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बीकानेर-20 अक्टूबर 2024 रविवार करवाचौथ व्रत आज जानें महत्व, पूजा विधि,व्रतकथा सहित करवा चौथ विशेष साथ ही देखें आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है।शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है।पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।

🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏

🙏जय श्री कृष्णा🙏

दिनांक:- 20/10/2024, रविवार

तृतीया, कृष्ण पक्ष,

कार्तिक
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– तृतीया 06:45:38 तक
तिथि—– चतुर्थी 28:16:29 (क्षय )
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——— कृत्तिका 08:30:35
योग———- व्यतिपत 14:10:27
करण——- विष्टि भद्र 06:45:39
करण————– बव 17:26:21
करण———- बालव 28:16:29
वार———————– रविवार
माह——————— कार्तिक
चन्द्र राशि—————– वृषभ
सूर्य राशि——————- तुला
रितु————————- शरद
आयन—————- दक्षिणायण
संवत्सर (उत्तर)———— कालयुक्त
विक्रम संवत————– 2081
गुजराती संवत———— 2080
शक संवत—————- 1946
कलि संवत————— 5125

वृन्दावन

सूर्योदय————– 06:23:25
सूर्यास्त————– 17:43:58
दिन काल———— 11:20:33
रात्री काल————–12:40:03
चंद्रास्त————– 09:28:10
चंद्रोदय—————- 19:54:52

लग्न—- तुला 2°55′ , 182°55′

सूर्य नक्षत्र—————— चित्रा
चन्द्र नक्षत्र—————- कृत्तिका
नक्षत्र पाया—————— लोहा

पद, चरण 

ए—-कृत्तिका 08:30:35

ओ—- रोहिणी 14:01:46

वा—- रोहिणी 19:35:12

वी—- रोहिणी 25:11:03

ग्रह गोचर 

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= तुला 02°45, चित्रा 3 रा
चन्द्र=वृषभ 08°30 , कृतिका 4 ए
बुध =तुला 15°53′ स्वाति 3 रो
शु क्र= वृश्चिक 08°05, अनुराधा’ 2 नी
मंगल=मिथुन 29°30 ‘ पुनर्वसु’ 3 हा
गुरु=वृषभ 26°30 मृगशिरा , 2 वो
शनि=कुम्भ 19°50 ‘ शतभिषा , 4 सू
राहू=(व) मीन 11°15 उo भा o, 3 झ
केतु= (व)कन्या 11°15 हस्त 1 पू

 शुभ  अशुभ मुहूर्त

राहू काल 16:19 – 17:44 अशुभ
यम घंटा 12:04 – 13:29 अशुभ
गुली काल 14:54 – 16: 19अशुभ
अभिजित 11:41 – 12:26 शुभ
दूर मुहूर्त 16:13 – 16:59 अशुभ
वर्ज्यम 23:19 – 24:49* अशुभ
प्रदोष 17:44 – 20:18 शुभ

चोघडिया, दिन

उद्वेग 06:23 – 07:48 अशुभ
चर 07:48 – 09:14 शुभ
लाभ 09:14 – 10:39 शुभ
अमृत 10:39 – 12:04 शुभ
काल 12:04 – 13:29 अशुभ
शुभ 13:29 – 14:54 शुभ
रोग 14:54 – 16:19 अशुभ
उद्वेग 16:19 – 17:44 अशुभ

चोघडिया, रात

शुभ 17:44 – 19:19 शुभ
अमृत 19:19 – 20:54 शुभ
चर 20:54 – 22:29 शुभ
रोग 22:29 – 24:04* अशुभ
काल 24:04* – 25:39* अशुभ
लाभ 25:39* – 27:14* शुभ
उद्वेग 27:14* – 28:49* अशुभ
शुभ 28:49* – 30:24* शुभ

होरा, दिन

सूर्य 06:23 – 07:20
शुक्र 07:20 – 08:17
बुध 08:17 – 09:14
चन्द्र 09:14 – 10:10
शनि 10:10 – 11:07
बृहस्पति 11:07 – 12:04
मंगल 12:04 – 13:00
सूर्य 13:00 – 13:57
शुक्र 13:57 – 14:54
बुध 14:54 – 15:51
चन्द्र 15:51 – 16:47
शनि 16:47 – 17:44

