*थाना रायपुर द्वारा IGRS निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही,जांच अधिकारी पर उठे रहे सवाल*
*संदर्भ संख्या किसी और का आख्या लगाई कही और का,जांच अधिकारी का गैर जिम्मेदाराना रवैया*
*बैनी सोनभद्र*

सोनभद्र रायपुर थाना द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायतों के निस्तारण में बड़ी लापरवाही बरतने का मामला प्रकाश में आया है।
जानकारी के अनुसार रायपुर थाना क्षेत्र के सिकरवार गांव की एक महिला ने माफियाओं दबंगों द्वारा उत्पीड़न के विरुद्ध मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कर गुहार लगाई थी शिकायत का संदर्भ संख्या 40020025016788 था जिसकी जांच रायपुर थाने के उपनिरीक्षक सूबेदार यादव को मिली उन्होंने ने अपने जांच में जो आख्या लगाई वो बिल्कुल चौकाने वाला था शिकायतकर्ता महिला का नाम सही संदर्भ संख्या भी सही लेकिन जो आख्या रिपोर्ट लगी वो सोहदवल गांव के किसी दूसरे मामले की जिसमे मोबाइल चोरी से संबंधित प्रकरण की रिपोर्ट है।
उसी महिला पार्वती देवी ने दूसरी शिकायत भी मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराई थी जिसका संदर्भ संख्या 40020025016789 था जिसमे महिला ने विपक्षियों पर गाली गुप्ता देने व मार पिट करने का आरोप लगाया था जिसमे जांच मिली क्षेत्राधिकारी सदर राज सोनकर को इन्होंने थाना रायपुर के उपनिरीक्षक सूबेदार यादव को जांच अधिकारी नामित कर जांच आख्या प्रेषित करने का आदेश दिया जिसमे जांच अधिकारी द्वारा जो आख्या लगाई गई उसमे भी बहुत कुछ समझ से परे है। जांच आख्या में लिखा गया है की महिला द्वारा लगाए गए सारे आरोप निराधार है कोई मार पिट नहीं हुई है न तो कोई मोबाइल फोड़ी गई है, आख्या में जिन दो पड़ोसियों के बयान नाम लिखे गए है वो साबित कर रहे हैं कि आख्या पूरी तरह से झूठी है।जिन पड़ोसियों के नाम है उनमें एक रोहित यादव जो ग्राम पंचायत सिकरवार का रोजगार सेवक है निवासी निपनिया जो सिकरवार से एक किमी दूरी पर है दूसरे का भी घर पीड़ित के घर से पांच सौ मीटर की दूरी पर है। तो इस प्रकार से मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायतों के निस्तारण का मजाक बना रही है रायपुर थाना की पुलिस मुख्यमंत्री के जीरो टार्लंस की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
जब किसी पीड़ित को थाने चौकी या जिले से न्याय नहीं मिलता है तब वो मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाता है लेकिन जांच अधिकारियों द्वारा लीपापोती कर मामले का इतिश्री कर लिया जाता है जिससे पीड़ित थक हार कर डर के शाए में जीने को मजबूर होते है।
ऐसे में पीड़ित महिला का कहना है की न्याय नहीं मिला और जांच अधिकारी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो हम अपने पूरे परिवार के साथ मुख्यमंत्री दरबार में जाने को बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी स्थानीय शासन प्रशासन की होगी।















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