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सोनभद्र -‘ठाकुर प्रसाद सिंह स्मृति साहित्य सम्मान–2025’सोनभद्र की धरती पर साहित्य का उज्ज्वल उत्सव— भोलानाथ मिश्र

‘ठाकुर प्रसाद सिंह स्मृति साहित्य सम्मान–2025’सोनभद्र की धरती पर साहित्य का उज्ज्वल उत्सव— भोलानाथ मिश्र

 

सोनभद्र ब्यूरो रिपोर्ट – संतेश्वर सिंह

माँ शारदा शिक्षा एवं सेवा ट्रस्ट, रॉबर्ट्सगंज, सोनभद्र द्वारा संचालित विंध्य कन्या पीजी कॉलेज ने एक बार पुनः साहित्य-ज्योति का दीप प्रज्वलित किया। साहित्य-मर्मज्ञों के प्रति सम्मान की जिस पवित्र परम्परा की शुरुआत ट्रस्टी डॉ. अजय सिंह, संरक्षक डॉ. वी. सिंह और प्राचार्या डॉ. अंजली विक्रम सिंह ने वर्षों पूर्व की थी, वह आज भी उसी गरिमा और सौम्यता के साथ आगे बढ़ रही है।

 

इस क्रम में इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्रसाद सिंह स्मृति साहित्य सम्मान–2025’ सुप्रसिद्ध साहित्यकार यतीन्द्र मिश्र को समर्पित किया गया—वे सृजनपुरुष, जिनकी लेखनी में संगीत की मधुर गूंज, कला की उज्ज्वल आभा और भाषा की कोमल लय एक साथ स्पंदित होती है। उनका रचनात्मक संसार न केवल शब्दों का सौंदर्य रचता है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना की धड़कन भी बन जाता है।

 

सम्मान समारोह की सराहना करने वालों में देश के प्रतिष्ठित साहित्य-पुरुष सम्मिलित रहे—

‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक डॉ. रविनंदन सिंह,

नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के प्रधानमंत्री शकुंतलानंदन श्री व्योमेश शुक्ल,

प्रख्यात लेखक डॉ. उमेश प्रसाद सिंह

तथा अनेक साहित्य-रसिक, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को गरिमामय बना दिया।

 

समारोह के साक्षी

 

इस उत्सव की पवित्र वेला में जिन सुधीजन ने अपनी उपस्थिति से साहित्य-साधना को प्रसन्न किया, उनमें—

श्री नागेश्वर सिंह, प्रबंधक, घनश्याम पीजी कॉलेज, वाराणसी, पारसनाथ मिश्र, जगदीश पंथी ,नरेंद्र नीरव

दीपक कुमार केसरीवानी , नरेंद्र नीरव , भैया लाल सिंह , मेघ विजय गढ़ी, विनोद जालान , चित्रा जालान

तथा सैकड़ों साहित्य प्रेमी सम्मिलित रहे, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से यह प्रमाणित कर दिया कि साहित्य आज भी जन-मन का स्पंदन है।

 

धरोहर का निरंतर प्रवाह

 

‘ठाकुर प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान’ केवल एक औपचारिकता नहीं—यह उन मूल्यों का उत्सव है जिनसे हिंदी साहित्य की आत्मा उज्ज्वल होती है। यह सम्मान हर वर्ष एक नए साहित्यकार में उस ज्योति को खोजता है, जो शब्दों को साधकर समय को आलोकित करती है। इस वर्ष यह दीप यतीन्द्र मिश्र के हाथों में सौंपा गया—और पूरा विंध्यांचल उनके सृजन की सुगंध से अनुप्राणित हो उठा।

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