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सुल्ताननगर : नामजद गौतस्करों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, एक बार फिर पुलिस प्रशासन नाकाम।

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• नामजद गौतस्करों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, एक बार फिर पुलिस प्रशासन नाकाम।

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अखंड नगर, सुलतानपुर : नामजद गौतस्करों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज, फिर भी पुलिस पकड़ने में हुई फेल। नामजद गौतस्करों के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज होने का मामला सामने आया है किंतु अभी तक पुलिस प्रशासन गिरफ्तार करने में असफल रहा है। मामला अखंड नगर थाना अंतर्गत ग्राम रायपुर का है जहां पर राज नारायण दुबे पुत्र राम शिरोमणि दुबे ने गौतस्करों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। राज नारायण का कहना है कि हम खेत देखने जा रहे थे कि बाग में कुछ गोवंश जानवर असहाय रूप से बंधे हुए मिले। उनके मुंह से झाग निकल रहे थे। मामले की सूचना गांव में देने पर वर्तमान ग्राम प्रधान विक्रम कुमार, अरविंद पाल पुत्र मिठाई लाल, बृजेन्द्र कुमार पुत्र बाबूराम, मिठाई लाल, राम आसरे पुत्र बिरतंती आदि ग्रामीणों ने मिलकर पशुओं को छुड़ाया।

राज नारायण पुत्र राम शिरोमणि ने कुछ नामजद लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है जिसमें सोनू कनौजिया पुत्र त्रिलोकी कनौजिया निवासी अज्ञात, मकसूद पुत्र ज़लील, एनुल पुत्र ज़लील, महमूद पुत्र ज़लील, मंसूर पुत्र जलील, अली अहमद उर्फ बबलू पुत्र अच्छेलाल, मोनू पुत्र अशोक तैयब पुत्र जाहिद, बेले पुत्र रामधनी, दानिश पुत्र क्यामू, रूस्तम पुत्र हुबल्ली, अकमल पुत्र एनुल निवासीगण ग्राम रायपुर जनपद सुल्तानपुर हैं।राज नारायण के अनुसार उपरोक्त लोग पशुओं इकट्ठा करके बांध देते हैं और मौका मिलते ही गाड़ी में लादकर बाहर बेच देते हैं जिससे इनकी मोटी कमाई होती है। ग्रामीणों के मना करने पर यह उनसे मारपीट गाली गलौज करने लगते हैं।पुलिस ने उपरोक्त लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता((बी०एन०एस०) 2023 के अनुसार धारा 131, 352, 351 (3) तथा पशुक्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के अंतर्गत प्राथमिक दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने तीन सितंबर 2024 को प्राथमिक की दर्ज किया है किंतु अभी तक एक भी गौतस्कर गिरफ्तार नहीं किया गया है। क्या पुलिस गौ तस्करों को पकड़ना नहीं चाहती? क्या पुलिस बचाने का काम कर रही है? अगर बचाने का काम कर रही है तो क्यों ? इस रिपोर्ट में प्रशासन को सच्चाई नजर आ रही है अथवा नहीं, अगर इस तरह से गौतस्कर बचते रहे तो गौतस्करों का मन बढ़ता रहेगा। अगर पशु तस्करी हो रही है और पशु बेचे जा रहे हैं तो खरीदता कौन है और कहां बिकते हैं? क्या वहां के प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहा है? अथवा पूरे शासन प्रशासन की मिली भगत है।

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