सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है।शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है।पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त, चद्रोदय-चन्द्रास्त काल, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त, योगकाल, करण, सूर्य-चंद्र के राशि, चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
ll जय श्री कृष्ण राधे ll
*दिनांक:- 06/08/2024, मंगलवार*
द्वितीया, शुक्ल पक्ष,
श्रावण
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि——– द्वितीया 19:51:47 तक
पक्ष———————— शुक्ल
नक्षत्र———- मघा 17:42:54
योग———–वरियान 10:58:17
करण———- बालव 06:53:56
करण———- कौलव 19:51:47
वार——————— मंगलवार
माह———————– श्रावण
चन्द्र राशि—————– सिंह
सूर्य राशि—————— कर्क
रितु——————––—— वर्षा
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर———————-क्रोधी
संवत्सर (उत्तर)————– कालयुक्त
विक्रम संवत—————- 2081
गुजराती संवत————– 2080
शक संवत——————-1946
कलि संवत—————– 5125
वृन्दावन
सूर्योदय————— 05:46:31
सूर्यास्त————— 19:03:13
दिन काल————- 13:16:42
रात्री काल———— 10:43:48
चंद्रोदय————— 07:11:22
चंद्रास्त—————- 20:24:40
लग्न—- कर्क 19°51′ , 109°51′
सूर्य नक्षत्र————— आश्लेषा
चन्द्र नक्षत्र——————- मघा
नक्षत्र पाया——————- रजत
*🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩*
मू—- मघा 11:04:50
मे—- मघा 17:42:54
मो—- पूर्वा फाल्गुनी 24:22:28
*💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= कर्क 19°05, अश्लेषा 1 डी
चन्द्र= सिंह 07°30 , मघा 3 मू
बुध =सिंह 09°53′ मघा 3 मू
शु क्र= सिंह 06°05, मघा ‘ 3 मू
मंगल=वृषभ 16°30 ‘ रोहिणी’ 3 वी
गुरु=वृषभ 21°30 रोहिणी , 4 वु
शनि=कुम्भ 24°10 ‘ पू o भा o ,2 सो
राहू=(व) मीन 15°15 उo भा o, 4 ञ
केतु=(व) कन्या 15°15 हस्त , 2 ष
*🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮*
राहू काल 15:44 – 17:24 अशुभ
यम घंटा 09:06 – 10:45 अशुभ
गुली काल 12:25 – 14: 04अशुभ
अभिजित 11:58 – 12:51 शुभ
दूर मुहूर्त 08:26 – 09:19 अशुभ
दूर मुहूर्त 23:21 – 24:14* अशुभ
वर्ज्यम 26:36* – 28:23* अशुभ
प्रदोष 19:03 – 21:13. शुभ
🚩गंड मूल 05:47 – 17:43 अशुभ
💮चोघडिया, दिन
रोग 05:47 – 07:26 अशुभ
उद्वेग 07:26 – 09:06 अशुभ
चर 09:06 – 10:45 शुभ
लाभ 10:45 – 12:25 शुभ
अमृत 12:25 – 14:04 शुभ
काल 14:04 – 15:44 अशुभ
शुभ 15:44 – 17:24 शुभ
रोग 17:24 – 19:03 अशुभ
🚩चोघडिया, रात
काल 19:03 – 20:24 अशुभ
लाभ 20:24 – 21:44 शुभ
उद्वेग 21:44 – 23:05 अशुभ
शुभ 23:05 – 24:25* शुभ
अमृत 24:25* – 25:46* शुभ
चर 25:46* – 27:06* शुभ
रोग 27:06* – 28:27* अशुभ
काल 28:27* – 29:47* अशुभ
💮होरा, दिन
मंगल 05:47 – 06:53
सूर्य 06:53 – 07:59
शुक्र 07:59 – 09:06
बुध 09:06 – 10:12
चन्द्र 10:12 – 11:18
शनि 11:18 – 12:25
बृहस्पति 12:25 – 13:31
मंगल 13:31 – 14:38
सूर्य 14:38 – 15:44
शुक्र 15:44 – 16:50
बुध 16:50 – 17:57
चन्द्र 17:57 – 19:03
🚩होरा, रात
शनि 19:03 – 19:57
बृहस्पति 19:57 – 20:51
मंगल 20:51 – 21:44
सूर्य 21:44 – 22:38
शुक्र 22:38 – 23:31
बुध 23:31 – 24:25
चन्द्र 24:25* – 25:19
शनि 25:19* – 26:12
बृहस्पति 26:12* – 27:06
मंगल 27:06* – 27:59
सूर्य 27:59* – 28:53
शुक्र 28:53* – 29:47
*🚩 उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩*
