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भीषण सड़क हादसे में तीन जवान जिंदगियाँ बुझ गईं — बांगरमऊ की सड़कों पर पसरा मातम

सत्यार्थ न्यूज वरिष्ठ पत्रकार हरिकृष्ण शुक्ल उन्नाव उत्तर प्रदेश

भीषण सड़क हादसे में तीन जवान जिंदगियाँ बुझ गईं — बांगरमऊ की सड़कों पर पसरा मातम

हर तरफ सन्नाटा… जलते हुए ट्रकों के बीच जलती रहीं इंसानी साँसें…

उन्नाव (बांगरमऊ), बुधवार तड़के:
यह वो सुबह थी, जो उजाला नहीं, एक गहरी कालिख लेकर आई।
बांगरमऊ कस्बे के पास मरी कंपनी मोड़ पर, बुधवार तड़के करीब 3 बजे ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर देखने वाले की रूह तक हिला दी। हरदोई-उन्नाव मार्ग पर डीसीएम और डंपर की आमने-सामने टक्कर में तीन लोगों की ज़िंदगी पल भर में जलकर राख हो गई।

टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि दोनों भारी वाहन एक-दूसरे में समा गए और अगले ही पल आग का ऐसा गोला बने कि सब कुछ ख़ाक हो गया।
डीसीएम चालक महिपाल, डंपर चालक पवन यादव, और उसका परिचालक सुमित— तीनों की ज़िंदगियाँ वहीं थम गईं।

जब लोग सो रहे थे, तब सड़क पर आग की लपटों में तीन परिवारों की दुनिया उजड़ रही थी। और कोई कुछ नहीं कर पाया…

केवल सोनू, जो डीसीएम में बतौर परिचालक सवार था, किसी तरह कूदकर अपनी जान बचा पाया। लेकिन उसका शरीर घायल था, पैर बुरी तरह से टूट चुके थे, और हाथ में थमा मोबाइल — जो शायद आखिरी बार किसी को कुछ बताने की कोशिश कर रहा था — जलकर खाक हो चुका था। सोनू को बांगरमऊ अस्पताल से रेफर किया गया है।

डीसीएम में लदा था केमिकल, और इसका सफर मुजफ्फरनगर से कानपुर की ओर था। जैसे ही गाड़ी गंजमुरादाबाद के पास पहुंची, सामने से आ रहे डंपर से सीधी भिड़ंत हो गई।
आग ने पल भर में सब कुछ निगल लिया।
घटनास्थल पर सिर्फ चीखें थीं, जले हुए टायरों की गंध थी, और राख में तब्दील हो चुके केबिन।

दमकल विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी। शव इस कदर जल चुके थे कि पहचान करना मुश्किल हो गया। बड़ी मशक्कत के बाद परिवारों को सूचना दी गई।

बांगरमऊ कोतवाल चंद्रकांत सिंह ने बताया कि हादसे के बाद तीन घंटे तक यातायात ठप रहा।
रास्ते में फंसे सैकड़ों वाहन, जलते ट्रक के मंजर से सहमे लोग, और एक अनकही पीड़ा पूरे वातावरण में तैर रही थी।

तीन परिवारों का सूरज एक ही सुबह बुझ गया…आज उन घरों में रोटियाँ नहीं पकेंगी…
सिर्फ राख, आंसू और सिसकियाँ होंगी।

माँ की ममता बेटे की राख को निहार रही होगी।
बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा।
ना वो मुस्कान, ना वो आवाज़…
केवल एक सवाल छोड़ गया —
“क्या ये मौत टाली जा सकती थी?”

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