने जाते हैं।

माउंट आबू की तलेटी पर स्थित टोकरा गांव में एक साधु “अग्नि तप” कर रहे हैं। हरियाणा के हिसार स्थित देमण गांव के पास कलीगर मठ के बालयोगी ज्योत नाथ महाराज नौतपा की भीषण गर्मी के बीच अग्नि तपस्या कर रहे है, जिसे पंच धूनी तपस्या कहा जाता है। पिछले करीब 20 वर्षों से पंच धूणी तपस्या व जलधारा तपस्या करते आ रहे हैं। आबू पर्वत को देवभूमि कहा जाता है। यहां पर पांडवों का अज्ञातवास भी हुआ है। इसके अतिरिक्त आबू पर्वत से और भी ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हुए हैं। आबू पर्वत के घने जंगलों में आज भी सैकड़ों साधु संत तपस्या कर रहे हैं। दूसरी ओर टोकरा गांव के हनुमानजी मंदिर में इन दिनों भीषण गर्मी के बीच बाल योगी ज्योत नाथ महाराज के अग्नि तप को क्षेत्र में शांति व उत्तम वर्षा की कामना से देखा जा रहा है।


तपस्या अग्नि तप कर रहे बाल योगी ज्योत नाथ महाराज के भक्त व ग्रामीणों ने बताया कि महाराज ने यहां पर अग्नि तपस्या का आरंभ 2 मई को की थी। 10 जून को इसका समापन होगा। यहां प्रतिदिन 5 धूनी लगाई जाती है, जिसमें प्रथम दिन दो कंडे से आरंभ की थी। प्रत्येक धूनी में प्रतिदिन दो कंडे बढ़ाए जाते हैं। सोमवार (26 मई) को अग्नि तप के 26 वें दिन प्रत्येक धुनी में 54 – 54 कंडे जलाए जा रहे हैं। वहीं अग्नि तपस्या के अंतिम दिन 10 जून को प्रत्येक धूनी में 82 – 82 कंडे जलाए जाएंगे‌।


बता दें कि बालयोगी महाराज कंडों में आग के बीच बैठकर दोपहर 12:30 बजे से दोपहर करीब 03:30 बजे तक तपस्या करते हैं। उसके पश्चात मौन धारण करते हैं। मौके पर उपस्थित भक्तों ने बताया कि यह हठयोग साधुओं की ओर से स्वयं के लिए नहीं। बल्कि समाज कल्याण के लिए किया जाता है। जिससे क्षेत्र में उत्तम वर्षा हो, लोग सुखी रहें। क्षेत्र में समृद्धि आए। 11 कंडे प्रज्ज्वलित करके आरंभ की तपस्या अब 26 दिन पश्चात हुए 54 कंडे जला रहे। जोतनाथ महाराज ने 26 दिन पूर्व पंच मुख हनुमान मंदिर में भीषण गर्मी में खुले मैदान में तपस्या आरंभ की थी। तब प्रथम दिवस 11 छाणे लगाकर पंच धुना का आरंभ किया और प्रत्येक छाणे बढ़ाते हैं और 26वें दिन 56 छणे हो गए। यह तपस्या 41 दिन चलेगी।

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