कर्क > 03:30 से 05:48 तक
सिंह > 05:48 से 07:58 तक
कन्या > 07:58 से 10:08 तक
तुला > 10:08 से 12: 34 तक
वृश्चिक > 12:24 से 14:42 तक
धनु > 14:42 से 16:48 तक
मकर > 16:48 से 18:36 तक
कुम्भ > 18:36 से 20:08 तक
मीन > 20:08 से 21:36 तक
मेष > 21:36 से 23:12 तक
वृषभ > 23:12 से 01:08 तक
मिथुन > 01:08 से 03:26 तक
*🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार*
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
2 + 3 + 1 = 6 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩*
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
सूर्य ग्रह मुखहुति
*💮 शिव वास एवं फल -:*
2 + 2 + 5 = 9 ÷ 7 = 2 शेष
गौरी सान्निधौ = शुभ कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
* चन्द्र दर्शन
*💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮*
अहिं नृपं च शार्दुलं बरटि बालकं तथा ।
परश्वानं च मूर्ख च सप्त सुप्तान्न बोधयेत् ।।
।। चा o नी o।।
इन सातो को नींद से नहीं जगाना चाहिए…
१. साप
२. राजा
३. बाघ
४. डंख करने वाला कीड़ा
५. छोटा बच्चा
६. दुसरो का कुत्ता
७. मुर्ख
*🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩*
गीता -: अक्षरब्रह्मयोग अo-08
यत्र काले त्वनावत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः ।,
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥,
हे अर्जुन! जिस काल में (यहाँ काल शब्द से मार्ग समझना चाहिए, क्योंकि आगे के श्लोकों में भगवान ने इसका नाम ‘सृति’, ‘गति’ ऐसा कहा है।,) शरीर त्याग कर गए हुए योगीजन तो वापस न लौटने वाली गति को और जिस काल में गए हुए वापस लौटने वाली गति को ही प्राप्त होते हैं, उस काल को अर्थात दोनों मार्गों को कहूँगा॥,23॥,
*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🙏🏻आज का राशिफल🙏🏻
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन आपका व्यक्तित्त्व निखरा हुआ रहेगा लेकिन स्वभाव में जिद और अहम भी रहने से लोग आपकी बातो का गलत अर्थ ही निकालेंगे। मध्यान से पहले तक एकाग्रता अधिक रहेगी मानसिक रूप से शांत रहने के कारण दैनिक पूजा पाठ में आज अधिक मन लगेगा लेकिन दोपहर बाद कार्य भार बढ़ने से एकाग्रता भंग होगी जिस कार्य को करना है उसे छोड़ व्यर्थ के कार्यो में रुचि लेंगे। कार्य व्यवसाय में मेहनत से पीछे नही हटेंगे परन्तु तुरंत फल पाने की चाह मानसिक अशांति बढ़ाएगी धैर्य से काम ले आज आवश्यकता अनुसार आर्थिक लाभ अवश्य होगा भले थोड़ा विलंब से ही हो। पारिवारिक वातावरण अपने काम से काम रखने तक ही शांत रहेगा किसी को ताने मारना अथवा कार्य मे दखल देना परेशानी में डालेगा। सेहत छोटी मोटी व्याधि को छोड़ सामान्य रहेगी।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन भी आपको घरेलू एवं सामाजिक क्षेत्र पर प्रतिकूल फल मिलने वाले है। दिन के आरंभ से ही आपका स्वभाव अत्यंत रूखा रहेगा लोगो की कमियां खोज खोज कर लड़ने के लिये तैयार रहेंगे घर के सदस्य भी पुरानी गलतियां गिना कर माहौल को अधिक अशांत बनाएंगे। मध्यान बाद स्थिति में थोड़ा सुधार आएगा कार्य क्षेत्र पर आकस्मिक धन लाभ होने से मन की कड़वाहट कम होगी लेकिन धन संबंधित विषयों को लेकर किसी न किसी से कलह भी हो सकती है। संध्या का समय व्यवसाय में वृद्धि करेगा लेकिन धन लाभ होने की जगह आश्वासन ही मिलेंगे। घर में भी वातावरण पहले से शांत बनेगा पर पूरी तरह शांत होने में समय लग सकता है। अनैतिक कार्यो से दूर रहे शारीरिक हानि के साथ मान भंग होने की संभावना है। मानसिक अशांति अन्य विकारों को जन्म देगी शान्त रहने का प्रयास करें।