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कराहल-लड़कियों और सुहागिनों का पर्व, गणगौर तीज आज:निर्जल व्रत के साथ होती है पूजा, मिट्टी से बनाते हैं गण-गौर यानी शिव और पार्वती

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लड़कियों और सुहागिनों का पर्व,
गणगौर तीज आज:निर्जल व्रत के
साथ होती है पूजा, मिट्टी से बनाते हैं
गण-गौर यानी शिव और पार्वती

अमित शर्मा

कराहल में आज गणगौर पर्व बड़ी धूम धाम से मनाया गया। चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन शिव-पार्वती की पूजा और व्रत होता है। इसमें लड़कियां और शादीशुदा महिलाएं मिट्टी के शिव यानी गण और देवी पार्वती यानी गौर बनाती हैं।

फिर उनकी पूजा करती हैं।सुहागन पति की लंबी उम्र के लिए और लड़कियां अच्छे पति की कामना से करती हैं व्रत लड़कियां और शादीशुदा महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। माना जाता है कि सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए और लड़कियां अच्छा पति पाने की कामना से ये व्रत करती हैं।शादीशुदा औरतें सौलह श्रंगार कर के ये व्रत और पूजा करती हैं। वहीं, लड़कियां भी पूरी तरह सजकर पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक माना जाता है गौरा यानी देवी पार्वती ने भी शिवजी के लिए ये व्रत किया था।इसके बाद ही उन्हें पति रूप में शिवजी मिले।पुराणों में भी है इस व्रत का जिक्र
भविष्य, मत्स्य, पद्म और अग्नि पुराण के मुताबिक चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि को त्रेलोक्य सुंदरी देवी ललिता का विवाह शिवजी के साथ हुआ था। देवी ललिता पार्वती का ही रूप है। शिवजी के साथ विवाह कर देवी ललिता ने अखंड सौभाग्य पा लिया था। इसी कारण इस दिन लड़कियां और सुहागन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा के साथ व्रत करती हैं।शिव-पार्वती की विशेष पूजा
देवी पार्वती के साथ ही इस दिन शिवजी की भी विशेष पूजा होती है। ऐसा करने से पति की उम्र बढ़ती है और हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन भगवान शिव को शुद्ध जल, ताजा दूध, पंचामृत, चंदन, भांग, बिल्वपत्र, मदार के फूल और गन्ने का रस चढ़ाया जाता है।गणगौर पर देवी पार्वती की भी विशेष पूजा करने का विधान है। तीज यानी तृतीया तिथि की स्वामी गौरी हैं, इसलिए देवी पार्वती की पूजा 16 श्रंगार से करनी चाहिए। कुमकुम, हल्दी और मेहंदी खासतौर से चढ़ानी चाहिए। सुगंधित चीजें भी अर्पित करें।

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