जागरूकता के माध्यम से ही साइबर अपराधों से बचा जा सकता है
– सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर सरस्वती लॉ कॉलेज पलवल में हुआ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
पलवल, 11 फरवरी
कृष्ण कुमार छाबड़ा

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के तत्वावधान में जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं चेयरमैन पुनीश जिंदिया व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सचिव प्राधिकरण मेनका सिंह के मार्गदर्शन में आज सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर सरस्वती लॉं कॉलेज पलवल में प्राधिकरण अधिवक्ता बचाव पक्ष जगत सिंह रावत व प्राधिकरण अधिवक्ता पिंकी शर्मा द्वारा विशेष कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन विधि संकाय के छात्र व छात्राओं के लिए किया गया। शिविर में अध्यक्षता उप प्रधानाचार्या डॉ मोनिका गुप्ता व मंच संचालन प्रवक्ता डॉ नरेश शर्मा द्वारा किया गया। शिविर प्राधिकरण व सरस्वती लॉ कॉलेज के संयोजन में आयोजित किया गया। शिविर में पुलिस साइबर विभाग से देवी सिंह एएसआई व प्राधिकरण के अधिकार मित्र सुंदर लाल ने भी भागीदारी की। शिविर का आरंभ माता सरस्वती वंदना व दीप प्रज्वलन के माध्यम से किया गया।
जागरूकता शिविर में अधिवक्ता प्राधिकरण जगत सिंह रावत व पिंकी शर्मा व देवी सिंह एएसआई साइबर शाखा व डॉ नरेश शर्मा ने सुरक्षित इंटरनेट दिवस व बेहतर इंटरनेट के लिए एक साथ थीम व इंटरनेट दिवस के उद्देश्य, ऑनलाइन धोखा-धड़ी, साइबर बुल्लिंग, मालवेयर एंड वायरस के बारे में जानकारी दी। अधिवक्ता प्राधिकरण ने विशेष तौर से विधिक सेवाएं प्राधिकरण अधिनियम, प्राधिकरण की सेवाओं, नालसा व हालसा योजनाओं, हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना, वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र व हेल्पलाइन नंबर 01275-298003 व मध्यस्थ केंद्र व जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता व कानूनी सलाह वगैरा के बारे में जानकारी प्रदान की। इसके अलावा वक्ताओं ने बताया कि जागरूकता के माध्यम से साइबर क्राइम से बचा जा सकता है और साइबर अपराधों को कम किया जा सकता है। शिविर में ये भी बताया गया कि कैसे फेक वेबसाइट की पहचान की जा सकती है। उन्होने ऑनलाइन धोखा-धड़ी जैसे व साइबर बुलिंग, साइबर ग्रूमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, ईमेल धोखा-धडी, ऑनलाइन लेनदेन में धोखा-धड़ी, सोशल नेटवर्किंग प्रोफ़ाइल की सुरक्षा के उपाय आदि के बारे में भी जानकारी दी। इस शिविर के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ष्ट, 66 ष्ठ व कंपनी अधिनियम की धारा 36, 74 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 506, 507, 509 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गयी है। साइबर स्पेस के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधों में भी अत्यंत तीव्र गति से वृद्धि हुई है। बच्चों को इससे बहुत अधिक खतरा है क्योंकि वे साइबर स्पेस से जुड़े खतरों व सुरक्षा उपायों कि सीमित समझ के साथ साइबर समझ का उपयोग कर रहे हैं। बच्चों को उचित मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए ताकि वे स्वयं को साइबर तकनीक के प्रतिकूल प्रभाव से बचा सकें। उन्होंने छात्रों को साइबर सुरक्षा, नए खतरों व साइबर अपराधों से बचने के उपाय भी बताये। साइबर स्पेस के समय सतर्क रहकर और एहतियात बरत कर साइबर अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होने बताया आपातकालीन ईमेल प्राप्त होने पर उस व्यक्ति से फोन पर अथवा अन्य जानकार व्यक्तियों से संपर्क करके ईमेल की वास्तविकता का पता लगाने व चौकन्ना रहने और समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहने की आदत डालने व व्यक्तिगत डाटा को साझा न करने, लालच में न आने, साइबर बुलिंग होने पर पुलिस शिकायत करने व साइबर अपराधों को न छुपाने व साइबर अपराध होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत सूचित करने जैसे विभिन्न उपायों के बारे में भी जानकारी प्रदान करके साइबर अपराधों से बचने के लिए प्रेरित किया।
शिविर में छात्रों को जरूरतमंदों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता सेवाओं व साइबर अपराध संबंधी, राष्ट्र सेवा के लिए एक छात्र के कर्तव्य व अधिकारों व कानूनी विषयों संबंधी सवाल जवाब के माध्यम से भी मुफ्त कानूनी सलाह देकर जागरूक किया गया। शिविर के माध्यम से साइबर अपराधों पर किशोरों व छात्रों के लिए पुस्तिका भी प्रदान की। शिविर के साथ-साथ सरस्वती विधि संस्थान का स्थापना दिवस मनाया गया और स्थापना दिवस पर भी विधि संकाय के छात्र व छात्राओं व संस्था के शिक्षकों के द्वारा प्रकाश डाला गया। विधि संकाय के छात्रों को शिक्षा की ओर अग्रसर संस्थान की उपलब्धियों संबंधी पावर पॉइंट प्रजेंटेशन द्वारा भी प्रोत्साहित किया गया। शिविर के समापन पर वक्ताओं को संस्थान द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस शिविर में करीब 100 विधि संकाय के छात्र व छात्राओं ने भाग लिया।
















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