जनम-जनम मुनि जतन कराही, अन्त राम कहि आवत नाहीं,
9 दिवसीय श्री शिव शक्ति महायज्ञ और श्रीराम कथा
रिपोर्टर-शिवेश शुक्ला बस्ती उत्तर प्रदेश

बस्ती । राम वियोगी का जीवन कैसा होना चाहिये इसका आदर्श जगत के समक्ष भरत ने प्रस्तुत किया। ‘‘सुनहुं उमा ते लोग अभागी। हरि तज होहिं विषय अनुरागी।। जब तक ईश्वर से जीव की मैत्री नहीं हो जाती जीवन सफल नहीं होता। कृष्ण और काम, राम और रावण एक साथ नहीं रह सकते। रामचन्द्र जी ने सुग्रीव को अपना मित्र बनाया क्योंकि सुग्रीव को हनुमान जी ने अपनाया है। ईश्वर के साथ प्रेम करना है तो दूसरों का प्रेम छोड़ना पड़ेगा। यह सद् विचार कथा व्यास अंकित दास ने श्रीराम जानकी मंदिर निपनिया चौराहा में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त दसकोलवा में आयोजित 9 दिवसीय श्री शिव शक्ति महायज्ञ और श्रीराम कथा में व्यक्त किया।
राजा दशरथ का श्रीराम वियोग में निधन, श्रीराम का चित्रकूट में प्रवेश, सीताहरण, श्रीराम हनुमान का मिलन, शबरी प्रसंग, बालि बध सहित अनेक प्रसंगो का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि हनुमान जी को कौन उपदेश दे सकता है, वे तो सकल विद्या के आचार्य है। पंचवटी का अर्थ है पांच प्राण, परमात्मा पांच प्राणों में विराजमान हैं। संसार वन में भटकने वाले को वासना रूपी शूर्पणखा मिल जाती है किन्तु राम तो उस ओर देखते ही नही।
महात्मा जी ने कहा कि किसी उलझन के समय जीव से परामर्श करना अच्छा है किन्तु ईश्वर से परामर्श तो अति उत्तम है। श्रीराम के तप से भरत का त्याग कम नहीं है। उनका प्रेम तो ऐसा प्रबल है कि जड़ पादुका भी चेतन हो गयी। जनम-जनम मुनि जतन कराही। अन्त राम कहि आवत नाहीं।। साधारण मनुष्य और परमात्मा में यही अन्तर है कि परमात्मा जिसे मारते हैं उसे तारते भी हैं। श्रीराम अति सहज है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। वे शरणागत की रक्षा करते हैं। रावण के अत्याचारों से त्रस्त होकर विभीषण जब श्रीराम के शरण में आये तो उन्होने विभीषण को गले लगा लिया ।
यज्ञाचार्य प्रभात शास्त्री, नीरज शास्त्री, आशुतोष दास, ने मंदिर शिखर स्नान कराकर श्री गणेश, भगवान शिव, पार्वती, कार्तिकेय, और जगत जननी आदि शक्ति की मूर्ति गर्भ गृह में विधि विधान से प्रतिष्ठित कराया।
ब्रम्हलीन बाबा महादेव दास की स्मृति में आयोजित 9 दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से प्रभात शास्त्री, आशुतोष दास, आदित्यदास, नीरज दास, ऋतिक दास, ओम नरायन, संगम शुक्ल, मुख्य यजमानगण दयाशंकर, राजकुमारी, नागेन्द्र मिश्र , राम सोहरत, शान्ती देवी, कौशल कुमार, कुसुम, सुनील पाण्डेय, मीरा देवी, सुल्ताना बाबा, सरोज मिश्र के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे।


















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