सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता नरसीराम शर्मा
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त, चद्रोदय-चन्द्रास्त काल, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त योगकाल, करण, सूर्य-चंद्र के राशि, चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
🕉️आज का पंचांग- 30.03.2025🕉️
✴️ दैनिक गोचर राशिफल सहित✴️
🕉️ शुभ रविवार – 🌞 – शुभ प्रभात् 🕉️
74-30💥मध्यमान💥75-30
(केतकी चित्रापक्षीय गणितानुसारेण निर्मितम्)
___आज विशेष__
चैत्र नवरात्रि प्रारंभ – दुर्गा पूजा-पाठ की विधि
दिनांक 30.03.2025 से 6.04.2025 तक
नवरात्रि घट स्थापना मुहूर्त
(1) प्रातः 7.59 से अपराह्न 12.36 तक
(चंचल लाभ और अमृत वेला)
(2)मध्याह्न 12.11 से अपराह्न 1.01 तक
(अभिजित वेला में)

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__दैनिक पंचांग विवरण_
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आज दिनांक………………30.03.2025
कलियुग संवत्………………….5127
विक्रम संवत्………………….. 2082
शक संवत्…………………….1947
संवत्सर……………………श्री सिद्धार्थी
अयन…………………………उत्तर
गोल………… …………….उत्तर
ऋतु………………………. …बसंत
मास……………………….. . चैत्र
पक्ष………………………….शुक्ल
तिथि.. प्रतिपदा. अपरा. 12.50 तक/ द्वितीया
वार………………………….रविवार
नक्षत्र…….रेवती. अपरा. 4.35 तक / अश्विनी
चंद्रराशि……….मीन. अपरा. 4.35 तक / मेष
योग……………ऐंद्र. सायं. 5.53 तक / वैधृति
करण……………. बव. अपरा. 12.50 तक
करण…… बालव. रात्रि. 10.59 तक / कौलव
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नोट-जिस रात्रि समय के ऊपर(*) लगा हुआ हो वह समय अर्द्ध रात्रि के बाद सूर्योदय तक का है
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विभिन्न नगरों के सूर्योदय में समयांतर मिनट
दिल्ली -10 मिनट———जोधपुर +6 मिनट
जयपुर -5 मिनट——अहमदाबाद +8 मिनट
कोटा – 5 मिनट————-मुंबई +7 मिनट
लखनऊ – 25 मिनट——बीकानेर +5 मिनट
कोलकाता -54 मिनट–जैसलमेर +15 मिनट
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सूर्योंदयास्त दिनमानादि-अन्य आवश्यक सूची
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सूर्योदय……………… प्रातः 6.26.11 पर
सूर्यास्त……………… सायं. 6.45.50 पर
दिनमान-घं.मि.से……………12.19.39
रात्रिमान-घं.मि.से………….. 11.39.17
चंद्रोदय…………………6.57.59 AM पर
चंद्रास्त………………….7.56.41 PM पर
राहुकाल….सायं. 5.13 से 6.46 तक(अशुभ)
यमघंट..अपरा. 12.36 से 2.08 तक(अशुभ)
गुलिक……….अपरा. 3.41 से से 5.13 तक
अभिजित………. मध्या.12.11 से 1.01 तक
पंचक……………….अपरा. 4.35 पर समाप्त
हवन मुहूर्त……………………. आज है।
दिशा शूल…………………. पश्चिम दिशा
दोष परिहार……… घी का सेवन कर यात्रा करें
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🌄विशिष्ट काल-मुहूर्त-वेला परिचय🌄
अभिजित् मुहुर्त – दिनार्द्ध से एक घटी पहले और एक घटी बाद का समय अभिजित मुहूर्त कहलाता है,पर बुधवार को यह शुभ नहीं होता।
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ब्रह्म मुहूर्त – सूर्योदय से पहले का 1.30 घंटे का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है।
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प्रदोष काल – सूर्यास्त के पहले 45 मिनट और बाद का 45 मिनट प्रदोष माना जाता है।
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गौधूलिक काल -सूर्यास्त से 12 मिनट पहले एवं 12 मिनट बाद का समय कहलाता है
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✴️भद्रा वास शुभाशुभ विचार✴️
