जिला आगर मालवा के सोयत कला से
रिपोर्टर मोहम्मद आलम खान
भगवान सूर्य की आराधना और पवित्रता का प्रतीक पर्व मकर संक्रांति

नगर सोयत कला में आज, मंगलवार 14 जनवरी को पारंपरिक उत्साह, उमंग और भव्यता के साथ मनाया गया। यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक वैभव और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
पर्व का उल्लास और परंपराओं का निर्वहन
मकर संक्रांति का यह पावन अवसर बच्चों और युवाओं के लिए विशेष उमंग लेकर आया। इस दिन की शुरुआत से ही उत्साह का माहौल देखा गया। बच्चे और युवा वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए पतंगबाजी और गिल्ली-डंडा जैसे खेलों में खो गए। पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा हुआ था, जो हर्ष और उल्लास की कहानी बयां कर रहा था।
बाजारों में भीड़-भाड़ का माहौल था। हर ओर मिठाइयों की दुकानों पर तिल के लड्डू, गजक और खास तौर पर जलेबियां खरीदने वालों की भीड़ लगी हुई थी। पर्व का आनंद बढ़ाने के लिए युवाओं ने पतंग उड़ाते समय डीजे की धुन पर झूमते हुए इस दिन को खास बना दिया।
मकर संक्रांति का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति न केवल खगोलीय घटना है, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और समृद्धि का संदेश देती है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का संदेश देता है।
सूर्य देवता की आराधना और उनके प्रति आभार प्रकट करने के इस पर्व पर नगरवासियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और स्नेहपूर्वक मिलकर इस पर्व की गरिमा को बढ़ाया। हर घर में परंपरागत पकवान बने और लोगों ने परिवार एवं मित्रों के साथ इस पर्व का आनंद लिया।
संदेश: सकारात्मकता और उत्साह से भरें जीवन
मकर संक्रांति का यह पर्व हमें सिखाता है कि जैसे सूर्य देव नई दिशा में यात्रा शुरू करते हैं, वैसे ही हमें अपने जीवन में सकारात्मकता और नई शुरुआत का स्वागत करना चाहिए। यह पर्व हमें परिश्रम, समर्पण और एकता का संदेश देता है।
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं!
“हर पतंग की डोर में जोश और उम्मीद की नई किरण हो,
हर घर में प्रेम, उल्लास और खुशहाली का आगमन हो।
सूर्य देवता की कृपा से हर दिन मंगलमय हो।”
जय सूर्य देव! जय मकर संक्रांति!


















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