सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता नरसीराम शर्मा
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
🙏हर हर महादेव🙏
🕉️आज का पंचांग🕉️
दिनांक:- 26/02/2025, बुधवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष,
फाल्गुन””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि——— त्रयोदशी 11:07:58 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र———– श्रवण 17:22:22
योग———— परिघ 26:56:26
करण———- वणिज 11:07:58
करण——- विष्टि भद्र 22:04:56
वार———————– बुधवार
माह——————— फाल्गुन
चन्द्र राशि—– मकर 28:36:03
चन्द्र राशि————— कुम्भ
सूर्य राशि—————– कुम्भ
रितु———————— वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर——————- क्रोधी
संवत्सर (उत्तर) ————-कालयुक्त
विक्रम संवत————– 2081
गुजराती संवत———— 2081
शक संवत—————–1946
कलि संवत—————- 5125
वृन्दावन
सूर्योदय————– 06:47:46
सूर्यास्त—————- 18:16:39
दिन काल———— 11:28:52
रात्री काल————- 12:30:08
चंद्रास्त————– 16:34:03
चंद्रोदय—————- 30:18:34
लग्न—- कुम्भ 13°29′ , 313°29′
सूर्य नक्षत्र————— शतभिषा
चन्द्र नक्षत्र—————— श्रवण
नक्षत्र पाया——————- ताम्र
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
खे—- श्रवण 11:42:34
खो—- श्रवण 17:22:22
गा—- धनिष्ठा 23:00:10
गी—- धनिष्ठा 28:36:03
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= कुम्भ 13°40, शतभिषा 3 सी
चन्द्र= मकर 17°30 , श्रवण 3 खे
बुध =कुम्भ 27°52 ‘ पू o भा o 2 सो
शु क्र= मीन 16°05, उ o फाo’ 4 ञ
मंगल=मिथुन 22°30 ‘ पुनर्वसु ‘ 1 के
गुरु=वृषभ 17°30 रोहिणी, 3 वी
शनि=कुम्भ 26°28 ‘ पू o भा o , 2 सो
राहू=(व) मीन 04°25 उo भा o, 1 दू
केतु= (व)कन्या 04°25 उ oफा o 3 पा
🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮
राहू काल 12:32 – 13:58 अशुभ
यम घंटा 08:14 – 09:40 अशुभ
गुली काल 11:06 – 12: 32अशुभ
अभिजित 12:09 – 12:55 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:09 – 12:55 अशुभ
वर्ज्यम 21:08 – 22:38 अशुभ
प्रदोष 18:17 – 20:49 शुभ
पंचक ¹ 28:36* – अहोरात्र अशुभ
चोघडिया, दिन
लाभ 06:48 – 08:14 शुभ
अमृत 08:14 – 09:40 शुभ
काल 09:40 – 11:06 अशुभ
शुभ 11:06 – 12:32 शुभ
रोग 12:32 – 13:58 अशुभ
उद्वेग 13:58 – 15:24 अशुभ
चर 15:24 – 16:51 शुभ
लाभ 16:51 – 18:17 शुभ
चोघडिया, रात
उद्वेग 18:17 – 19:50 अशुभ
शुभ 19:50 – 21:24 शुभ
अमृत 21:24 – 22:58 शुभ
चर 22:58 – 24:32* शुभ
रोग 24:32* – 26:05* अशुभ
काल 26:05* – 27:39* अशुभ
लाभ 27:39* – 29:13* शुभ
उद्वेग 29:13* – 30:47* अशुभ
होरा, दिन
बुध 06:48 – 07:45
चन्द्र 07:45 – 08:43
शनि 08:43 – 09:40
बृहस्पति 09:40 – 10:37
मंगल 10:37 – 11:35
सूर्य 11:35 – 12:32
शुक्र 12:32 – 13:30
बुध 13:30 – 14:27
चन्द्र 14:27 – 15:24
शनि 15:24 – 16:22
बृहस्पति 16:22 – 17:19
मंगल 17:19 – 18:17
होरा, रात
सूर्य 18:17 – 19:19
शुक्र 19:19 – 20:22
बुध 20:22 – 21:24
चन्द्र 21:24 – 22:27
शनि 22:27 – 23:29
बृहस्पति 23:29 – 24:32
मंगल 24:32* – 25:34
सूर्य 25:34* – 26:37
शुक्र 26:37* – 27:39
बुध 27:39* – 28:42
चन्द्र 28:42* – 29:44
शनि 29:44* – 30:47
🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩
कुम्भ > 05:02 से 06:38 तक
मीन > 06:38 से 08:06 तक
मेष > 08:06 से 09:44 तक
वृषभ > 09:44 से 11:42 तक
मिथुन > 11:42 से 14:00 तक
कर्क > 14:00 से 16:16 तक
सिंह > 16:16 से 18:26 तक
कन्या > 18:26 से 20:40 तक
तुला > 20:40 से 22:54 तक
वृश्चिक > 22:54 से 01:12 तक
धनु > 01:12 से 03:08 तक
मकर > 03:08 से 05:00 तक
विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट-दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
दिशा शूल ज्ञान————उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।
महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्।
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
15 + 13 + 4 +1 = 33 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
केतु ग्रह मुखहुति
शिव वास एवं फल -:
