न्यूज़ रिपोर्टर शाका नामदेव गुना
चेतना साहित्य एवं कला परिषद की गुरु पूर्णिमा पर कवि गोष्ठी हुई संपन्न।
खबर गुना जिला मध्य प्रदेश से
चेतना साहित्य एवं कला परिषद गुना द्वारा गुरु पूर्णिमा पर रेलवे सुरक्षा बल थाने के सामने हाल में वरिष्ठ कवि विष्णु साथी की अध्यक्षता श्रीमती संतोष ब्रह्मभट्ट के मुख्य आतिथ्य तथा रामजीवन भार्गव के विशिष्ट आतिथ्य में कवि गोष्ठी संपन्न हुई कवि गोष्ठी का संचालन नगर के जाने-माने शायर प्रेम सिंह प्रेम ने किया । सरस्वती वंदना श्रीमती संतोष ब्रह्मभट्ट ने सुनाई। संचालन करते हुए प्रेम सिंह प्रेम ने कहा त्याग के बिना कभी कोई शोहरत नहीं होती कामयाबित किसी की बदौलत नहीं होती, किसी के दिल में मुकाम बनाकर तो देखिये मोहब्बत से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती। वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने जीवन को खरा सोना बनाते हैं श्री गुरुवर, मानव को सही मार्ग, दिखाते हैं श्री गुरुवर।उमाशंकर भार्गव ने गुरु के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गुरु की बनाये रखिये आप हमेशा गरिमा,वेद पुराणों में भी वर्णित है गुरु की महिमा।आरोन से आये कवि विनोद तिवारी मानस ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा न है ईराक को खतरा नहीं ईरान को खतरा, किसी को है अगर खतरा तो इंसान को है खतरा। दुकान कपड़े की है तेरी खबर चूहों की तू रखना,अगर एक भी घुसा तो फिर पूरी थान को खतरा। हरीश सोनी ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा कि ब्रह्मा विष्णु शिव से बढ़कर गुरु को माने है गुरु ने जब पहचान कराई प्रभु पहचाने है। सत्यवती सुत वेदव्यास को अर्घ्य चढ़ाते हैं हम सब मिलकर गुरु पूर्णिमा पर्व मनाते हैं। नरेंद्र भार्गव पद्म ने कहा पीर हुई अधीर हृदय में घाव गहरा है संदेश खाली में हर दरवाजे पर मौत का पहरा है, वोटों की राजनीति है सत्ता का सवाल है लहूलुहान है ज़िन्दगी आज भी जलता बंगाल है। श्रीमती संतोष ब्रह्मभट्ट ने कहा तेरे चरणों में चारों धाम हे गुरुवर तुझे प्रणाम ये धरती है संतोष की,संत यहां पर रहते है मैंने बचपन से देखा है और वेद शास्त्र भी कहते हैं। डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर ने कहा गुरु नित आत्मा है गुरु परमात्मा है गुरु से ही मिलता हमको सद्ज्ञान है।शायर सलाउद्दीन शिकवा ने कहा छंद कविता और दोहे कहना कोई आसान नहीं वो क्या लिख पायेगा जिसको गुरु का ज्ञान नहीं। धर्मवीर सिंह ने कहा प्रथम गुरु माता-पिता दूजा है भगवान, जाने इस संसार में कहां मिले गुरु ज्ञान। अमित शर्मा उर्फ बब्लू ने कहा चलते चलो मुसाफिर पुरुषार्थ के सहारे मंजिल तुम्हें पुकारे, मंजिल तुम्हें पुकारे। रामजीवन भार्गव ने कहा प्यास लगे तो पनघट की याद आती है,लाज लगे तो घूंघट की याद आती है,कितनी हसीन कहानी है जिन्दगानी की उम्र ढलती है तो मरघट की याद आती है। अभिनंदन मडवरिया ने कहा गुरुवर आचार्य विद्यासागर मुनिराज के श्री चरणों में लाईफ लाईन एक्सप्रेस करती हमको इम्प्रेस। बाबू खां निडर ने कहा रिश्वत अम्मा बाप कमीशन बेटा बन गया घोटाला,जिधर भी देखो जहां भी देखो नजर आता है काला काला।कमल लखनवी ने प्रथम बार कविता पढ़ते हुए कहा पहले ज्ञान पाने के लिए गुरु आश्रम जाते थे आज आन लाइन गुरु का ज्ञान पाते हैं। कवि गोष्ठी में रुद्र पंडित बिहार, राजाराम लखनऊ, समाजसेवी निरंजन भाया कसेरा, नंदकिशोर अग्रवाल रांधे राधे, पवन शर्मा, दीपक, नारायण लाल मैयर, रंगेश श्रीवास्तव, जगदीश श्रीवास्तव, हरिओम श्रीवास्तव, कैलाश धाकड़, असीम भटनागर, विनय, रामलाल, बृजराज सहित अन्य कई श्रोताओं ने कवि गोष्ठी का लुत्फ उठाया आभार उमाशंकर भार्गव ने व्यक्त किया।


















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