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बागेश्वर- सिंचाई विभाग परिसर में लगी आग, हादसा

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सिंचाई विभाग परिसर में लगी आग, हादसा

बागेश्वर के सिंचाई विभाग परिसर में सूखे पेड़ पर लगी आग को बुझाते दमकल कर्मी।

बागेश्वर। सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में आग लगने से पेड़ जल गया। दमकल और वन विभाग के कर्मचारियों ने समय रहते आग को काबू कर लिया, इससे बड़ा हादसा बच गया।
सोमवार को कठायतबाड़ा में सिंचाई विभाग के कार्यालय परिसर में आग से अफरातफरी मच गई। हवा के झोंकों ने आग को भड़काने में मदद की। देखते ही देखते आग ने परिसर में खड़े सूखे पेड़ को चपेट में ले लिया। कर्मचारियों ने आग लगने की सूचना वन विभाग और फायर सर्विस को दी। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गोपाल सिंह रावत के निर्देशन में फायर सर्विस कर्मचारी तत्काल मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ पर लगी आग को काबू किया जा सका। वहीं, सूचना मिलने के बाद रेंजर श्याम सिंह करायत भी कर्मचारियों को लेकर मौके पर आए और आग बुझाने में मदद की। रेंजर करायत ने बताया कि परिसर में कूड़ा जलाया जा रहा था। कूड़े में लगी आग की चपेट में पेड़ आ गया। समय रहते आग नहीं बुझती को सिंचाई विभाग कार्यालय के साथ-साथ ब्लॉक कार्यालय और आसपास की दुकानों को भी नुकसान हो सकता था।
जिले में अब तक 9.26 हेक्टेयर जंगल जले
बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। बैजनाथ रेंज के मजकोट के जंगलों में लगी आग से 1.25 हेक्टेयर जंगल जल गए। आग से 3750 रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं गढ़खेत रेंज के अमस्यारी वन पंचायत में आग लगने से एक हेक्टेयर क्षेत्र में वन संपदा जल गई और 3000 रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अब तक वनाग्नि की नौ बड़ी घटनाओं में 9.26 हेक्टेयर जंगल जल चुका है और 26,580 रुपये के नुकसान का अनुमान है। अमस्यारी के सामाजिक कार्यकर्ता बसंत बल्लभ जोशी ने बताया कि आग में उनके लगाए कई पेड़-पौधे भी जलकर नष्ट हो गए हैं। उन्होंने डीएम को पत्र लिखकर जंगल जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है
फायर सीजन में डीएफओ का पद खाली
बागेश्वर। एक ओर फायर सीजन चरम पर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले में डीएफओ का पद रिक्त है। अल्मोड़ा के डीएफओ के पास बागेश्वर जिले का भी प्रभार है। विगत वर्ष भी फायर सीजन में ऐसा ही हाल देखने को मिला था। तब बागेश्वर के डीएफओ के पास अल्मोड़ा जिले की अतिरिक्त जिम्मेदारी थी। डीएफओ के नहीं होने से वनाग्नि रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम को संचालित करने में परेशानी हो रही है।

एसडीओ सुनील कुमार ने बताया कि वनाग्नि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत वन विभाग के कर्मचारी और फायर वॉचर लगातार जंंगलों में लगी आग को नियंत्रित कर रहे हैं। जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को जंगलों को आग से बचाने और आग लगाने वालों की सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग की ओर से भी आग लगाने वाले अराजक तत्वों पर नजर रखी जा रही है।

न्यूज रिपोर्टर दीपक कुमार बागेश्वर उत्तराखंड

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