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपकी आशाओं पर खरा उतरेगा दिनचर्या भी आज व्यवस्थित रहने का फायदा मिलेगा। दिन के आरंभ में कार्य करने की गति थोड़ी धीमी रहेगी लेकिन मध्यान से धीरे धीरे गति आने लगेगी एक बार सफ़लता का स्वाद चखने के बाद अधिक निष्ठा से कार्यो में तल्लीन हो जाएंगे। धन की आमद रुक रुक कर पर एकसाथ कई मार्ग से होने पर उत्साहित रहेंगे। जोखिम आज बेजीझक ले सकते है लाभ ही होगा। मध्यान बाद आपका ध्यान कार्य क्षेत्र पर कम मनोरंजन पर अधिक रहेगा जल्दबाजी में कार्य करेंगे जिससे कुछ त्रुटि होने की संभावना है सतर्क होकर कार्य करें। पारिवारिक वातावरण लगभग शांत ही रहेगा किसी की जिद के आगे झुकना पड़ेगा। जोड़ो में तकलीफ हो सकती है।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज के दिन से आपको ज्यादा लाभ की उम्मीद नही रहेगी। दिन के आरम्भ से ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप कार्य करने का उत्साह खत्म करेगा। व्यवसाय में भी डर का वातावरण महत्तवपूर्ण निर्णय लेने से रोकेगा लेकिन आज आप मन की सुनने की अपेक्षा दिमाग का प्रयोग करें जहां हानि कि सम्भवना रहेगी वहां से आकस्मिक लाभ मिल सकता है। माता की भी सेहत खराब होने से दौड़धूप करनी पड़ेगी घर मे किसी न किसी की बीमारी पर खर्च बढ़ेगा। मध्यान से स्थिति में सुधार आने लगेगा बीमारी में थोड़ा सुधार आने पर व्यवसाय की चिंता सताएगी फिर भी ज्यादा भागदौड़ से बचे अन्यथा संध्या बाद तबियत फिर से खराब होने पर थोड़े बहुत कार्य भी नही कर पाएंगे। संतोषी वृति अपनाए सुखी रहेंगे।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन भी आप अपने मन की ही सुनेंगे और करेंगे। व्यवहारिकता रहेगी फिर भी अपने मे ही मगन रहेंगे किसी का कार्यो में दखल देना आपको भायेगा नही। कार्य व्यवसाय में आज बुद्धि और धन दोनो लगाने पर ही लाभ कमाया जा सकता है। सहकर्मी आपके अड़ियल व्यवहार से परेशान रहेंगे कहासुनी भी हो सकती है फिर भी आज संध्या के समय धन की प्राप्ति किसी पुराने साधन के द्वारा हो ही जाएगी। मन मे लंबी यात्रा के विचार बनेंगे लेकिन आज करना केवल खर्च बढ़ाना मात्र रहेगा इससे लाभ की आशा ना रखें। घर का वातावरण भी आज ढुलमुल रहेगा वादा पूरा करने में आनाकानी करेंगे जिससे परिजनों के मन मे कड़वाहट आएगी। सेहत आज सामान्य रहेगी फिर भी लोहे के उपकरणों से सावधान रहें।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज के दिन आपको घर और कारोबार में तालमेल बैठाने में परेशानी आएगी। दिमाग मे व्यवसाय सम्बंधित उलझने दिन के आरंभ से ही लगी रहेंगी उपर से घरेलू कार्य का बोझ आने से दुविधा में रहेंगे घर के बुजुर्गों का सहयोग भी कम रहने से स्वयं को ही अधिकांश कार्य निपटाने पड़ेंगे। दोपहर बाद भागदौड़ से निजात मिलेगी लेकिन व्यावसायिक कारणों से व्यस्तता बढ़ेगी कार्य क्षेत्र का माहौल अकस्मात बदलने से थोड़ी असहजता होगी फिर भी सहयोगियों की मदद से इससे पर पा लेंगे धन की आमद टलते टलते संध्या के समय अचानक होगी। घर मे आज किसी के नाराज होने से वातावरण कुछ समय के लिये उदासीन बनेगा बात मानने पर सामान्य हो जाएगा संचित धन में कमी आएगी सेहत में भी कुछ न कुछ विकार रहेगा पर कार्य रुकने नही देंगे।