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हरदोई : न्याय की हो रही प्रशंसा, अदालत ने माना विरलतम अपराध।

“अनुज बधू भगिनी सुत नारी,सुनु सठ कन्या समय ए चारी नइ कुदृष्टि विलोकइ जोई , ताहि वधे कुछु पाप न होई”

• न्याय की हो रही प्रशंसा, अदालत ने माना विरलतम अपराध।

हरदोई : 3 वर्ष की मासूम बालिका से रेप के मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने इस मामले को विरलतम अपराध की श्रेणी में मानते हुए आरोपी ताऊ को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में आठ गवाहों को परीक्षित कराया गया ।जिसमें मासूम बच्ची के अलावा उसके माता-पिता भी शामिल रहे ।उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधी को कड़ी सजा दिलाना अत्यंत आवश्यक है । ताकि समाज में इस प्रकार क्या अपराधों की पुनरावृत्ति न हो सके।

कड़ी सुरक्षा रही तैनात

हरदोई : मासूम बच्ची के साथ हैवानियत करने वाले आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाने के पूर्व कचहरी परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी बल तैनात रहा। पुलिस कर्मियों ने पूरी तरीके से अदालत के बाहर मुस्तैदी दिखाई ।परिंदा भी पर न मार सके ऐसी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का खाका खींचा गया।अदालत कक्ष में सरकारी वकीलों को छोड़कर किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

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...और जज ने तोड़ दी कलम

हरदोई : मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले उसके ही ताऊ को मृत्युदंड की सजा सुनाते वक्त जज मोहम्मद नसीम की आंखें भर आई और उन्होंने सजा सुनाते हुए अपनी कलम तोड़ दी। अपने आदेश में उन्होंने इसे हैवानियत होना करार दिया और रिश्तो को शर्मसार होना कहा।

न्यायाधीश ने जताया आश्चर्य 

हरदोई। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि क्या एक व्यक्ति अपनी वासना की भूख शांत करने के लिए अपनी सगी भतीजी के साथ इतनी दरिंदगी कर सकता है?

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डायन से की तुलना 

 विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी की तुलना डायन से करते हुए कहा कि डायन भी सात घर छोड़ देती है।

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पल पल मरती है बलात्कार पीड़िता

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि बलात्कार की पीड़िता जीवन भर उसके साथ हुई बर्बरता का दंश झेलती है। मृत्यु तो जीवन में एक बार होती है, पर बलात्कार पीड़िता हर घड़ी , हर पल और हर दिन मरती है।

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साक्ष्य देते समय भी कहा बड़े पापा

मासूम पीड़िता ने साक्ष्य देते समय भी दो सिद्ध को बड़े पापा कहकर संबोधित किया जो स्वयं में कलेजे को कंपा देने वाला है। बड़े पापा व भतीजी का रिश्ता अटूट भरोसा वह विश्वास का होता है ,जिसे दोष सिद्ध ने अपनी वासना की भूख शांत करने के लिए तार – तार कर दिया।

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वहशी जानवर ही कर सकता है ऐसी घटना

हरदोई। न्यायाधीश ने कहा कि अपनी सगी भतीजी के साथ ऐसा घॄणित अपराध इंसान के रूप में वहशी जानवर ही कर सकता है।

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न बचेंगी बेटियां 

 न्यायाधीश ने कहा कि अगर ऐसी घटनाओं में बर्बर रुख नहीं अपनाया जाता तो, निश्चित तौर पर न तो बेटियां बचेगी और न ही वह सुरक्षित सम्मानित जीवन जी सकेंगी । समाज में असुरक्षा व भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

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बालि वध का किया उल्लेख 

विद्वान न्यायाधीश ने रामचरितमानस में बालि वध के समय की चौपाई का भी उल्लेख किया- अनुज बधू भगिनी सुत नारी,सुनु सठ कन्या समय ए चारी ।इन कुदृष्टि विलोकइ जोई , ताहि वधे कुछु पाप न होई ।।साढ़े तीन साल पूर्व हुई थी फांसी की सजा हरदोई। करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व जनपद न्यायालय में एक डेढ़ वर्षीय अबोध बालिका के साथ जबरिया रेप करके उसकी हत्या कर देने और सबूत मिटाने की गलत से उसके शव को छुपा देने के मामले में आरोपित को जज ने मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इस मामले में जज ने आरोपित पर एक लाख दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्री नेत्र ने सजा सुनाई थी। यह सजा 22 फरवरी 2021 को सुनाई थी। इसके बाद किसी आरोपित को मृत्युदंड की सजा जिला न्यायालय ने सुनाई है।

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