28 + 28 + 5 = 61 ÷ 7 = 5 शेष
ज्ञानेलायां = कष्ट कारक
भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
11:08 से रात्रि 22:01 तक
पाताल लोक =धन लाभ कारक
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
महाशिवरात्रि व्रत
प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी महा शिवरात्रि के पावन पर्व दिनांक 26 फरवरी 2025 बुधवार को मनाया जायेगा
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
तादृशी जायते बुध्दिर्व्यवसायोऽपि तादृशः ।
सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता ।।
।। चा o नी o।।
सर्व शक्तिमान के इच्छा से ही बुद्धि काम करती है, वही कर्मो को नियंत्रीत करता है. उसी की इच्छा से आस पास में मदद करने वाले आ जाते है.
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -: गुणत्रयविभागयोग :- अo-14
कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।,
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥,
अर्जुन बोले- इन तीनों गुणों से अतीत पुरुष किन-किन लक्षणों से युक्त होता है और किस प्रकार के आचरणों वाला होता है तथा हे प्रभो! मनुष्य किस उपाय से इन तीनों गुणों से अतीत होता है?॥,21॥,
💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष-मानसिक शांति के लिए किए गए प्रयास सफल रहेंगे। कोर्ट-कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। प्रसन्नता रहेगी। किसी धार्मिक यात्रा की योजना बनेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा।
🐂वृष-वाहन व मशीनरी इत्यादि के प्रयोग में लापरवाही न करें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यापार ठीक चलेगा।
👫मिथुन-कार्यक्षेत्र के लिए नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। बिगड़े काम बन सकते हैं। समाजसेवा करने का मन बनेगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यस्तता रहेगी। आराम का समय नहीं मिलेगा। थकान रहेगी।
🦀कर्क-व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग व मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे।
🐅सिंह-समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। खोई हुई वस्तु मिलने के योग हैं। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। जोखिम व जमानत के कार्य बिलकुल न करें।
🙍♀️कन्या-शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कारोबार अच्छा चलेगा। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। किसी आनंदोत्सव में भाग ले सकते हैं। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी।
⚖️तुला-किसी तरह से बड़ा लाभ होने की संभावना है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। किसी तरह के विवाद में विजय प्राप्त होगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में नया कार्य मिल सकता है।
🦂वृश्चिक-कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। थकान व कमजोरी रह सकती है। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। दूसरों से अधिक अपेक्षा न करें। बेवजह चिड़चिड़ापन रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। कार्य में मन नहीं लगेगा।
🏹धनु-भावना में बहकर महत्वपूर्ण निर्णय न लें। नौकरी में कार्यभार रहेगा। लाभ होगा। स्वास्थ्य के संबंध में लापरवाही न करें। स्वास्थ्य पर व्यय होगा। दु:खद समाचार मिल सकता है। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से हानि होगी।
🐊मकर-मनपसंद व्यंजनों का आनंद प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य उत्साह व लगन से कर पाएगा। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। धन प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। प्रमाद न करें।
🍯कुंभ-घर,दुकान, फैक्टरी व शोरूम इत्यादि के खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। कारोबार में बड़ा लाभ हो सकता है। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आय के नए स्रोत प्राप्त हो सकते हैं। रुके काम बनेंगे। घर-बाहर उत्साह व प्रसन्नता से काम कर पाएंगे।