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भद्रा मेष, वृष, मिथुन, वृश्चिक के चंद्रमा में स्वर्ग में व कन्या, तुला, धनु, मकर के चंद्रमा में पाताल लोक में और कुंभ, मीन, कर्क, सिंह के चंद्रमा में मृत्युलोक में मानी जाती है यहां स्वर्ग और पाताल लोक की भद्रा शुभ मानी जाती हैं और मृत्युलोक की भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं इसी तरह भद्रा फल विचार करें
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दैनिक सूर्योदय कालीन लग्न एवं ग्रह स्पष्ट
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लग्न …….. मीन 14°42′ उत्तरभाद्रपद 4 ञ
सूर्य ……… मीन 15°22′ उत्तरभाद्रपद 4 ञ
चन्द्र ……………….मीन 23°36′ रेवती 3 च
बुध *^ ………मीन 5°51′ उत्तरभाद्रपद 1 दू
शुक्र * ……….मीन 4°19′ उत्तरभाद्रपद 1 दू
मंगल ………….मिथुन 28°47′ पुनर्वसु 3 हा
बृहस्पति ……… वृषभ 21°27′ रोहिणी 4 वु
शनि …………….मीन 0°8′ पूर्वभाद्रपद 4 दी
राहू * ………..मीन 2°42′ पूर्वभाद्रपद 4 दी
केतु * ….. कन्या 2°42′ उत्तर फाल्गुनी 2 टो
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✴️🌄दैनिक लग्न समय सारिणी 🌄✴️
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लग्न राशि ***********प्रारंभ – समाप्ति
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मीन ……………….. 06:26 – 07:12
मेष ………………… 07:12 – 08:50
वृषभ ……………… 08:50 – 10:47
मिथुन ………………..10:47 – 13:01
कर्क ……………….. .13:01 – 15:19
सिंह ……………….. 15:19 – 17:33
कन्या ………………. 17:33 – 19:46
तुला ……………….. 19:46 – 22:02
वृश्चिक ………………22:02 – 24:19*
धनु …………………24:19* – 26:24*
मकर ……………….26:24* – 28:09*
कुम्भ ……………….28:09* – 29:40*
मीन ………………..29:40* – 30:25*
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जहां समय के आगे (*) लगा है वह समय
अर्द्ध रात्रि उपरांत के समय का सूचक है।
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✴️🌄दिन का चौघड़िया🌄✴️
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चंचल…………….प्रातः 7.59 से 9.31 तक
लाभ……………प्रातः 9.31 से 11.04 तक
अमृत…………पूर्वा. 11.04 से 12.36 तक
शुभ…………..अपरा. 2.08 से 3.41 तक
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✴️🌄रात्रि का चौघड़िया🌄✴️
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शुभ………..सायं-रात्रि. 6.46 से 8.13 तक
अमृत……………रात्रि. 8.13 से 9.41 तक
चंचल…………..रात्रि. 9.41 से 11.08 तक
लाभ….रात्रि. 2.03 AM से 3.30 AM तक
शुभ…..रात्रि. 4.58 AM से 6.25 AM तक
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(विशेष – ज्योतिष शास्त्र में एक शुभ योग और एक अशुभ योग जब भी साथ साथ आते हैं तो शुभ योग की स्वीकार्यता मानी गई है )
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🌞🕉️शुभ शिववास की तिथियां🕉️🌞
शुक्ल पक्ष-2—–5—–6— 9—–12—-13
कृष्ण पक्ष-1—4—-5—-8—11—12—-30
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दिन नक्षत्र एवं चरणाक्षर संबंधी संपूर्ण विवरण
संदर्भ विशेष –यदि किसी बालक का जन्म गंड नक्षत्रों (रेवती,अश्विनी,अश्लेषा,मघा,ज्येष्ठा और मूल) में होता है तो सविधि नक्षत्र शांति की आवश्यक मानी गयी है और करवाना चाहिये।
आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण अनुसार राशिगत् नामाक्षर
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समय-नक्षत्र नाम-नक्षत्र चरण-चरणाक्षर
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11.17 AM तक—–रेवती—-3—–च
04.35 PM तक—–रेवती—-4—–ची
