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सेंट जॉर्जेस कॉलेज के स्थापना के 150 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देती छात्राएं।

सेंट जॉर्जेस कॉलेज के स्थापना के 150 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देती छात्राएं।

रिपोर्टर सोनू आगरा

संघर्षों और सफलताओं के सफर को जीवंत किया

सेन्ट जॉर्जेस कॉलेज ने अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय स्मरणीय और भव्य उत्सव आयोजित किया। शनिवार को सम्पन्न हुए सेस्क्विसेंटेनियल समारोह ने सिर्फ एक संस्था की उम्र का जश्न नहीं मनाया, बल्कि पीढ़ियों के सपनों, संघर्षों और सफलताओं के सफर को जीवंत कर दिया।

बालूगंज स्थित कॉलेज परिसर में समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन

से हुआ। मुख्य अतिथि बी. के. नायक (बिशप, आगरा डायसिस), प्रबंधक अश्विन ए. प्लूमर, डायसिस सचिव डॉ. अविनाश चंद, पूर्व प्रधानाचार्य जे.एस. जरमाया, के.ई. जरमाया, द रेवरेंड हेरल्ड अविताभ, स्टीफन डिकोस्टा और रिचर्ड एलिस ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। छात्र-छात्राओं ने नाटकीय प्रस्तुति और गीतों के माध्यम से कॉलेज के 150 वर्षों के इतिहास को जीवंत किया। बाइबिल गीत ‘बाय द रिवर्स ऑफ

बेबीलोन’, हिंदी नाटक ‘फॉल ऑफ प्राउड’ और ‘यादों का सफर’ ने दर्शकों का मन मोह लिया और कॉलेज की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाया। उत्सव का सबसे भावपूर्णक्षण था ‘जॉर्जियन’ परिवार का पुनर्मिलन। 1963 से 2025 तक के पूर्व छात्र, जिनमें ब्रिगेडियर विजय मेहता, डॉ. शोभा शर्मा व निखिल चिनप्पा शामिल थे, अपने पुराने स्कूल परिसर में लौटकर भावविभोर हो उठे। 58 वर्ष बाद कॉलेज की देहरी पर कदम रखते

ही कई पूर्व छात्रों की आंखें नम हो गईं।

समापन पर प्रधानाचार्य अक्षय जरमाया ने कहा कि गौरवशाली इतिहास हमारी अक्षय धरोहर है, वर्तमान हमारी शक्ति का प्रतीक है और भविष्य अनंत ऊंचाइयों की ओर अग्रसर रहेगा। कहा कि कॉलेज का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र, संवेदना व सामाजिक जिम्मेदारी से युक्त नागरिक तैयार करना है। 150वां वर्ष परंपरा वर भविष्य का संगम साबित हुआ।

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