पुराने जल स्रोतों को संरक्षित करना सबसे बड़ी जन सेवा.. विजय यादव एसडीएम
पत्रकार मंगल सिंह कुशवाह

प्रकृति के प्रति अपने मानवीय धर्म को निभाईये भविष्य बचाईए: जिला समन्वयक
लहार..जल ही जीवन है और आज जल के सबसे बड़े दुश्मन के रूप में मानव ही सामने आ रहा है पानी की बर्बादी यदि नहीं रोकी तो भविष्य में बड़ा संकट खड़ा होगा। इसलिए आज से ही पुराने जल स्रोतों को संरक्षित करना होगा। शासन का जल गंगा संवर्धन अभियान महत्वपूर्ण अभियान है जिसमें जन अभियान परिषद की यह पहल स्तुतिय है। परिषद इस ओर जन जागरूकता का कार्य करे और पुराने जल स्रोतों को संरक्षित करने में सहयोग करे, विश्व पर्यावरण दिवस की तभी सही मायने में सार्थकता होगी। जल गंगा संवर्धन अभियान
लोक उत्सव का रूप ले रहा इसी के तहत हम लहार के ग्राम अमहा में बावड़ी उत्सव मना रहे हैं। उक्त बात अनुविभागीय अधिकारी लहार विजय यादव ने कही वे म.प्र. जन अभियान परिषद के “बावड़ी उत्सव” कार्यकम में बोल रहे थे। इस अवसर पर ग्राम सरपंच श्रीमती शिल्पी परिहार, जिला समन्वयक डॉ शिव प्रताप सिंह भदोरिया विकासखंड समन्वयक सुनील कुमार चतुर्वेदी, अमहा ग्राम सचिव अशोक पाराशर,
सहायक सचिव श्रीमती विनीता कौरव, मंदिर पुजारी हलधर शर्मा, समाजसेवी रणवीर सिंह कौरव,नरेन्द्र सिंह कौरव,सतपाल सिंह परिहार, रामकिशोर कौरव, रविंद्र मिश्रा,शैलेंद्र पचौरी, रमेशपाल,मान सिंह परमार, रामबाबू पचौरी, नारायण दास फौजी, बीरन सिंह कौरव,गौरव, रामकुमार शर्मा, धर्मेन्द्र जादौन, उपमंत्री लहार हेमराज शर्मा सहित समस्त नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधि,मेंटर्स छात्र-छात्राएं, ग्रामवासी और अन्य समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार चतुर्वेदी ने किया और आभार प्रदर्शन सचिव अशोक पाराशर और रणवीर कौरव ने किया।
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लहार विकासखंड के ग्राम अमहा में बावड़ी उत्सव के अंतर्गत बावड़ी पूजन का कार्य
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वाबड़ी पूजन का कार्य लहार एसडीएम विजय यादव के कर कमलों से किया गया। बावड़ी का इतिहास मंदिर पुजारी हलधर शर्मा ने बताया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अनुविभागीय अधिकारी लहार विजय यादव ने कहा कि प्रकृति के प्रत्येक तत्व को हमें सुरक्षित करना है। चाहे वह कुआं हो, बावड़ी हो, तालाब हो, नदी हो, वृक्ष हो, हमारी पहली कोशिश यह होनी चाहिए कि पुराने जल स्रोतों जल संरचनाओं और वृक्षों को संरक्षित करें। कुछ नई संरचनाओं भी तैयार करें और वृहद वृक्षारोपण भी करें जिससे आने वाले समय में हम नई पीढ़ी को एक स्वस्थ वातावरण देकर जाएं। जिला समन्वयक डॉ शिवप्रताप सिंह भदोरिया ने कहा कि प्रकृति के संरक्षण में मनुष्य की महत्वपूर्ण भूमिका है अभी यह देखने में आ रहा है की प्रकृति के साथ मनुष्य समन्वय नहीं बिठा पा रहा है इसीलिए आए दिन बड़े-बड़े पेड़ काटे जा रहे हैं और पुराने जल स्रोत भी संरक्षित नहीं हो पा रहे हैं अतः जन अभियान परिषद के माध्यम से उक्त जन जागरूकता की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। आपसे अनुरोध है तीन प्रकार के कार्यों पर हम विशेष रूप से ध्यान दें। जल संरक्षण जिसमें पुराने जल स्रोतों का संरक्षण करें, वृक्षारोपण करें और फर्स्ट यूज़ पॉलिथीन का कम से कम उपयोग करें जिससे कि इस पर्यावरण में संतुलन बिठाया जा सके। कार्यक्रम का संचालन विकासखंड समन्वयक सुनील कुमार चतुर्वेदी ने आभार नवांकुर संस्था के रणवीर कौरव ने किया।

















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