🐟मीन-प्रसन्नता का वातावरण निर्मित होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में मातहत साथ देंगे।
महा शिवरात्रि 26 फरवरी बुधवार, व्रत – पूजन विधि-विधान व शुभ मुहूर्त।
🙏 नम: शिवाय- नम: शिवाय शरणागतम् 🙏
🙏 जय सदगुरू नारद भगवान शरणागतम् 🙏
🕉️ महाशिवरात्रि 2025 तिथि निर्णय ✡️
पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 08 मिनट पर होगी। इसका समापन अगले दिन 27 फरवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए उदया तिथि देखना जरूर नहीं होता है।
इस साल महाशिवरात्रि का व्रत 26 फरवरी,आज बुधवार को है।
शिवरात्रि अर्थात रात्रि-महाशिवरात्रि मे विशेष रूप से रात्रिकाल पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती हैं
🌺🔱महादेव का संक्षिप्त परिचय🔱🌺
शिवमहापुराण के अनुसार महादेव के तीन स्वरूप :-
1•महादेव-निराकार- ज्योति-लिंग स्वरूप – परमात्मा बृहम- श्री कृष्ण स्वरूप
2•सदाशिव -पंचमुखी, दुर्गा माता के पति
3•शंकर-कैलाश पर्वत वासी, गंगाधर, सती व पार्वती पति
विशेष व विस्तृत ज्ञान के लिए शिवमहापुराण व बृहमवैवत पुराण का अध्ययन करे।
महाशिवरात्रि महादेव के निराकार ज्योति ( लिंग ) स्वरूप के पूजन का विशेष दिन है । महादेव के ज्योति ( लिंग ) स्वरूप पूजन से सभी स्वरूपो व देवो का पूजन हो जाता है।
✡️महाशिवरात्रि 2025 पूजा शुभ मुहूर्त✡️
26 फरवरी, बुद्धवार को महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की पूजा का समय
➡️सुबह 6•57 से 9•42 तक
➡️दोपहर 11•06 से 12•35 तक
➡️सायंकाल 3•25 से 6•08 तक
🔱✡️महाशिवरात्रि का निशित काल शुभ मुहूर्त✡️🔱
निशिता काल मुहूर्त – रात में 12 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक (27 फरवरी, वृहस्पतिवार रात्रिकाल)
🏵✡️महाशिवरात्रि मे रात्रिकाल मे चार प्रहर की पूजा का समय✡️🏵
1: पहले प्रहर की पूजा- 26 फरवरी, बुधवार 2025 सायंकाल 6:43 PM मिनट से रात्रि 9:47 PM मिनट तक।
2: दूसरे प्रहर की पूजा- 26 फरवरी रात्रि 9:47 PM मिनट से 12: 51 मिनट तक।
3: तीसरे प्रहर की पूजा- 27 फरवरी रात्रि 12:51AM मिनट से सुबह 3 :55 AM मिनट तक।
4: चौथे प्रहर की पूजा- 27 फरवरी सुबह 3:55 AM मिनट से 6:50 AM मिनट तक।
विशेष ध्यान रखे:-
व्रत पारण/ खोलने का शुभ समय- 27 फरवरी गुरुवार 2025 सुबह 6 बजकर 59 मिनट से 8.54 तक रहेगा
महाशिवरात्रि पर शिवजी को प्रसन्न करने के लिए क्या करें ?
1- महाशिवरात्रि पर किसी बड़े पात्र में धातु से बने शिवलिंग या मिट्टी से बने शिवलिंग की स्थापना करें यदि संभव हो तो नर्मदेश्वर शिव लिंग की स्थापना करे।
2- महाशिवरात्रि पर चार पहर की रात्रि काल मे शिव पूजा करनी चाहिए।
3- शिव पूजा में सबसे पहले मिट्टी के पात्र में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि एक साथ डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें।
4- महाशिवरात्रि के दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना या सुनना चाहिए व अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
5- सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व दिशा में पूजन आरती की तैयारी कर लें।
6- कोई सामग्री उपलब्ध न होने पर केवल शुद्ध ताजा जल शिवजी को अर्पित करने पर प्रसन्न हो जाते हैं ।
7 – इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र-जल से शिव की पूजा-अर्चना करके जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करने से समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं।
🔱🏵 महाशिवरात्रि की पूजा विधि..🏵🔱
1- शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करा कराएं केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं पूरी रात्रि का दीपक जलाएं चंदन का तिलक लगाएं।
2- तीन पती वाले अखंड बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।
3 – पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।
🕉️ शिव की प्रसन्नता वर्धक चीजे ✡️
शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतुरा, सफेद रंग के फूल चढ़ाते हैं और दूध, पंचामृत व जलाभिषेक करते हैं
शिवलिंग पर भगवान शिव के प्रिय रंग सफेद रंग के फूल ही चढ़ाने चाहिए.