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन लाभदायक है आज आप जिस भी कार्य को करने का मन बनाएंगे परिस्थितियां पहले से ही इसके अनुकूल बनने लगे जाएंगी। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धा रहने पर भी आपके व्यवसाय को प्रभावित नही कर पायेगी। नौकरी पेशाओ को अपने कार्य मे विजय मिलने से अधिकारी वर्ग से निकटता बढ़ेगी लेकिन बच कर भी रहे आज जिससे भी प्रेम संबंधों में घनिष्ठता बढ़ेगी वही कुछ ना कुछ भार आपके ऊपर डालेगा जिससे अपने कार्यो अथवा हितों की हानि हो सकती है। धन लाभ के लिये ज्यादा भागदौड़ नही करनी पड़ेगा सहज रूप से होने पर निश्चिन्त रहेंगे। गृहस्थी में सुख शांति बनी रहेगी पैतृक साधनों में वृद्धि करने से घर के बड़े बुजुर्ग प्रसन्न रहेंगे लेकिन महिलाए किसी बात को लेकर मुह फुलायेंगी सेहत मामूली बातो को छोड़ ठीक ही रहेगी।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन भी कार्य सफलता दायक रहेगा लेकिन आज आपको गलत मार्गदर्शन करने वाले भी मिलेंगे जो आपके हितैषी बनकर बेवजह ही उटपटांग सलाह देकर मार्गभ्रमित करेंगे। किसी भी कार्य को करने से पहले घर मे बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें सफलता निश्चत होगी। व्यावसायिक क्षेत्र पर आज अन्य दिनों की तुलना में अधिक माथापच्ची करनी पड़ेगी धन लाभ के कई अवसर मिलेंगे लेकिन बेवजह के खर्च भी आज अधिक रहेंगे जिससे थोड़ा बहुत लाभ ही हाथ लगेगा। आज जोखिम वाले कार्यो में निवेश से बचे अन्यथा धन फंस सकता है। आध्यात्म के क्षेत्र से जुड़े जातको को साधना में नई अनुभूति होगी। गूढ़ विषयो को जानने की लालसा बढ़ेगी। सेहत में कुछ विकार भी आ सकता है। पेट से ऊपर के भाग संबंधित परेशानी की संभावना है।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन बीते दिन की अपेक्षा आपका स्वभाव एकदम विपरीत रहेगा आज आपके अंदर व्यवहारिकता अधिक रहेगी सार्वजिक क्षेत्र पर मीठी वाणी के बल पर वरिष्ठ लोगो से नए संबंध बनेंगे इसने भविष्य में कुछ न कुछ लाभ अवश्य होगा। पराक्रम शक्ति प्रबल रहने पर भी काम-धंधे से मध्यान तक दौड़धूप के बाद भी सकारात्मक परिणाम ना मिलने से मायूसी आएगी लेकिन संध्या के समय मेहनत का फल धन लाभ के रूप में मिलने से मन को राहत पहुचेगी। संध्या के समय भी व्यवसाय में गति रहेगी लेकिन खर्च बढ़ने से संचय नही कर पाएंगे। घर मे मातृ शक्ति की अधिक चलेगी काम निकालने के लिये खुशामद करनी पड़ेगी। भूमि वाहन सुख आज उत्तम रहेगा। व्यावसायिक चिंता को छोड़ सेहत ठीक ही रहेगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज भी दिन आपके लिये प्रतिकूल रहने वाला है सेहत में आज भी कुछ ना कुछ विकार रहने से कार्य करने का मन नही करेगा आज आपको ज्यादा भाग दौड़ अथवा मेहनत के कार्य से बचना चाहिये अन्यथा स्थिति गंभीर भी हो सकती है। मध्यान के समय कार्यो को जबरदस्ती करेंगे जिससे थकान बढ़ेंगी और काम मे भी कुछ ना कुछ नुक्स रह जायेगा। दोपहर बाद का समय थोड़ा राहत वाला रहेगा किसी स्वजन की सहायता से धन अथवा अन्य प्रकार से लाभ होगा सेहत में सुधार तो आएगा परन्तु विपरीत लिंगीय आकर्षण भी बढ़ने से अपमान जैसी स्थिति बनेगी। घर के सदस्यों का सहयोग आज कम ही मिलेगा पति पत्नी एकदूसरे को शंका की दृष्टि से देखेंगे। यात्रा ना करें।