होरा, रात

बृहस्पति 17:44 – 18:47
मंगल 18:47 – 19:51
सूर्य 19:51 – 20:54
शुक्र 20:54 – 21:57
बुध 21:57 – 23:01
चन्द्र 23:01 – 24:04
शनि 24:04* – 25:07
बृहस्पति 25:07* – 26:11
मंगल 26:11* – 27:14
सूर्य 27:14* – 28:17
शुक्र 28:17* – 29:21
बुध 29:21* – 30:24

उदयलग्न प्रवेशकाल

तुला > 05:10 से 07: 26 तक
वृश्चिक > 07:26 से 09:48 तक
धनु > 09:48 से 12:04 तक
मकर > 12:04 से 14:56 तक
कुम्भ > 14:56 से 15:20 तक
मीन > 15:20 से 16:56 तक
मेष > 16:56 से 18:16 तक
वृषभ > 18:16 से 20:24 तक
मिथुन > 20:24 से 22:32 तक
कर्क > 22:32 से 01:06 तक
सिंह > 01:06 से 02:56 तक
कन्या > 02:56 से 05:06 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)

दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।

प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।

चर में चक्र चलाइये,उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥

रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो,सहाय करो कर्तार ॥

अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।

शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।

लाभ में व्यापार करें ।

रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।

काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।

अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौजी खाके यात्रा कर सकते है l

इस मंत्र का उच्चारण करें-:

शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय:

अग्नि वास ज्ञान -:

यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु

चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।

दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ

नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।

महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्

नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 3 + 1 + 1 = 20 ÷ 4 = 0 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है।

ग्रह मुख आहुति ज्ञान

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल –:

18 + 18 + 5 = 41 ÷ 7 = 6 शेष

क्रीड़ायां = शोक,कष्ट कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

प्रातः 06:46 तक समाप्त

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

विशेष जानकारी

करवा चौथ व्रत चन्द्रोदय रात्रि 19:54

रोहिणी व्रत

चतुर्थीक्षय

शुभ विचार

अग्निर्देवो द्विजातीनां मुनीनां हृदि दैवतम् ।
प्रतिमा त्वल्पबुध्दीनां सर्वत्र समदर्शिनाम् ।।
।। चा o नी o।।

द्विज अग्नि में भगवान् देखते है।

भक्तो के ह्रदय में परमात्मा का वास होता है।

जो अल्प मति के लोग है वो मूर्ति में भगवान् देखते है।
लेकिन जो व्यापक दृष्टी रखने वाले लोग है, वो यह जानते है की भगवान सर्व व्यापी है।

सुभाषितानि

गीता -:विभूतियोग अo-10

दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम्‌ ।,
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम्‌ ॥,

मैं दमन करने वालों का दंड अर्थात्‌ दमन करने की शक्ति हूँ,जीतने की इच्छावालों की नीति हूँ,गुप्त रखने योग्य भावों का रक्षक मौन हूँ और ज्ञानवानों का तत्त्वज्ञान मैं ही हूँ॥

दैनिक राशिफल

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष- यात्रा मनोनुकूल रहेगी। कारोबार से संतुष्टि रहेगी। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। प्रयास सफल रहेंगे। बुद्धि का प्रयोग करें। प्रमाद न करें। निवेश से लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा। व्यापार-व्यवसाय में उत्साह से काम कर पाएंगे। भाग्य अनुकूल है, जल्दबाजी न करें। प्रसन्नता रहेगी।

🐂वृष-आंखों का विशेष ध्यान रखें। चोट व रोग से बचाएं। पुराना रोग उभर सकता है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें। व्यवसाय की गति धीमी रहेगी। आय बनी रहेगी। नौकरी में कार्यभार रहेगा। थकान महसूस होगी। सहकर्मी सहयोग नहीं करेंगे। चिंता रहेगी।

👫मिथुन-व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। रोजगार मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। शेयर मार्केट मनोनुकूल लाभ देगा। बुद्धि का प्रयोग करें। घर-बाहर प्रसन्नता का वातावरण बनेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। कोई अनहोनी होने की आशंका रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा।