___राशि मीन – पाया स्वर्ण_
09.51 PM तक—अश्विनी —-1—–चू
03.08 AM तक—अश्विनी—-2—–चे उपरांत रात्रि तक—अश्विनी— 3—–चो
__राशि मष – पाया स्वर्ण__
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___आज का दिन___
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व्रत विशेष.चैत्र नवरात्रि व्रतारंभ(घट स्थापना)
अन्य व्रत…………………… नहीं है।
पर्व विशेष….. हिंदू नववर्ष प्रारंभ(गुडी पड़वा)
चैत्र नवरात्रि……… प्रथम् (मां शैलपुत्री पूजन)
दिन विशेष…….. चांद्र संवत्सर 2082 प्रारंभ
दिन विशेष……………… चंद्रदर्शन सायंकाल
दिन विशेष…………….. महर्षि गौतम जयंती
दिन विशेष… .चेटी चंड (श्री झूलेलाल जयंती)
दिन विशेष…………………ज्योतिष दिवस
दिन विशेष..नव संवत्सर (श्री सिद्धर्थी) प्रारंभ
दिन विशेष…….. ..विश्व शून्य अपशिष्ट दिवस
पंचक…………….. अपरा. 4.35 पर समाप्त
विष्टि(भद्रा)…………………आज नहीं है।
खगोल विशेष………………. आज नहीं है।
सर्वा.सि.योग………………. .आज नहीं है।
अमृ.सि.योग…………………आज नहीं है।
सिद्ध रवियोग…………………आज नहीं है।
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अगले दिन की प्रतीकात्मक जानकारी
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आज दिनांक……………….. .31.03.2025
तिथि…चैत्र शुक्ला द्वितीया सोमवार / 3(क्षय)
व्रत विशेष…………. चैत्र नवरात्रि व्रत जारी है
अन्य व्रत…………………. गणगौरी पूजन
पर्व विशेष………………. .श्री मत्स्य जयंती
चैत्र नवरात्रि..2–3 (ब्रह्मचारिणी-चंद्रघंटा पूजा)
दिन विशेष……………………. नहीं है।
पंचक…………………….. आज नहीं है।
विष्टि(भद्रा)…………………. आज नहीं है।
खगोल विशेष… रेवत्यां रवि. अपरा. 2.00 पर
खगोल विशेष.. पूभायां शुक्र. रात्रि. 4.47*पर
सर्वा.सि.योग………………..आज नहीं है।
अमृ.सि.योग………………… .आज नहीं है।
सिद्ध रवियोग…… अपरा. 1.45 से 2.00 तक
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✴️आज की विशेष प्रस्तुति✴️
💥धर्म ज्योतिष आध्यात्म वास्तु राशिफल 💥
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चैत्र नवरात्रि प्रारंभ – दुर्गा पूजा-पाठ की विधि
दिनांक 30.03.2025 से 6.04.2025 तक
नवरात्रि में दुर्गा पूजा-पाठ की यह विधि यहां संक्षिप्त रूप से दी जा रही है। नवरात्रि आदि विशेष अवसरों पर तथा शतचंडी आदि वृहद् अनुष्ठानों में विस्तृत विधि का उपयोग किया जाता है। उसमें यन्त्रस्थ कलश,गणेश,नवग्रह,मातृका वास्तु,सप्तर्षि,सप्तचिरंजीव,64 योगिनी,49 क्षेत्रपाल तथा अन्यान्य देवताओं की वैदिक विधि से पूजा होती है। अखंड दीप की व्यवस्था की जाती है। देवी प्रतिमा की अंग न्यास और अग्न्युत्तारण आदि विधि के साथ विधिवत् पूजा की जाती है। नवदुर्गा पूजा,ज्योतिःपूजा,बटुक-गणेशादिसहित कुमारी पूजा,अभिषेक,नान्दीश्राद्ध,रक्षाबंधन,पुण्याहवाचन,मंगलपाठ गुरुपूजा तीर्थावाहन,मंत्र-खान आदि,आसनशुद्धि,प्राणायाम भूतशुद्धि,प्राण-प्रतिष्ठा,अन्तर्मातृकान्यास बहिर्मातृकान्यास सृष्टिन्यास,स्थितिन्यास शक्तिकलान्यास,शिवकलान्यास हृदयादिन्यास षोडशान्यास,विलोम-न्यास,तत्त्वन्यास,अक्षरन्यास व्यापकन्यास,ध्यान,पीठपूजा,विशेषार्घ्य,क्षेत्रकीलन मन्त्र पूजा विविध मुद्रा विधि,आवरण पूजा एवं प्रधान पूजा आदि का शास्त्रीय पद्धति के अनुसार अनुष्ठान होता है। इस प्रकार विस्तृत विधि से पूजा करने की इच्छा वाले भक्तों को अन्यान्य पूजा पद्धतियों की सहायता से भगवती की आराधना करके पाठ आरंभ करना चाहिए। साधक स्नान करके पवित्र हो आसन-शुद्धि की क्रिया सम्पन्न करके शुद्ध आसन पर बैठे साथ में शुद्ध जल,पूजन-सामग्री और श्री दुर्गा सप्तशती की पुस्तक रखें। पुस्तक को अपने सामने काष्ठ आदि के शुद्ध आसन पर विराजमान कर दें। ललाट में अपनी रुचि के अनुसार भस्म,चंदन अथवा रोली लगा लें,शिखा बांध लें फिर पूर्वाभिमुख होकर तत्त्व-शुद्धि के लिए चार बार आचमन करें।
