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राजगढ़ – मान्यता आठवी तक की ओर एडमिशन बारहवीं तक के अब बच्चे मांग रहे थे टी सी तो स्कूल संचालक ने मना किया टी सी देने से

  • ब्यूरो रिपोर्ट राजगढ़

मां दुर्गा एकेडमी की शिकायत होने पर की गई गोलमाल जांच, फिर की गई शिकायत

मान्यता आठवी तक की ओर एडविशन बारावी तक के अब बच्चे मांग रहे थे टी सी तो स्कूल संचालक ने मना किया टी सी देने से

पूर्व में भी चार स्कूल संचालकों द्वारा जिला कलेक्टर से की थी शिकायत

राजगढ़ – निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लगता है अधिकारियों पर बड़े लोगो के हाथ है।तभी शिकायत होने के बावजूद माचलपुर नगर के मां दुर्गा एकेडमी संचालक बेधड़क ऐसी कक्षाओं का संचालन कर रहा है जिसकी उसे मान्यता नहीं है। उल्लेखनीय है कि माचलपुर नगर में मां दुर्गा एकेडमी के नाम से एक निजी स्कूल संचालित है जिसकी पिछले साल महज कक्षा 8 वीं तक की मान्यता थी।

लेकिन स्कूल संचालक द्वारा शहर के सोशल मीडिया ग्रुप में एक पम्पलेट वायरल कर स्वयं के स्कूल में पिछले सत्र में कक्षा 10 वीं एवं कक्षा 12वीं के ऐसे छात्र छात्राओं के फोटो प्रकाशित करवाए गए जिन्होंने अच्छे अंक हासिल किए गए। सवाल उठता है कि जब इस स्कूल की मान्यता कक्षा 8 वीं तक थी तो यह कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं के छात्र छात्राओं को कैसे पढ़ा रहा था।
नगर के अन्य स्कूल संचालक जिनकी मान्यता हाई स्कूल हायर सेकंडरी तक की है ऐसे स्कूलों के संचालकों एवं कुछ अभिभावकों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जीरापुर बीईओ एवं बीआरसी को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जांच में जरूर कोई गोलमाल किया गया। क्यों कि इस स्कूल द्वारा अभी भी बड़ी कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है ऐसा आरोप है नगर के सरस्वती शिशु मंदिर,प्रज्ञा पब्लिक स्कूल,आदर्श स्कूल एवं द रेडियंट स्कूल के संचालकों का। इन चारों स्कूल संचालकों द्वारा फिर से कलेक्टर राजगढ़ सहित जिला शिक्षा अधिकारी,बीईओ को लिखित शिकायत की गई है।

*पूर्व की मान्यता भी संदेहास्पद*

मां दुर्गा एकेडमी के ठीक सामने पहले से ही एक निजी स्कूल संचालित है। जब मां दुर्गा एकेडमी की सर्व प्रथम मान्यता दी गई तब यह स्कूल सामने संचालित काशी गुरुकुल एकेडमी से महज 100 मीटर से भी कम दूरी पर संचालित था ऐसे में इस स्कूल के भौतिक सत्यापन के दौरान भौतिक सत्यापन करने वाले जिम्मेदार अधिकारी द्वारा निजी स्कूलों की मान्यता के मापदंडों को ताक में रखकर कैसे मान्यता दिलाने में सहयोग किया गया यह भी जांच का विषय है। वहीं तत्कालीन समय में इस यह स्कूल एक बाड़ेनुमा जगह में चल रहा था। हालांकि इस सत्र से स्कूल संचालक द्वारा उसी बाड़े में अधिक दूरी बनाकर नए भवन का निर्माण कर लिया गया है। लेकिन सवाल तो पिछली बार की मान्यता पर खड़े होते हैं।

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