🦀कर्क-शुभ समाचार प्राप्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। बिछड़े मित्र व संबंधी मिलेंगे। विरोधी सक्रिय रहेंगे। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। व्यापार मनोनुकूल चलेगा। नौकरी में सहकर्मी सहयोग करेंगे। लाभ होगा। जल्दबाजी व लापरवाही से हानि होगी। राजकीय कोप भुगतना पड़ सकता है। विवाद न करें।

🐅सिंह-आय में निश्चितता रहेगी। शत्रु शांत रहेंगे। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा। बुरी खबर मिल सकती है, धैर्य रखें। दौड़धूप की अधिकता का स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ेगा। थकान व कमजोरी रह सकती है। वाणी में कड़े शब्दों के इस्तेमाल से बचें। दूसरों की बातों में ना आए

👩‍🦰कन्या-किसी  मांगलिक कार्य का आयोजन हो सकता है। स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठा पाएंगे। यात्रा लाभदायक रहेगी। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। किसी प्रबुद्ध व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। लेन-देन में सावधानी रखें। लाभ होगा।

⚖️तुला-स्थायी संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। मनपसंद रोजगार मिलेगा। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। कर्ज समय पर चुका पाएंगे। बैंक-बैलेंस बढ़ेगा। नौकरी में चैन रहेगा। व्यापार में वृद्धि के योग हैं। शेयर मार्केट से लाभ होगा। घर-परिवार की चिंता बनी रहेगी। तनाव रहेगा।

🦂वृश्चिक-आवश्यक वस्तु समय पर नहीं मिलने से खिन्नता रहेगी। बनते कामों में बाधा उत्पन्न होगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। काम में मन नहीं लगेगा। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। थोड़े प्रयास से ही कार्यसिद्धि होने से प्रसन्नता रहेगी। निवेश से लाभ होगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेंगे।

🏹धनु-वाहन, मशीनरी व अग्नि के प्रयोग में सावधानी रखें। विशेषकर गृहिणियां लापरवाही न करें। आवश्यक वस्तुएं गुम हो सकती हैं। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। किसी व्यक्ति की बातों में न आएं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे।

🐊मकर-धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सत्संग का लाभ मिलेगा। राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। नौकरी में सहकर्मी साथ देंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। निवेश लाभ देगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जल्दबाजी से हानि संभव है।

🍯कुंभ-राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। व्यापार में वृद्धि होगी। स्त्री वर्ग से समयानुकूल सहायता प्राप्त होगी। नौकरी में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। निवेश शुभ रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वाणी में शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर करें। प्रतिद्वंद्विता में कमी होगी।

🐟मीन-बिगड़े काम बनेंगे। निवेश मनोनुकूल लाभ देगा। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। कोई पुराना रोग बाधा का कारण हो सकता है। सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। विरोध होगा। आर्थिक नीति में परिवर्तन होगा। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। तत्काल लाभ नहीं होगा।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

करवा चौथ विशेष -20 अक्टूबर 2024

करवा चौथ 2024 तिथि: करवा चौथ चंद्रमा दर्शन का समय और पूजा मुहूर्त

करवा चौथ की शाश्वत परंपराओं के बारे में जानें,यह प्रेम और भक्ति का त्यौहार है,जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की सलामती के लिए अनुष्ठान करती हैं। इसके महत्व अनुष्ठानों और पवित्र उत्सवों के बारे में जानें। भारत में विवाहित महिलाओं के लिए सबसे प्रिय त्योहारों में से एक करवा चौथ रविवार,20 अक्टूबर, 2024 को मनाया जाएगा यह त्यौहार पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है,या गुजरात,महाराष्ट्र और दक्षिणी भारत जैसे क्षेत्रों में अमांत कैलेंडर के अनुसार अश्विन में मनाया जाता है। महीनों के नामों में इन क्षेत्रीय अंतरों के बावजूद, करवा चौथ पूरे देश में एक ही दिन मनाया जाता है।