🕉️ महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर रुद्राभिषेक इन पदार्थो से विशेष फलदाई माना गया है✡️
ग्रह बाधा नाश हेतु-सरसों के तेल से अभिषेक
ग्रहबाधा नाश हेतु भगवान शिव का सरसों के तेल से अभिषेक करें। भगवान शिव के प्रलयंकर स्वरुप का मानसिक ध्यान करें फिर ताम्बे के पात्र में सरसों का तेल भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम का तिलक करें ओम भं भैरवाय नम: का जाप करते हुए पात्र पर मौली बाधें पंचाक्षरी मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करें। शिवलिंग पर सरसों के तेल की पतली धार बनाते हुए-रुद्राभिषेक करें। अभिषेक करते हुए ओम नाथ नाथाय नाथाय स्वाहा मंत्र का जाप करें। शिवलिंग को साफ जल से धो कर वस्त्र से अच्छी तरह से पौंछ कर साफ करें। सरसों के तेल से अभिषेक करने से ग्रहबाधा के साथ शत्रुओं का शमन होता है। कोई भी गुप्त शत्रु हो उसका नाश निश्चित है।
अखंड धन लाभ व हर तरह के कर्ज से मुक्ति के लिए
भगवान शिव का फलों के रस से अभिषेक करें
भगवान शिव के नील कंठ स्वरूप का मानसिक ध्यान करें। ताम्बे के पात्र में गन्ने का रस भर कर पात्र को चारों और से कुमकुम का तिलक करें। ॐ कुबेराय नम: का जाप करते हुए पात्र पर मौली बाधें, पंचाक्षरी मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप करते हुए फूलों की कुछ पंखुडियां अर्पित करें शिवलिंग पर फलों का रस की पतली धार बनाते हुए-रुद्राभिषेक करें। अभिषेक करते हुए – ओम ह्रुं नीलकंठाय स्वाहा मंत्र का जाप करें। शिवलिंग पर स्वच्छ जल से भी अभिषेक करें।गन्ने के रस के अलावा आप अनार के रस या किसी भी फल के रस से महादेव का अभिषेक कर सकते हैं.इससे आपको अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होगी।
️🕉️ शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित ✡️
रोली और कुमकुम
हिंदू धर्म में पूजा करते समय देवी देवताओं को रोली और कुमकुम से तिलक लगाया जाता है लेकिन शिवलिंग पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाने की मनाही होती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव धरती पर योग मुद्रा में विराजते हैं और इस मुद्रा में होने के कारण उन्हें रोली और कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए।
️केतकी के फूल
भगवान शिव की पूजा करते समय भूलकर केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव केतकी के फूल की झूठी गवाही के कारण पसंद नहीं करते हैं और शिवलिंग पर केतकी के फूल चढ़ाने की मनाही होती है।
लाल रंग के फूल
लाल रंग को उग्रता का रंग माना जाता है और भगवान शिव भोले भंडारी कहलाते हैं इसलिए भगवान शिव को लाल रंग के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। यही कारण है कि शिवलिंग पर लाल रंग के फूलों को चढ़ाने की मनाही होती है।
️तुलसी पत्र
तुलसी के पत्तों का भी हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। पूजा पाठ में तुलसी का उपयोग होता है लेकिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाने चाहिए मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने तुलसी के पति राक्षस जालंधर का वध किया था। इसके अलावा तुलसी को माता लक्ष्मी को रूप माना जाता है. इसलिए तुलसी के पत्ते कभी भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते हैं।