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन भी आपकी आशा के अनुकूल रहेगा लेकिन आज आप लाभ पाने के लिये गलत हथकंडे अपनाएंगे जिससे सामाजिक क्षेत्र पर आलोचना हो सकती है। पुराने कार्य से धन की आमद निश्चित रहेगी फिर भी ज्यादा पाने की लालसा में चैन से ना खुद बैठेंगे ना ही कार्य क्षेत्र पर अन्य सहयोगियों को बैठने देंगे। सहकर्मी मन ही मन आपको बुराभला कहेंगे पर आर्थिक रूप से मदद मिलने पर व्यवहार बदल जायेगा। व्यवसाय में नए प्रतिद्वन्दी उभरेंगे लेकिन आज आपका चाहकर भी अहित नही कर पाएंगे। भागीदारी के कार्यो में निवेश से बचें। घर मे किसी के ऊपर नाजायज दबाव डालने से कलह हो सकती है। नेत्र, हड्डी, मूत्र संबंधित समस्या होने की संभावना है।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन भी आपको आर्थिक समृद्धि प्रदान करेगा लेकिन आज खर्च करते समय सोच विचार अवश्य करें ठगे जाने अथवा अन्य कारणों से हानि हो सकती है घर के बड़े परिजन भी आपकी फिजूल खर्ची से नाराज होंगे इसके बाद ही मितव्ययी बनेंगे। कार्य क्षेत्र से दिन के पूर्वार्द्ध में ही अनुकूल वातावरण मिलेगा धन की आमद असमय होने से आश्चर्य में पढ़ेंगे। दूर रहने वाले स्वयंजन से कोई अप्रिय सूचना मिलने से कुछ समय के लिये उदासी छाएगी फिर भी अन्य क्षेत्रों से उत्साहित करने वाले प्रसंग बनते रहेंगे। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें अकस्मात दुर्घटना में चोटादि का भय है शरीर मे दुखन एवं मूत्राशय संबंधित संमस्या होगी।
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🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो🙏🏻
बजरंग बाण क्या है और इसका क्या महत्व है?
बहुत ही सुन्दर प़श्न है। ऐसे प़श्न से प़श्न कर्ता तो पावन होता ही है उत्तर दाता भी जनमानस सहित पुण्य भागी होता है।संत शिरोमणि तुलसीदास जी द्वारा रचित बजरंग बाण बहुत ही शक्तिशाली, दिव्य और अमोघ है। महात्मा तुलसीदास जी ने जिन मंगलमूर्ति हनुमान जी का अपने जीवन में क ई बार साक्षात्कार किया उन्ही पवन सुत के गुणों का वर्णन करते हुए इस प्रभाव शाली बजरंग बाण की अद्भुत चमत्कारी रचना की है। यह ऐसा दिव्य मंत्र है जिसमें महाबली शक्ति शाली हनुमान जी की सिद्धि से संकटों पर अचूक निशाना लगता है संकट दूर हो जाते हैं। इस बजरंग बाण कै हर शब्द में अपूर्व शक्ति समाहित है । मनोविज्ञान के सिद्धांत के अनुसार मनुष्य जिन विचारों को पूरी श्रद्धा और विश्वास से बार बार दोहराता है वही मानसिक स्थिति सदा के लिए उसकी आदत और स्वभाव बन जाती है। बजरंग बाण में पूरी श्रद्धा रखने और श्रद्धा पूर्वक बार बार दोहराने से हमारे मन में हनुमान जी की शक्तियां जमने लगती है। इससे सब संकट अल्प समय में दूर हो जाता है। बाल्मिकी रामायण उत्तरकांड सर्ग १०८ के श्र्लोक ३३,३५ के अनुसार ——
प़भु श्रीराम ने अपने परधाम गमन के समय हनुमान जी को स्पष्ट शब्दो मैं आज्ञा दी थी——-
मत्कथा प़चरिष्यन्ति यावल्लोके हरीश्र्वर ।
तावद् रमस्व सुप़ीतो मद् वाक्यम नुपालनम् ।।(१०८/३३)
इस आज्ञा से हर्षित हो हनुमान जी ने स्वीकार कर कहा—-
या वत् त्वं कथा लोकै विचरिष्यंति पावनी ।
ता वत् स्थास्यामि मेदिन्या तवाज्ञामनुपालयन् ।।(१०८/३५)
कहने का तात्पर्य यह है कि जो महावीर हनुमान जी सशरीर इस पृथ्वी पर विराजमान हैं अधिकारी भक्तों को दर्शन देकर कृतार्थ करते रहते हैं उनकी उपासना में हम विलंब क्यो करें।