करवा चौथ उपवास समय अवधि

06:27 AM से 07:53 PM13 घंटे 26 मिनट

कृष्ण दशमी चंद्रोदय 07:53 PM

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ 20 अक्टूबर 2024 को सुबह 06:46 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त 21 अक्टूबर 2024 को 04:16 पूर्वाह्न

चांद देखने के बाद ही व्रत समाप्त होता है। महिलाएं चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार करती हैं ताकि वे अर्घ्य देकर अपना दिन भर का व्रत खोल सकें। चांद दिखने का समय स्थान के हिसाब से अलग-अलग होगा और तिथि के करीब आने पर सटीक स्थानीय समय की जांच करनी चाहिए। परंपरागत रूप से,अधिकांश क्षेत्रों में चाँद रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच दिखाई देता है। महिलाएँ करवा नामक मिट्टी के बर्तन लेकर चाँद को जल चढ़ाने की रस्म अदा करती हैं,जो उनकी भक्ति और उनके व्रत के समापन का प्रतीक है। करवा चौथ का मुख्य उद्देश्य विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की भलाई और लंबी आयु के लिए कठोर व्रत रखना है। यह त्यौहार भक्ति और प्रेम से जुड़ा हुआ है,क्योंकि महिलाएं सूर्योदय से लेकर रात के आसमान में चाँद दिखने तक व्रत रखती हैं। इस दौरान वे भोजन या पानी भी नहीं पीती हैं। यह व्रत महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है,खासकर उत्तरी भारत में,हालाँकि इसका महत्व अन्य क्षेत्रों में भी है। करवा चौथ भगवान गणेश को समर्पित दिन संकष्टी चतुर्थी के साथ मेल खाता है। इस दिन व्रत की रस्मों में भगवान शिव और उनके परिवार,विशेष रूप से पार्वती कार्तिकेय और गणेश की पूजा शामिल है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। व्रत केवल चंद्रमा को अर्घ देने के बाद ही खोला जाता है।

करवा चौथ पर क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा? जानिए चंद्र पूजा का महत्व

करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। जिसका नाम अनुष्ठान के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले मिट्टी के बर्तन या करवा के नाम पर रखा गया है। करवा पूजा के दौरान बहुत ज़रूरी होता है क्योंकि इसे पानी से भरकर चाँद को अर्पित किया जाता है। चाँद की रस्में निभाने के बाद, महिलाएँ अपना व्रत खोलती हैं,आमतौर पर पानी की एक घूँट और मिठाई के साथ,जिसे अक्सर उनके पति प्यार और देखभाल के प्रतीक के रूप में देते हैं। प्रार्थनाओं और उम्मीदों से भरा दिन करवा चौथ परिवारों को भी एक साथ लाता है,व्रत खोलने के बाद खास भोजन और जश्न मनाता है। यह त्यौहार विवाहित जोड़ों के बीच गहरे बंधन को दर्शाता है,जिसमें प्रेम,त्याग और भक्ति को उजागर करने वाले अनुष्ठान होते हैं। करवा चौथ प्रेम,त्याग और गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव का दिन है। आशा और आशीर्वाद का प्रतीक चंद्रमा इस दिन के अनुष्ठानों में केंद्रीय भूमिका निभाता है। 20 अक्टूबर, 2024 को व्रत रखने वालों के लिए,चंद्रमा का दर्शन उनके पति की लंबी उम्र के लिए उनकी भक्ति और प्रार्थना की परिणति को चिह्नित करेगा। इस साल करवा चौथ की तैयारी करते समय,अनुष्ठानों के महत्व और इससे जुड़े बंधन के महत्व को याद रखें। चाहे उपवास, प्रार्थना या पारंपरिक उत्सव के माध्यम से, करवा चौथ प्यार की ताकत और सहनशीलता की याद दिलाता है कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। पति की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले इस उपवास का इंतजार सुहागिन महिलाएं बड़ी ही बेसब्री से करती हैं। ये व्रत काफी कठिन है। इसमें महिलाएं सुबह से शाम तक बिना पानी का व्रत रखती हैं और उसके बाद शाम को भगवान गणेश, गौरी-शंकर, करवा और चंद्रमा की पूजा करके अपने पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।