उस समय निम्नांकित चार मंत्रों को क्रमशः पढ़ें –
ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा ।
तत्पश्चात् प्राणायाम करके गणेश आदि देवताओं एवं गुरुजनों को प्रणाम करे, फिर ‘पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ’ इत्यादि मंत्र से कुश की पवित्री धारण करके हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर संकल्प करें। संकल्प करके देवी का ध्यान करते हुए पंचोपचार की विधि से पुस्तक की पूजा करें, योनि-मुद्रा का प्रदर्शन करके भगवती को प्रणाम करे, फिर मूल नवार्ण मंत्र से पीठ आदि में आधारशक्ति की स्थापना करके उसके ऊपर पुस्तक को विराजमान करें। इसके बाद शापोद्वार करना चाहिए। इसके अनेक प्रकार हैं। ‘ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा’ – इस मंत्र का आदि और अन्त में सात बार जप करे। यह शापोद्वारमन्त्र कहलाता है। इसके अनन्तर उत्कीलन-मंत्र का जप किया जाता है। इसका जप आदि और अन्त में इक्कीस-इक्कीस बार होता है। यह मन्त्र इस प्रकार है – ‘ॐ ह्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा।’ इसके जप के पश्चात् आदि और अन्त में सात-सात बार मृत-संजीवनी विद्या का जप करना चाहिए। इस प्रकार शापोद्धार करने के अनंतर अन्तर्मातृकाबहिर्मातृका आदि न्यास करें, फिर भगवती का ध्यान करके रहस्य में बताये अनुसार नौ कोष्ठों वाले यन्त्र में महालक्ष्मी आदि का पूजन करें, इसके बाद छः अंगो सहित दुर्गा सप्तशती का पाठ आरम्भ किया जाता है। कवच अर्गला कीलक और तीनों रहस्य – ये ही सप्तशती के छः अंग माने गए हैं। उनके क्रम में भी मतभेद है। चिदम्बर संहिता में पहले अर्गला,फिर कीलक तथा अन्त में कवच पढ़ने का विधान है। किंतु योगरत्नावली में पाठ का क्रम इससे भिन्न है। उसमें कवच को बीज, अर्गला को शक्ति तथा कीलक को कीलक-संज्ञा दी गई है। जिस प्रकार सब मन्त्रों में पहले बीज का,फिर शक्ति तथा अंत में कीलक का उच्चारण होता है। उसी प्रकार यहां भी पहले कवच रूप बीज का,फिर अर्गलारूपा शक्ति का तथा अंत में कीलक रूप कीलक का क्रमश: पाठ होना चाहिए।
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✴️ 🕉️आज का राशिफल🕉️ ✴️
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मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ)
आज आप नशे से दूर रहें, क्योंकि इससे आपकी नींद में खलल पड़ेगा और आप गहरे आराम से दूर रह सकते हैं। आज आप अपना धन धार्मिक कार्यों में लगा सकते हैं जिससे आपको मानसिक शांति मिलने की पूरी संभावना है। दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मौज-मस्ती करें। आपके लिए अपने प्रिय से दूर रहना बहुत मुश्किल होगा। किसी पार्क में घूमते समय आज आपकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जिससे अतीत में आपके मतभेद थे। अपने जीवनसाथी से बात करें और कुछ मस्तीभरी योजना बनाएँ। जब आपके पास ज़्यादा खाली समय हो, तो नकारात्मक विचार आपको ज़्यादा परेशान करते हैं। अतः सकारात्मक पुस्तकें पढ़ें, कोई मनोरंजक फ़िल्म देखें या मित्रों के साथ समय व्यतीत करें।
वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो)
