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बीकानेर-पर्युषण के नवाह्निक कार्यक्रम के अंतिम दिन क्षमापना दिवस मनाया क्षमा से स्वस्थ और सुंदर समाज व राष्ट्र का निर्माण संभव: साध्वी कुंथुश्री

सवांददाता ब्यूरो चीफ रमाकान्त झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ

क्षमा से स्वस्थ और सुंदर समाज व राष्ट्र का निर्माण संभव: साध्वी कुंथुश्री
पर्युषण के नवाह्निक कार्यक्रम के अंतिम दिन क्षमापना दिवस मनाया

श्रीडूंगरगढ़। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन को क्षमापना दिवस के रूप में बड़ी श्रद्धा व त्याग के साथ जैन धर्मावलंबियों द्वारा मनाया गया। श्रीडूंगरगढ़ साध्वी सेवा केंद्र में सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी कुंथुश्री के सान्निध्य में सूर्योदय के साथ ही जैन धर्मावलंबी पहुंचने लगे और वर्षभर में हुई भूलों के लिए परस्पर क्षमायाचना की। जैन धर्मावलंबियों का पर्युषण महापर्व क्षमापना दिवस के साथ ही समाप्त हुआ। अपने 7 दिनों तक त्याग, तपस्या, जप, मौन, संयम के साथ पर्युषण पर्व को आध्यात्मिक तरीके से मनाने के बाद 8वें दिन रविवार को सभी जैन धर्मावलंबियों ने उपवास किया और सोमवार को सुबह सूर्योदय के साथ ही साध्वियों के दर्शन के लिए सेवा केंद्र उपस्थित हुए। यहां साध्वी कुंथुश्री सहित समस्त साध्वियों के जैन धर्मावलंबियों ने दर्शन करके क्षमायाचना की और उसके बाद सभी श्रावक और श्राविकाओं ने परस्पर क्षमायाचना करके विगत वर्ष में हुई भूलों के लिए माफी मांगी। इस अवसर पर साध्वी कुंथुश्री ने फरमाया कि जैन समाज में क्षमायाचना का यह दिन बड़ा ही विलक्षण दिवस है। इस दिन वर्षों से एक दूसरे के प्रति मन में पल रही द्वेषता और कलुषता को निर्मल ह्रदय से क्षमायाचना करके धोया जाने का सार्थक प्रयास किया जाता है। व्यक्ति अगर भावों से और मन से क्षमा मांग लेता है और सामने वाला क्षमादान दे देता है तो इससे एक सुंदर व स्वस्थ समाज और राष्ट्र की परिकल्पना सार्थक होती है। क्षमा वीरों का आभूषण होता है। क्योंकि क्षमा दान विरला व्यक्ति ही कर सकता है। साध्वी सुमंगलाश्री ने कहा कि भूल होना स्वाभाविक है। क्षमापना दिवस पर व्यक्ति परस्पर क्षमा लेकर और क्षमादान देकर मैत्री भावना को विकसित कर सकता है। इस दौरान सभा की ओर से मंत्री प्रदीप पुगलिया, तेयुप अध्यक्ष मनीष नौलखा, महिला मंडल मंत्री संगीता बोथरा ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी।

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