️नारियल
शिवलिंग पर नारियल चढ़ाना भी वर्जित है। नारियल जिसे श्रीफल भी कहते हैं धन की देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है। इसीलिए नारियल को भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर चढ़ाने की मनाही होती है।
टूटे चावल
भगवान शिव की पूजा करते समय भूलकर भी अक्षत के रूप से टूटे चावल का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे भगवान शिव नाराज हो सकते हैं।शिवलिंग के लिए हमेशा अक्षत – साबुत चावल का ही उपयोग करना चाहिए।
🏵🔱 महाशिवरात्रि विशेष 🔱🏵
महाशिवरात्रि पर शिवजी के अभिषेक के साथ ही कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से भी शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।
शिवजी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना चाहिए।
🏵 चमत्कारिक शिव मंत्र 🏵
1. ॐ शिवाय नम:
2. ॐ सर्वात्मने नम:
3. ॐ त्रिनेत्राय नम:
4. ॐ हराय नम:
5. ॐ इन्द्रमुखाय नम:
6. ॐ श्रीकंठाय नम:
7. ॐ वामदेवाय नम:
8. ॐ तत्पुरुषाय नम:
9. ॐ ईशानाय नम:
10. ॐ अनंतधर्माय नम:
11. ॐ ज्ञानभूताय नम:
12. ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
13. ॐ प्रधानाय नम:
14. ॐ व्योमात्मने नम:
15. ॐ महाकालाय नम:
16. शिव गायत्री मंत्र : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।।
17. ॐ ह्रीं नमः शिवाय ह्रीं ॐ।
18. ॐ नमः शिवाय
19. ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमय ह्रीं ऐं ऊं।
20. ॐ आशुतोष नम:
🏵 महाशिवरात्रि मे विशेष रूप से रात्रिकाल मे भगवान शिव के 108 नाम के पाठ व संकीर्तन की विशेष महत्ता 🏵
1- शिव – कल्याण स्वरूप
2- महेश्वर – माया के अधीश्वर
3- शम्भू – आनंद स्वरूप वाले
4- पिनाकी – पिनाक धनुष धारण करने वाले
5- शशिशेखर – सिर पर चंद्रमा धारण करने वाल
6- वामदेव – अत्यंत सुंदर स्वरूप वाले
7- विरूपाक्ष – विचित्र आंख वाले(शिव के तीन नेत्र हैं)
8- कपर्दी – जटाजूट धारण करने वाले
9- नीललोहित – नीले और लाल रंग वाले
10- शंकर – सबका कल्याण करने वाले
11- शूलपाणी – हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
12- खटवांगी- खटिया का एक पाया रखने वाले
13- विष्णुवल्लभ – भगवान विष्णु के अति प्रिय
14- शिपिविष्ट – सितुहा में प्रवेश करने वाले
15- अंबिकानाथ- देवी भगवती के पति
16- श्रीकण्ठ – सुंदर कण्ठ वाले
17- भक्तवत्सल – भक्तों को अत्यंत स्नेह करने वाले
18- भव – संसार के रूप में प्रकट होने वाले
19- शर्व – कष्टों को नष्ट करने वाले
20- त्रिलोकेश- तीनों लोकों के स्वामी
21- शितिकण्ठ – सफेद कण्ठ वाले
22- शिवाप्रिय – पार्वती के प्रिय
23- उग्र – अत्यंत उग्र रूप वाले
24- कपाली – कपाल धारण करने वाले
25- कामारी – कामदेव के शत्रु, अंधकार को हरने वाले
26- सुरसूदन – अंधक दैत्य को मारने वाले
27- गंगाधर – गंगा जी को धारण करने वाले
28- ललाटाक्ष – ललाट में आंख वाले
29- महाकाल – कालों के भी काल
30- कृपानिधि – करूणा की खान
31- भीम – भयंकर रूप वाले
32- परशुहस्त – हाथ में फरसा धारण करने वाले
33- मृगपाणी – हाथ में हिरण धारण करने वाले
34- जटाधर – जटा रखने वाले
35- कैलाशवासी – कैलाश के निवासी
36- कवची – कवच धारण करने वाले
37- कठोर – अत्यंत मजबूत देह वाले
