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सुसनेर : श्री चिंताहरण बालाजी मंदिर के पुजारी पंडित विजय शर्मा के अनुसार इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर्व कब?जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, नियम और महत्व।

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दिनांक : 22.8.2024

दिन : गुरूवार 

सत्यार्थ न्यूज़ 

रिपोर्टर ,मनोज कुमार माली सुसनेर 

• सोयत रोड़ स्थित श्री चिंताहरण बालाजी मंदिर के पुजारी पंडित विजय शर्मा के अनुसार।

• इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी पर्व कब?जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, नियम और महत्व।

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सुसनेर, हिंदू धर्म में जन्माष्टमी पर्व का विशेष महत्व है. हिंदु पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर भगवान श्री कृष्ण की उपासना करने से जीवन में सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आइए जानते हैं, इस वर्ष कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी, शुभ मुहूर्त और इस दिन का महत्व।

हिंदु पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 26 अगस्त 2024 सुबह 03:40 पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 27 अगस्त 2024 सुबह 02:19 पर होगा. ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पालन 26 अगस्त 2024, सोमवार के दिन किया जाएगा।

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का मुहूर्त – रात 12 बजे से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, ऐसे में पूजा के लिए आपको 45 मिनट का समय मिलेगा इस विशेष दिन पर मध्य रात्रि का क्षण 27 अगस्त रात्रि 12:25 पर है और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि 12:00 से रात्रि 12:45 के बीच रहेगा. वही व्रत का पारण 27 अगस्त सुबह 05:55 के बाद किया जा सकेगा.

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र मास कृष्णपक्ष अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था।

इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त रात्रि 09 बज कर 47 मिनट पर प्रारंभ होगा जो 

27 अगस्त दोपहर 03 बचकर 37 मिनट तक रहेगा।

कुछ पंडितों का मत है कि वैष्णव संप्रदाय वाले कृष्ण जन्मोत्सव 27 अगस्त को मनाएंगे।

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम ?

शास्त्रों में बताया गया है कि कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पालन एकादशी व्रत की भांति ही किया जाता है और इस दौरान कुछ नियमों का पालन किया जाता है. जन्माष्टमी व्रत के दिन अन्न ग्रहण करने की मनाही है. साथ ही जन्माष्टमी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि के बाद या अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद ही करना चाहिए. इस दौरान मन में किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों को नहीं लाना चाहिए और प्याज, लहसुन इत्यादि के सेवन से दूर रहना चाहिए.

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व…

शास्त्रों में यह वर्णित है कि भगवान श्री कृष्ण, श्री हरि के सातवें अवतार हैं, जिन्होंने धर्म की स्थापना के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया था. इसके साथ भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया था और महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की उपासना करने से व्यक्ति को धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही जीवन में आ रही कई प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

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