कुछ बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत

आस्था, प्रेम और त्याग के इस मानक उपवास में कुछ बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। वरना इस व्रत का सही फल नहीं मिलता उल्टा इसका गलत प्रभाव झेलना पड़ता है। इसलिए जो महिलाएं इस व्रत को रख रही हैं उन्हें निम्नलिखित चार बातों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।

1.सुहाग का व्रत इसलिए ये चीजें ना करें दान: ये व्रत सुहाग का है इसलिए इस दिन सुहाग की किसी भी चीज जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी आदि का दान नहीं करना चाहिए, जो महिलाएं दान करती हैं, उन्हें अशुभ फल की प्राप्ति होती है।*

2.सफेद और काले वस्त्र का प्रयोग नहीं: इस व्रत में पूजा करते वक्त सफेद और काले वस्त्रों का प्रयोग नहीं करना चाहिए,बल्कि लाल-पीले या चटक रंगों के कपड़े पहनने चाहिए,ऐसा करने से महिलाओं को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

3.सुई या कैंची की प्रयोग वर्जित: ऐसा माना जाता है कि सुई और कैंची के प्रयोग से घर में झगड़े होते हैं, करवा चौथ का व्रत प्रेम का पर्व है,ऐसे में इस दिन महिलाओं को वो सभी कामों से दूर रहना चाहिए, जो कि घर में क्लेश पैदा करते हैं।

4.बड़ों का अपमान ना करें: व्रत तभी फलीभूत होता है।जब उसमें बड़ों का आशीष शामिल होता है इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी बुजुर्ग का अपमान या दिल नहीं दुखाना चाहिए,क्योंकि ऐसा करने से महिलाओं को शुभ फल की प्राप्ति नहीं होगी।

प्रेम,त्याग और समर्पण को व्यक्त करता है ये व्रत

आपको बता दें कि ये व्रत एक महिला के अपने पति के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण को व्यक्त करता है। इस दिन व्रतियों के घरों में पकवान बनते हैं और मंगल गीत गाए जाते हैं। ये व्रत वो लड़कियां भी रखती हैं जिनकी सगाई हो चुकी है और कुंवारी कन्याएं सुयोग्य पति की प्राप्ति के लिए करती हैं। जिस घर की महिलाएं इस व्रत को करती हैं,उस घर में सुख,शांति और समृद्दि का वास होता है और घर का आंगन हमेशा खुशहाली से भरा होता है।

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“करवा चौथ”

करवा चौथ का व्रत स्त्रियों का मुख्य त्यौहार है। यह व्रत सुहागन महिलायें अपने पति की दीर्घायु के लिए करती हैं। करवा चौथ का व्रत कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागन स्त्रियों द्वारा किया जाता है। यह व्रत हर विवाहित महिला अपने रिवाजो के अनुसार रखती है, और अपने जीवन साथी की अच्छी सेहत तथा अच्छी उम्र की प्रार्थना भगवान से करती है। आज कल यह व्रत कुँवारी लडकियाँ भी अच्छे पति की प्राप्ति के लिए रखती है।

करवा चौथ व्रत विधि

1.सूर्योदय से पहले स्नान कर के व्रत रखने का संकल्प लें और सास द्वारा भेजी गई सरगी खाएं। सरगी में,मिठाई फल सेवंई,पूड़ी और साज-श्रृंगार का समान दिया जाता है। सरगी प्याज-लहसुन रहित होनी चाहिये।

2.सरगी करने के बाद करवा चौथ का निर्जल व्रत शुरु हो जाता है। माँ पार्वती, महादेव शिव व गणेश जी का ध्यान पूरे दिन अपने मन में करती रहें।

3.दीवार पर गेरु से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता हैं, जो कि बड़ी पुरानी परम्परा है।

4.आठ पूरियों की अठावरी बनायें। हलुआ बनायें। पक्के पकवान बनायें।

5.फिर पीली मिट्टी से माँ गौरी और गणेश जी का स्वरूप बनाइये। माँ गौरी की गोद में गणेश जी का स्वरूप बिठाइये। इन स्वरूपों की पूजा संध्याकाल के समय पूजा करने के काम आती है।

