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चेतना साहित्य एवं कला परिषद गुना द्वारा कवि गोष्ठी संपन्न।

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न्यूज़ रिपोर्टर शाका नामदेव गुना

चेतना साहित्य एवं कला परिषद गुना द्वारा कवि गोष्ठी संपन्न।

 

खबर गुना जिला मध्य प्रदेश

चेतना साहित्य एवं कला परिषद गुना द्वारा दुबे कालोनी स्थित बिध्न हरण बालाजी मंदिर पर गायत्री जयंती, फादर्स डे तथा गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में वरिष्ठ कवि विष्णु साथी की अध्यक्षता, नरेंद्र भार्गव पद्म के मुख्य आतिथ्य तथा समाज सेवी निरंजन भाया कसेरा, प्रमोद अग्रवाल के विशिष्ट आतिथ्य में कवि गोष्ठी संपन्न हुई। कवि गोष्ठी का संचालन डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर ने किया ‌सरस्वतीवंदना डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर ने सुनाई। संचालन करते हुए डाक्टर लक्ष्मीनारायण बुनकर ने कहा पिता जनक संतान का, जननी माता जान। तृप्त न होती प्रेम से जो उसकी संतान।शुभ लक्षण है पिता के घर का जिम्मेदार भरा और पूरा रखे वह अपना परिवार। वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने कहा पिता पुत्र का नाता जग में कितना सुख दाता, आशीर्वाद पिता श्री जी का व्यर्थ नहीं जाता। उमाशंकर भार्गव ने गायत्री जयंती पर अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा जिसके सुमिरन करने से होता आलस,पाप,अविध्या कानाश,निर्मल और निष्कपट हृदय में आप करती हो वास।शहर के वरिष्ठ कवि वीरेंद्र मुक्त सोनी ज़िन्दगी के संबंध में अपने भावों को यूं व्यक्त किया ज़िन्दगी ऐसे जियो कि मिसाल हो जाये संकट में अंधकार में मशाल हो जाये। श्रीमती कीर्ति मोरोलिया ने अपने भाव मांता पिता के संबंध में रखते हुए कहा कि मां जग की जननी है तो पिता है पालनहार,मां त्याग की मूर्ति है तो पिता है सारा संसार। साक्षी ओझा ने कहा उंगली थाम कर चलना सिखाया जब भी मैं गिरी ठोकर से हिम्मत से फिर उठना सिखाया। नरेंद्र भार्गव पद्म ने कहा मां तो जननी है धरा सी पिता विशाल आसमान है, माता पिता दोनों वंदनीय है ये धरा के भगवान है । श्रीमती संतोष ब्रह्मभट्ट ने कहा वक्त बदलते देखा है सब कुछ उजड़ते देखा है पिता के जाने के बाद मां को पल पल मरते देखा है। हरीश सोनी ने कहा कि है अपनी पहचान पिता से है अपना सम्मान पिता से वे ही तो घर की रौनक है सारथी घर की शान पिता से।शायर सलाउद्दीन शिकवा ने कहा ऐसा सनम कदा कोई चलकर दिखाइए, जो मुंह से बोलता है वह पत्थर दिखाइए
सूबेदार धर्मवीर सिंह भारतीय ने कहा देवों के भी देव हैं कृष्ण देव, उनके पिता थे श्री वासुदेव। प्रेम सिंह प्रेम ने कहा पिता हमारे दिल के अंतश का प्यार है पिता हमारे सपनों का जीवित संसार है दुनिया भर के सुख दुःख के बीच पिता हमारे जीवन का संपूर्ण आधार है। राजाराम ने कहा कि पानी की हर बूंद अनमोल है इसे न व्यर्थ गंवाइये। श्रीमती माया ओझा ने कहा गंगा मैया सबका करती है उद्धार, नहीं करती वह धर्मी अधर्मी का विचार। अभिनंदन मडवरिया ने कहा पूज्य पिताजी थे महान जीवन में था इत्मीनान सहज सरल और संचत वानी सदा रहे वे स्वाभिमानी। इस अवसर पर विकास धाकड़,लखन शर्मा, आशीष दुबे, बृजराज सिंह गौतम,आर्विका चौहान, अर्चना चौहान, अतुल शर्मा, अशोक माथुर, प्रमोद अग्रवाल रतलामी दीपक शर्मा, नारायण लाल मैयर रवि शर्मा, बृजेश श्रीवास्तव, रंगेश श्रीवास्तव, जगदीश श्रीवास्तव, असीम भटनागर सहित कई नागरिक उपस्थित रहे।

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