38- त्रिपुरांतक – त्रिपुरासुर को मारने वाले
39- वृषांक – बैल के चिह्न वाली ध्वजा वाले
40- वृषभारूढ़ – बैल की सवारी वाले
41- भस्मोद्धूलितविग्रह – सारे शरीर में भस्म लगाने वाले
42- सामप्रिय – सामगान से प्रेम करने वाले
43- स्वरमयी – सातों स्वरों में निवास करने वाले
44- त्रयीमूर्ति – वेदरूपी विग्रह करने वाले
45- अनीश्वर – जो स्वयं ही सबके स्वामी है
46- सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले
47- परमात्मा – सब आत्माओं में सर्वोच्च
48- सोमसूर्याग्निलोचन – चंद्र, सूर्य और अग्निरूपी आंख वाले
49- हवि – आहूति रूपी द्रव्य वाले
50- यज्ञमय – यज्ञस्वरूप वाले
51- सोम – उमा के सहित रूप वाले
52- पंचवक्त्र – पांच मुख वाले
53- सदाशिव – नित्य कल्याण रूप वाल
54- विश्वेश्वर- सारे विश्व के ईश्वर
55- वीरभद्र – वीर होते हुए भी शांत स्वरूप वाले
56- गणनाथ – गणों के स्वामी
57- प्रजापति – प्रजाओं का पालन करने वाले
58- हिरण्यरेता – स्वर्ण तेज वाले
59- दुर्धुर्ष – किसी से नहीं दबने वाले
60- गिरीश – पर्वतों के स्वामी
61- गिरिश्वर – कैलाश पर्वत पर सोने वाले
62- अनघ – पापरहित
63- भुजंगभूषण – सांपों के आभूषण वाले
64- भर्ग – पापों को भूंज देने वाले
65- गिरिधन्वा – मेरू पर्वत को धनुष बनाने वाले
66- गिरिप्रिय – पर्वत प्रेमी
67- कृत्तिवासा – गजचर्म पहनने वाले
68- पुराराति – पुरों का नाश करने वाले
69- भगवान् – सर्वसमर्थ ऐश्वर्य संपन्न
70- प्रमथाधिप – प्रमथगणों के अधिपति
71- मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले
72- सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले
73- जगद्व्यापी- जगत् में व्याप्त होकर रहने वाले
74- जगद्गुरू – जगत् के गुरू
75- व्योमकेश – आकाश रूपी बाल वाले
76- महासेनजनक – कार्तिकेय के पिता
77- चारुविक्रम – सुन्दर पराक्रम वाले
78- रूद्र – भयानक
79- भूतपति – भूतप्रेत या पंचभूतों के स्वामी
80- स्थाणु – स्पंदन रहित कूटस्थ रूप वाले
81- अहिर्बुध्न्य – कुण्डलिनी को धारण करने वाले
82- दिगम्बर – नग्न, आकाशरूपी वस्त्र वाले
83- अष्टमूर्ति – आठ रूप वाले
84- अनेकात्मा – अनेक रूप धारण करने वाले
85- सात्त्विक- सत्व गुण वाले
86- शुद्धविग्रह – शुद्धमूर्ति वाले
87- शाश्वत – नित्य रहने वाले
88- खण्डपरशु – टूटा हुआ फरसा धारण करने वाले
89- अज – जन्म रहित
90- पाशविमोचन – बंधन से छुड़ाने वाले
91- मृड – सुखस्वरूप वाले
92- पशुपति – पशुओं के स्वामी
93- देव – स्वयं प्रकाश रूप
94- महादेव – देवों के भी देव
95- अव्यय – खर्च होने पर भी न घटने वाले
96- हरि – विष्णुस्वरूप
97- पूषदन्तभित् – पूषा के दांत उखाड़ने वाले
98- अव्यग्र – कभी भी व्यथित न होने वाले
99- दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने वाले
100- हर – पापों व तापों को हरने वाले
101- भगनेत्रभिद् – भग देवता की आंख फोड़ने वाले
102- अव्यक्त – इंद्रियों के सामने प्रकट न होने वाले
103- सहस्राक्ष – हजार आंखों वाले
104- सहस्रपाद – हजार पैरों वाले
105- अपवर्गप्रद – कैवल्य मोक्ष देने वाले
106- अनंत – देशकालवस्तु रूपी परिछेद से रहित
107- तारक – सबको तारने वाले
108- परमेश्वर – परम ईश्वर
आप सभी देशवासियों को महाशिवरात्रि महा पर्व की हार्दिक बधाई एवं अशिम शुभकामनाएं।


















Leave a Reply