6.माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराजें और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य सुहाग,श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। फिर उनके सामने जल से भरा कलश रखें।

7.वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। गेहूँ और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवे पर स्वास्तिक बनायें।

8.गौरी गणेश के स्वरूपों की पूजा करें। इस मंत्र का जाप करें।

नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥’
ज्यादातर महिलायें अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। हर क्षेत्र के अनुसार पूजा करने का विधान और कथा अलग-अलग होती है।

9अब करवा चौथ की कथा कहनी या फिर सुननी चाहिये। कथा सुनने के बाद आपको अपने घर के सभी वरिष्ठ लोगों का चरण स्पर्श कर लेना चाहिये।

10.रात्रि के समय छननी के प्रयोग से चन्द्र दर्शन करें उसे अर्घ्य प्रदान करें। फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आर्शीवाद लें। फिर पति देव को प्रसाद दे कर भोजन करवाएँ और बाद में खुद भी करें।

॥ॐ गं गणपतये नमः॥

करवा चौथ व्रत की कथा

जब भी कोई स्त्री करवा चौथ का व्रत करती है,तो वह व्रत के समय कथा सुनती है। व्रत के समय कथा सुनने की यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। इस व्रत की कथा सुहागन स्त्रियों के द्वारा सुनी जाती है।

कथा इस प्रकार है।

एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के और एक लड़की थी। कार्तिक महीने में जब कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आई, तो साहूकार के परिवार की महिलाओं ने भी करवा चौथ व्रत रखा। जब रात्रि के समय साहूकार के बेटे भोजन ग्रहण करने बैठे, तो उन्होंने साहूकार की बेटी (अपनी बहन) को भी साथ में भोजन करने के लिए कहा। भाइयों के द्वारा भोजन करने का कहने पर उनकी बहन ने उत्तर दिया। बहन ने कहा आज मेरा व्रत है। मै चाँद के निकलने पर पूजा विधि सम्पन्न करके ही भोजन करूँगी। भाइयों के द्वारा बहन का भूख के कारण मुर्झाया हुआ चेहरा देखा नहीं गया। उन्होंने अपनी बहन को भोजन कराने के लिए प्रयत्न किया। उन्होंने घर के बाहर जाकर अग्नि जला दी। उस अग्नि का प्रकाश अपनी बहन को दिखाते हुए कहा कि देखो बहन चाँद निकाल आया है। तुम चाँद को अर्ध्य देकर और अपनी पूजा करके भोजन ग्रहण कर लो। अपने भाइयों द्वारा चाँद निकलने की बात सुनकर बहन ने अपनी भाभियों के पास जाकर कहा। भाभी चाँद निकल आया है चलो पूजा कर लें। परन्तु उसकी भाभी अपने पतियों द्वारा की गयी युक्ति को जानती थी। उन्होंने अपनी नन्द को भी इस बारे में बताया और कहा की आप भी इनकी बात पर विश्वास ना करें। परन्तु बहन ने भाभियों की बात पर ध्यान ना देते हुये पूजन सम्पन्न कर भोजन ग्रहण कर लिया। इस प्रकार उसका व्रत टूट गया और गणेश जी उससे नाराज हो गए। इसके तुरन्त बाद उसका पति बीमार हो गया,और घर का सारा रुपया पैसा और धन उसकी बीमारी ने खर्च हो गया। जब साहूकार की बेटी को अपने द्वारा किए गए गलत व्रत का पता चला तो उसे बहुत दुःख हुआ। उसने अपनी गलती पर पश्चाताप किया। उसने पुनः पूरे विधि विधान से व्रत का पूजन किया तथा गणेश जी की आराधना की। इस बार उसके व्रत तथा श्रद्धा भक्ति को देखते हुये भगवान श्रीगणेश उस पर प्रसन्न हो गए। उसके पति को जीवन दान दिया और उसके परिवार को धन तथा सम्पत्ति प्रदान की। इस प्रकार जो भी श्रद्धा भक्ति से इस करवा चौथ के व्रत को करता है,वो सारे सांसारिक क्लेशों से मुक्त होकर प्रसन्नता पूर्वक अपना जीवन यापन करता है।

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