मुनिश्री का धर्मोपदेश: धन की सार्थकता
गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी

मुनिश्री योग सागरजी महाराज ने महावीर भवन में धर्मोपदेश देते हुए कहा कि आज का मानव पेट नहीं, पेटी भरने में लगा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी संपत्ति का उपयोग धर्म और धार्मिक कार्यों में करना चाहिए।
धन की तीन गतियां
मुनिश्री ने बताया कि धन की तीन गतियां होती हैं:
– दान: धन का उपयोग दूसरों की मदद करने में करना चाहिए।
– भोग: धन का उपयोग अपने लिए करना चाहिए।
– नाश: धन का उपयोग न करने से वह नष्ट हो जाता है।
जीवन का उद्देश्य
मुनिश्री ने कहा कि जीवन का उद्देश्य सिर्फ धन अर्जन करना नहीं है, बल्कि धर्म और धार्मिक कार्यों में भी समय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति चौबीस घंटे धन अर्जन में लगाता है और धर्म और धार्मिक कार्यों में पैसा खर्च नहीं करता है, वह तो बैंक के कैशियर और मुनीम की तरह होता है।
दान की महिमा
मुनिश्री ने दान की महिमा बताते हुए कहा कि दान चार प्रकार के होते हैं:
– आहार दान: भोजन दान करना।
– ज्ञानदान: ज्ञान प्रदान करना।
– औषधि दान: औषधि दान करना।
– अभयदान: दूसरों को अभय प्रदान करना।
निष्कर्ष
मुनिश्री ने लोगों को अपनी धन संपदा को धार्मिक कार्यों में लगाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी पुण्य की दासी है और देव, शास्त्र, गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति समर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
















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