सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्यूरो चीफ
सरदारशहर में जम्मड़ों के कुए के निकट सम्पतमल कमलकुमार जांगिड़ परिवार द्वारा आयोजित अष्ठ दिवसीय श्रीमदभागवत कथा के सप्तम दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह तक की कथा सुनाई गई। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह को फूलडोल उत्सव के रूप में यहां धूमधाम से मनाया गया। प्रवचन करते हुए सर्वेश्वर सेवा संस्थान, गिरिराज के महंत एवं निम्बार्क स्वभूराम पीठ के जगदगुरु राधा मोहन शरण महाराज ने कहा कि कृष्ण कथा मन में अटूट भगवद् प्रेम जगाती है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की सभी ब्रज लीलाएं प्रेम से आप्लावित हैं। नारदजी से जब उत्कट प्रेम का पर्याय पूछा तो उन्होनें ब्रज की गोपिकाओं का उदाहरण दिया, उन्हें दूसरा उदाहरण नहीं सूझा आपने कहा कि रास पंचाध्यायी और वेणुवादन की लीला को चलते चलाते में नहीं समझा जा सकता। जब तक भीतर में भगवत्ता न हो यह एक सामान्य प्रसंग प्रतीत होता है, पर रास-पंचाध्यायी के प्रथम ही श्लोक में गोपियां कृष्ण को कहती हैं कि आप हमारे प्राण हो। ब्रज की महिमा आपके कारण बैकुंठ से अधिक हो गई है। गोपियां भगवान के लिए कुछ भी न्यौछावर कर सकती हैं। इसलिए वे महान भक्त हैं। कथा में शहर के सुधि श्रोताओं की भारी उपस्थिति रही। सहृदयजनों ने सर्वेश्वर सेवा संस्थान, गिरिराज में साधुओं को एक रोटी रोज सेवा तथा गौ सेवा और अन्यान्य प्रकल्पों हेतु धन दान भी किया। भागवत कथा का समापन बुधवार को होगा।



















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