सबसे पहले हनुमान जी की सुंदर मूर्ति या चित्र अपने सामने एक आसन पर रखकर पुष्प , धूप दीप , चन्दन आदि से सुशोभित कर निम्न चमत्कारी बजरंग बाण का नियमित पारायण कीजिए ।बार बार दोहराने से याद भी हो जाएगा। इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के कार्य के लिए किया जा सकता है परंतु किसी क्षुद्र एवं वैर भाव कै लिए नहीं करना चाहिए।
बजरंग बाण——
निश्चय प्रेम प्रतीति ते विनय करै हनुमान।
तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करै हनुमान।।
जय हनुमत संत हितकारी, सुनि लीजै प़भु विनय हमारी।
जन के काज विलम्ब न कीजे, आतुर दौरि महासुख दीजै।
जैसे कूदि सिंधु के पारा, सुरसा बदन पैठि विस्तारा ।
आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुर लोका।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ,सीता निरखि परमपद लीन्हा।
बाग उजारि सिंधु मह बोला, अति आतुर जमकातर तोरा।
अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेट लंक को जारा।
लाह समान लंक जरि ग ई, जय जय धुनि सुरपुर नभ भई।
अब विलंब केहि कारण स्वामी, कृपा करहु उर अंतर जामी।
जय जय लखन प्राण के दाता, आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता।
जय हनुमान जयति बल सागर, सुर समूह समरथ भटनागर।
ओम हनु हनु हनु हनमंत हठीले, बैरिहि मारू बज्र कै कीलें।
ओम हीं हीं हीं हनमंत कपीसा, ओम हुं हुं हुं हनु अरिउरसीसा
जय अंजनि कुमार बलवंता, संकर सुवन बीर हनमंता ।
वदन कराल काल कुल घालक, राम सहाय सदा प़तिपालक।
भूत प्रेत पिसाच निशाचर, अग्नि बेताल काल मारी मर।
ईनहि मारू तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की।
सत्य होऊ हरि सपथ पाई कै, राम दूत धरु मारू धाईं कै।
जय जय हनुमंत अगाधा, दुःख पावत जन केहि अपराधा।
पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा।
वन उपवन मग गिरि गृह माही, तुम्हरे बल हम डरपतनाही।
जनक सुता हरिदास कहावौ, ताकि सपथ विलंब न लावौं।
जय जय जय धुनि होत अकाशा, सुमिरत होय दुसह दुःख नाशा।
चरन पकरि कर जोरि मनावौं, एहि अवसर अब केहि गोहरावौ
उठ उठ चलु तोहि राम दोहाई, पाय परौं कर जोरि मनाई।
ओम चम चम चम चम चपल चलंता, ओम हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।
ओम हं ह हांक देत कपि चंचल, ओम सं सं सहमि पराने खल दल।
अपने जन को तुरत उबारो, सुमिरत होय अनंद हमारो।
यह बजरंग बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिर कवन उबारै।
पाठ करै बजरंग बाण की, हनुमत रक्षा करै प्राण की।
यह बजरंग बाण जो जापै, तासो भूत प्रेत सब कांपै।
धूप देई जो जपै हमेशा, ता के तन नहिं रहै कलेशा।
उर प़तीति दृढ शरण ह्वै ,पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करै सब काम सफल हनुमान।।
उपरोक्त बजरंग बाण को कंठस्थ कर लेना चाहिए। किसी भी प्रकार केमहत्वपूर्ण कार्य के पहले इसका पाठ कर लेना चाहिए। यह ब़ह्मास्त्र के समान प़भावशाली है अतः सिदृध करलेने पर सहसा किसी दुर्बल पर प्रयोग नहीं करना चाहिए। एक गूढ़ रहस्य यह है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने तुलसी शब्द का संबोधन न करते हुए स्वंय को जनक सुता हरिदास कहा है जबकि अन्य रचनाओं में तुलसी शब्द का प़त्यक्ष प़योग किया है। पुरुष महिला बाल वृद्ध कोई भी इस चमत्कारी बजरंग बाण को अपने प़योग में ला सकता है। विशेष कर इंटरव्यू के कुछ मिनट पहले इसका पाठ बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है। जो भी हो श्रद्धा और विश्वास से पाठ नित्य प्रति करने चाहिए।


















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