उत्कृष्ट समाधि धारक 108 विराग सागर जी मुनिराज का मनाया स्मृति /समाधि दिवस
टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार

टीकमगढ़ समस्त दिगंबर जैन समाज द्वारा
* उत्कृष्ट समाधि धारक गणाचार्य 108 आचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज का प्रथम स्मृति समाधि दिवस
परम पूज्य
मुनि श्री 108 सौम्य सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 जैयन्त सागर जी महाराज के सानिध्य में
दिनांक 4.7.25 प्रातः 8:00 बजे से 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर जी में मनाया गया है
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया की प्रातः 8:00 बजे से श्री जी का अभिषेक शांति धारा पूजन/ विधान के पश्चात चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन शास्त्र , भेंट किए गए

और इसी संदर्भ में महाराज श्री 108 जयंत सागर ने प्रवचन , में कहा आओ मिलकर करें भावना श्रेष्ठ समाधि श्रेष्ठ साधन, जिन्होंने जागृत होकर जीवन जिया वही जैन साधु कहलाए हमें अपना जीवन श्रेष्ठ समाधि और श्रेष्ठ साधन की ओर लगाना है उन्होंने कहा की आचार्य विराग सागर संसार छोड़कर गए हम सभी उनके संस्कार नहीं भूले सोते-सोते जो जागृत जीवन जीते थे उनका नाम विराग सागर था
और इसके बाद

मुनि 108 सौम्य सागर जी के प्रवचन हुए उन्होंने अपने प्रवचन में कहा की आचार्य विराग सागर जी वह बैरागी थे जो पिछले जन्म से भी मुनि बनते आए हैं वह ऐसे आचार्य थे जो अपने शिष्यों की वैयावृत्ति स्वयं कर देते थे हम सब भगवान महावीर के शिष्य रहे l जिसकी दृष्टि बड़ी होती है उसका जीवन बड़ा होता है अपनी समबुद्धि कर ली वही समाधि कर सकता है
नरेंद्र जनता ने बताया इस धर्म सभा में सभी जैन मंदिर के पदाधिकारी गण एवं महिला वर्ग ब्रह्मचारी भाई सभी ने पूजन के अर्घ चढ़ाये

















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