टीकमगढ़ की बिटिया विजेता दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में दिखाया वकालात का जलवा
सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लड़ा केस पहली बार में की जीत हासिल
कविन्द पटैरिया पत्रकार

हमारे टीकमगढ़ की यह बड़ी ही गौरव की बात है कि टीकमगढ़ जिले का लड़का हो या बिटिया भारत देश के जिस कोने में जाते है अपनी जीत का परचम लहराते हैं ऐसी ही टीकमगढ़ की बिटिया विजेता दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में अपने क्लाइंट का कैसे लड़ा और पहली बार में ही जीत हासिल की विजेता दुबे टीकमगढ़ की समाजसेवी श्रीमती सुशीला दुवे की पुत्री है जो टीकमगढ़ में वरिष्ठ समाजसेवी और राजनीति में हमेशा आगे रहती है उन्हें की प्रेरणा से आज विजेता दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में अपना परचम लहराया है विजेता दुबे ने अपनी अपनी वकालत की पढ़ाई डॉक्टर हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से पास की है और आज टीकमगढ़ में भी अपनी वकालत को वरकरार रखे हे, विजेता दुबे गरीब और दुखी लोगो के केस भी अपनी सेवा भावना से निशुल्क लडती है
केस के तथ्य इस प्रकार हैं। वर्ष 2005 में प्रार्थी ने जिला न्यायालय के फैसले से व्यथित होकर प्रार्थी ने हाई कोर्ट में सेकंड अपील फाइल किया था। परंतु अपने वकील के व्यवहार से व्यथित होकर प्रार्थी ने अपने पूर्व वकील से नो ऑब्जेक्शन वकालतनामा में ले लिया और दूसरे वकील को अप्वॉइंट कर दिया। परंतु जब 2017 में अपील फाइनल सुनवाई हेतु आयी तब पुराने एडवोकेट ने कोर्ट में खड़े होकर प्रार्थी के सेकंड अपील को विदड्रॉ कर लिया। जिससे प्रार्थी ने सारी जमीन खो दी, जो लगभग 20 एकड़ बिजरावन गांव तहसील जतारा मे थी। तत्पश्चात प्रार्थी ने हाई कोर्ट में रिव्यू पिटीशन और सिविल मिसलेनियस केस डाला, परंतु वह दोनों केस भी हाईकोर्ट ने डिसमिस कर दिए।
जिससे व्यथित होकर प्रार्थी ने अधिवक्ता विजेता दुबे को सुप्रीम कोर्ट में अपनी पैरवी के लिए भेजा, जहां उन्होंने स्पेशल लीव पिटिशन अपने भाई श्री आदित्य दुबे, अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट, के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। प्रार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता आदित्य दुबे एवं विजेता दुबे जो टीकमगढ़ के रहने वाले हैं ने सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वार्ले के समक्ष पुरजोर बहस की, तथा उनकी दमदार बहस से सुप्रीम कोर्ट ने प्रार्थी के पक्ष में फैसला दिया, तथा हाई कोर्ट के तीनों फैसलों को निरस्त करते हुए सेकंड अपील को पुनर्जीवित किया।
न्याय दृष्टांत सर्वोच्च न्यायालय:- “प्रेम नारायण विरुद्ध परमानंद ब्राह्मण सिविल अपील नंबर 14115 -17/ 2024”
खंडपीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वार्ले
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