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फ्लाई ऐश से फैल रहा जहर: वृंदावन तालाब, मामौन और मड़खेरा क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा।

फ्लाई ऐश से फैल रहा जहर: वृंदावन तालाब, मामौन और मड़खेरा क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा।

बीमार हो रहे जानवर और रहवासी।
टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार


टीकमगढ़। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्थित बजाज पॉवर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश का निष्पादन टीकमगढ़ में धडल्ले से किया जा रहा है। इस अनुचित काम से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। पूर्व में वृंदावन तालाब की ऊपरी हिस्से की जमीन पर फ्लाई ऐश डाली गई, लेकिन इसे नियमानुसार गड्ढे में दबाया नहीं गया। यहां एसओपी यानी स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन नहीं किया गया। इस नियम के तहत 15 से लेकर 20 फिट गहरा गड्ढा खोदकर उसके नीचे ऐश को दवा दिया जाना था ,लेकिन बाबजूद इसके उक्त जगहों पर जमीन के ऊपर ही हजारों डंफर राख उड़ेल दी गई।
स्थानीय निवासी राम सेवक यादव ने बताया कि फ्लाई ऐश का गंदा पानी तालाब में जा रहा है, जिससे तालाब का पानी प्रदूषित हो गया है। यही दूषित पानी पशुओं द्वारा पीने से कई जानवर बीमार पड़ गए हैं। उन्होंने ने बताया कि तालाब का पानी अब खेती के लिए भी अनुपयोगी होता जा रहा है। वही जलीय जीव जैसे मछलियों को भारी नुकसान हुआ है।
इसी तरह की स्थिति ग्राम पंचायत मामौन क्षेत्र और जतारा जनपद की मड़खेरा में भी देखी जा रही है, जहां फ्लाई ऐश का निस्तारण बिना किसी सुरक्षा मानक के किया गया है। वहां भी फ्लाई ऐश का पानी खुले में बहकर आसपास के खेतों और जल स्रोतों में मिल रहा है, जिससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश में सीसा, आर्सेनिक और कैडमियम जैसी भारी धातुएं पाई जाती हैं। ये तत्व मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता में कमी आती है, फसलों की पैदावार घटती है और भूमिगत जल भी दूषित होता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि फ्लाई ऐश डालने वाली इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि अगर समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो क्षेत्र की भूमि और जल दोनों स्थायी रूप से दूषित हो सकते हैं। ग्राम पंचायत मड़खेरा के ग्राम सेमरखेरा और चांदोखा में जगह -जगह राखड़ डाली गई है, जिसे खुला छोड़ दिया गया है, जिसकी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वारा जांच की गई, जिसे केवल दिखावा कर सही बता दिया गया है, जबकि नियमो को ताक पर रखकर राखड़ डाली गई है, जिससे जनमानस को खास प्रभाव पड़ रहा है। जिसकी आज एक दर्जन ग्रामीणों ने कलेक्टर के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और इसे तत्काल बन्द कर यह जहरीला कचरा बापिस उठाने की मांग की है।
फिर शुरू कर दी पुराई


बानपुर मार्ग स्थित मुक्तिधाम के समीप एक किसान के खेत को पॉवर प्लांट से निकली राख से पुराई का काम शुरू हो गया है। यहां बड़े हरे भरे पेड़ो को जेसीबी मशीन की मदद से उखाड़ फेंका है। सत्ताशीन पार्टी से जुड़े लोग अपने ही क्षेत्र के बाजूद को मिटाने में जुटे है। इनका लक्ष्य केवल और केवल धन कमाना है। ऐश से ओवर लोड भरे डंफर सड़कों पर दौड़ रहे है, लेकिन मज़ाल है कि पुलिस, खनिज और परिवहन विभाग के अधिकारी इन्हें रोक सके।

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केंद्रीय मंत्री लिखा क्यों लिखा था समर्थन में पत्र
24 अप्रैल 2025 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने पत्र लिखकर ललितपुर पॉवर जेनेरेशन कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिए थे कि पावर प्लांट से निकलने वाली राख का उपयोग टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले में भूमि सुधार के लिए किया जाए।पत्र में कहा गया था कि राख का उपयोग उबड़-खाबड़ जमीन, गड्ढ़ों और खानों को भरने के लिए किया जा सकता है। इसके ऊपर मिट्टी की परत डालकर भूमि को समतल किया जाएगा, जिसे सार्वजनिक उपयोग या भवन निर्माण के लिए तैयार किया जा सकेगा।मंत्री ने जिला प्रशासन से सैद्धांतिक अनुमति लेकर चयनित स्थानों पर राख डालवाने और इस प्रक्रिया में सहयोग करने का भी अनुरोध किया था।

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विभागों ने भी दे दी मौन स्वीकृति

इस मामले में सबसे रोचक बात यह रही कि पशुपालन, स्वास्थ, कृषि, दुग्ध संघ सहित मत्स्य विभाग ने एक प्रकार से एनओसी जारी कर पत्र जारी कर बता दिया कि ललितपुर पावर जनरेशन बजाज इनर्जी द्वारा निकाली राख का उपयोग मड़खेरा, सेमरखेरा, मामौन और टीकमगढ़ किले के निचले इलाकों को भरकर समतल करने में किया जा रहा है।
इस प्रक्रिया से कृषि, पालतू पशु और ग्रामीण स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं हुआ है।
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टीकमगढ़ विधायक ने स्वीकृति नही देने लिखा था पत्र।
टीकमगढ़ विधानसभा से विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने 18 दिसम्बर 2024 को कलेक्टर को एक पत्र लिखकर अवगत कराया था कि उत्तरप्रदेश के पावर प्लांट से निकली राखड़ को टीकमगढ़ जिले की सीमा में नही डालने जाना चाहिए, क्योंकि इससे जनमानस और मवेशियों सहित फसलों पर खासा प्रभाव पड़ेगा, लेकिन इसके बाबजूद भी अधिकारियों ने जगह-जगह फ्लाई ऐश करने की अनुमति दे दी।

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