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हिन्दी साहित्य भारती शाखा गुना द्वारा सनाढ्य ब्राह्मण धर्मशाला दुर्गा कालोनी में कवि गोष्ठी एवं सम्मान समारोह

गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी

कवि गोष्ठी हुई संपन्न।

गुना

हिन्दी साहित्य भारती शाखा गुना द्वारा सनाढ्य ब्राह्मण धर्मशाला दुर्गा कालोनी में कवि गोष्ठी एवं सम्मान समारोह

 कार्यक्रम दिनेश विरथरे महामंत्री हिंदी साहित्य भारती राजेन्द्र शुक्ल सहज प्रदेशाध्यक्ष हिन्दी साहित्य भारती के मुख्य आतिथ्य तथा डॉ रमा सिंह केन्द्रीय उपाध्यक्ष के विशिष्ट आतिथ्य, कृष्ण राजोरिया अध्यक्ष मध्य भारत प्रांत, प्रेम सिंह प्रेम, सुधीर गुप्ता इंदौर भी मंचासीन रहे। प्रथम सत्र के कार्यक्रम का संचालन सुनील शर्मा चीनी ने किया, सभी अतिथियों द्वारा मां सरस्वती का पूजन किया गया। सभी अतिथियों और साहित्यकारों का संस्था द्वारा शाल पट्टिका और हार पहनाकर स्वागत किया गया, सरस्वती वंदना कीर्ति मोरोलिया ने सुनाई।द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विष्णु साथी, राजेन्द्र शुक्ल सहज के मुख्य आतिथ्य तथा डाक्टर रमासिंह और दिनेश विरथरे के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुई। जिसका संचालन नगर के जाने-माने शायर प्रेम सिंह प्रेम ने किया। कवि गोष्ठी का संचालन करते हुए प्रेम सिंह प्रेम ने कहा जमीर अपने आप का तोल कर तो देखो प्यार की बंद किताबें खोल कर तो देखो, जिस्म चेहरे की रंगत बदल जायेगी एकबार वंदे मातरम् बोल कर तो देखो। राजेन्द्र शुक्ल ने देशभक्ति की रचना सुनाते हुए कहा दुश्मन से जो प्रीति करे उनसे कहदोभारत छोड़ो,खायें यहां का गायें वहां का उनसे कह दो भारत छोड़ो। दिनेश विरथरे ने अपनी रचना के माध्यम से बताया शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे शीश कटा देंगें हम आंच नहीं आने देंगें। वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा दुःख दर्द भरी जिंदगी सुखमय बनाइये, आप नित्य गीताजी पढ़िये पढ़ाइये। गीतकार रवि शर्मा बंजारा ने कहा क्या सुनाये तुम्हे अपनी जिंदगी की दास्तां, वह इम्तहां लेती रही और हम इम्तहां देते रहे। उमाशंकर भार्गव ने पितरों के सम्बन्ध में अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा आज वह हैं कल हम होंगे समाप्त नहीं होगी पितरों की पीढ़ी एक दूसरे बना रहे हैं पित्र बनने की सीढ़ी, आज हम दे रहे उन्हें कल हमको भी देगा कोई पानी, सनातन की ऐसी रीति है नही है इसका कोई सानी। विनोद तिवारी ने गीत सुनाते हुए कहा लड़कों से कम नहीं है कहीं भी लड़कियां।लडके अगर पेड़ हैं तो डाली है बेटियां
कीर्ति मोरोलिया ने कहा बेटी नाम कमातीं है वह सफल बन दिखाती है घर को भी संभालती है वो और बाहर भी नाम कमातीं है। संतोष ब्रह्मभट्ट ने कहा मातृभाषा है हिन्दी मेरी, जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं हिन्दुस्तान का वासी हूं हिन्दी से मुझको प्यार है। सूबेदार धर्मवीर सिंह ने भारतीय ने कहा सिपाही की पहरेदारी और कुत्ते की वफादारी पर शक नहीं किया जाता, जहां इसे काम पर लगा दो वहां तैनात नजर आता है। गीतकार हरीश सोनी ने कहा इस राष्ट्र की पहचान है अभिमान है हिन्दी चम चम चमक रही जैसे माता के भाव कीबिन्दीसबसे अधिक बोलते धरा पर जिसको लोग अस्मिता इस देश की पहचान है हिन्दी। नरेंद्र भार्गव पद्म ने कहा नफरती,फिदरती टिमटिमाते जुगनूओ ने चमकते हुए सूरज से लडने की ठानी है। रामजीवन भार्गव ने कहा कितनी हसीन कहानी है इस ज़िन्दगी की उम्र ढलती है जब मरघट की याद आती है। कवि गोष्ठी में डाक्टर रमासिंह, ऋषिकेश भार्गव,डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर, बाबू खां निडर, सलाउद्दीन शिकवा,संजय खरे सहज , अमित कबीर, गुना सुधीर गुप्ता इंदौर,महेश श्रीवास्तव, जगदीश शर्मा सहज, गोविन्द राव मोरे, गुना, देवेन्द्र दांगी राजेन्द्र खत्री राजगढने अपनी रचनाएंसुनाई।कवि गोष्ठी में डाक्टर ओमप्रकाश विरथरे उपाध्याक्ष ,शिवदयालशर्माकोषाध्यक्षसनाढ्य समाज बृजराज सिंह गौतम, रामलाल, वंदना, महिमा समाज सेवी निरंजन भाया कसेरा, नंदकिशोर अग्रवाल,पवन शर्मा, पंडित मनोज शर्मा, पंडित मनोज तिवारी, रामकिशोर सहित कई गणमान्य श्रोता उपस्थित रहे। इस अवसर पर महेश श्रीवास्तव को अशोकनगर जिले का अध्यक्ष दायित्व दिया गया। सभी पदाधिकारियों और उपस्थित सदस्यों को शपथ दिलाई गई।अंत में मध्य भारत प्रांत के अध्यक्ष कृष्ण राजोरिया ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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