वीर बाल दिवस: साहिबजादों का अमर बलिदान और आज की युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्रभक्ति का पाठ
लेखिका -मोनिका गुप्ता ब्यूरो चीफ नोएडा

26 दिसंबर का दिन भारत के इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि वीरता, तप और अटूट सिद्धांतों का प्रतीक है। आज पूरा देश ‘वीर बाल दिवस’ मना रहा है। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों—बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। विशेषकर छोटे साहिबजादों की शहादत दुनिया के इतिहास की सबसे हृदयविदारक और प्रेरणादायी घटनाओं में से एक है।
त्याग और बलिदान की गाथा: क्यों और कैसे?
यह कहानी 1704 की है, जब आनंदपुर साहिब को मुगलों और पहाड़ी राजाओं की सेना ने घेर लिया था। गुरु गोबिंद सिंह जी ने किला छोड़ा, जिसके बाद ‘सरसा’ नदी के तट पर परिवार बिछड़ गया। छोटे साहिबजादे, बाबा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह (7 वर्ष) अपनी दादी माता गुजरी जी के साथ अलग हो गए।
गंगू नामक रसोइए के विश्वासघात के कारण उन्हें सरहिंद के नवाब वज़ीर खान की कचहरी में पेश किया गया। वज़ीर खान ने उन्हें इस्लाम कबूल करने के बदले धन, दौलत और सुरक्षित जीवन का लालच दिया। लेकिन उन नन्हे शेरों ने बड़ी निडरता से कहा:
> “हम उस गुरु के बेटे हैं जिसने कभी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया।”
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क्रोधित होकर वज़ीर खान ने उन्हें जीवित दीवार में चिनवाने का आदेश दिया। दीवार चुनी जाती रही, लेकिन बच्चों ने अपना धर्म और साहस नहीं छोड़ा। अंततः, उन्होंने हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी, पर झुकना स्वीकार नहीं किया।
आज के बच्चों में देशभक्ति: एक नया दृष्टिकोण
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या डिजिटल युग के बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े हैं? आज ‘वीर बाल दिवस’ हमें उत्तर देता है कि देशभक्ति केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। आज के बच्चों के लिए देशभक्ति का अर्थ है:
* सत्य के साथ खड़े रहना: साहिबजादों की तरह ही, आज के युवाओं को झूठ और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।
* मानसिक दृढ़ता: जिस तरह साहिबजादे डरे नहीं, आज के छात्र परीक्षाओं और जीवन की चुनौतियों में वही मानसिक मजबूती दिखा सकते हैं।
* संस्कृति का गौरव: अपनी विरासत को जानना और उस पर गर्व करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

वीर बाल दिवस आज की ‘जेन-जी’ (Gen Z) के लिए एक बड़ा सबक है। यह सिखाता है कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। आज के युवा स्टार्टअप्स, तकनीक और समाज सेवा के माध्यम से देश की सेवा कर रहे हैं। यदि बच्चों को साहिबजादों के बलिदान की सही जानकारी दी जाए, तो उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव और गहरा होगा।
निष्कर्ष:
मोनिका गुप्ता के अनुसार, साहिबजादों का बलिदान हमें सिखाता है कि “सिर कटा सकते हैं, लेकिन सिर झुका सकते नहीं।” आज की पीढ़ी को केवल किताबों से नहीं, बल्कि ऐसे महान चरित्रों के जीवन से जोड़ने की आवश्यकता है ताकि भारत का भविष्य नैतिक और शक्तिशाली बन सके।















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