आज रुपये-पैसे के हालात और उससे जुड़ी समस्याएँ तनाव का कारण साबित हो सकती हैं। वे निवेश-योजनाएँ जो आपको आकर्षित कर रहीं हैं, उनके बारे में गहराई से जानने की कोशिश करें- कोई भी क़दम उठाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर ले लें। दोस्त मददगार और सहयोगी रहेंगे। दूसरों की दख़लअन्दाज़ी गतिरोध पैदा कर सकती है। उन लोगों से मेलजोल बढ़ाने से बचें जिनके साथ आपका वक्त खराब होता है। आस-पड़ोस की किसी सुनी-सुनाई बात को लेकर आपका जीवनसाथी तिल-का-ताड़ बना सकता है। अपनी बातों को अहमियत दिलाने के लिए आज आप मनघडंत बातें बोल सकते हैं। मेरी आपको सलाह रहेगी कि ऐसा न करें।
मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह)
आज आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें, जो आध्यात्मिक जीवन के लिए आवश्यक है। मस्तिष्क जीवन का द्वार है, क्योंकि अच्छा-बुरा सब-कुछ इसी के माध्यम से आता है। यही ज़िंदगी की समस्याएँ दूर करने में सहायक सिद्ध होता है और सही सोच से इंसान को आलोकित करता है। ख़र्चों में वृद्धि होगी, लेकिन साथ ही आमदनी में हुई बढ़ोत्तरी इसको संतुलित कर देगी। दूसरों को प्रभावित करने की आपकी क्षमता आपको कई सकारात्मक चीज़ें दिलाएगी। जीवन की पेचीदिगियों को समझने के लिए आज घर के किसी वरिष्ठ शख्स के साथ आप वक्त गुजार सकते हैं। जिन्दगी का स्वाद तो स्वादिष्ट भोजन को करने में ही है। यह बात आज आपके जुबान पर आ सकती है क्योंकि आप के घर में आज स्वादिष्ट भोजन बन सकता है।
कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो)
आज के दिन जब भी आप कोई फ़ैसला लें, तो दूसरों की भावनाओं का ख़ास ध्यान रखें। आपका कोई भी ग़लत निर्णय न केवल उन पर ख़राब असर डालेगा, बल्कि आपको भी मानसिक तनाव देगा। दिन चढ़ने पर वित्तीय तौर पर सुधार आएगा। पुराने दोस्त मददगार और सहयोगी साबित होंगे।आज जो भी आपसे मिले, उसके साथ विनम्र और सुखद व्यवहार करें। बहुत कम लोग ही आपके इस आकर्षण का राज़ जान पाएंगे। आपका अपने जीवनसाथी के साथ तनावपूर्ण संबंध रह सकता है। जहां तक सम्भव हो बात को बढ़ने न दें। आज बच्चों के साथ समय बिताकर आप कुछ सुकून भरे पल जी सकते हैं।
सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे)
आज आउटडोर के खेल आपको आकर्षित करेंगे- ध्यान और योग आपको फ़ायदा पहुँचाएंगे। जिन लोगों नेे अतीत में अपना धन निवेश किया था आज उस धन से लाभ होने की संभावना बन रही है। अपने मित्रों या संबंधियों को अपना आर्थिक काम-काज और रुपये-पैसे का प्रबंधन न करने दें, नहीं तो जल्दी ही आप अपने तयशुदा बजट से कहीं आगे निकल जाएंगे। आपको अपनी हार से कुछ सबक़ सीखने की ज़रूरत है, क्योंकि आज अपने दिल की बात ज़ाहिर करने से नुक़सान भी हो सकता है। खाली वक्त का आज आप सदुपयोग करेंगे और उन कामों को पूरा करने की कोशिश करेंगे जो बीते दिनों पूरे नहीं हो पाए थे। रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी न होने से आपके वैवाहिक जीवन में तनाव संभव है। खाना, साफ़-सफ़ाई या कोई और घरेलू चीज़ इसका कारण हो सकती है। आज आप सब चिंताओं को भुलाकर अपनी रचनात्मकता को बाहर निकाल सकते हैं।
कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो)
आज आप बेकार के ख़यालों में अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें, बल्कि इसे सही दिशा में लगाएँ। यदि शादीशुदा हैं तो आज अपने बच्चों का विशेष ख्याल रखें क्योंकि यदि आप ऐसा नहीं करते तो उनकी तबीयत बिगड़ सकती है और आपको उनके स्वास्थ्य पर काफी पैसा खर्च करना पड़ सकता है। ज़रूरत के वक़्त आपको दोस्तों का सहयोग मिलेगा। अपने प्रिय से दूर होने के बावजूद आप उसकी मौजूदगी महसूस करेंगे। आप खुद को समय देना जानते हैं और आज तो आपको काफी खाली समय मिलने की संभावना है। खाली समय में आज आप कोई खेल-खेल सकते हैं या जिम जा सकते हैं। आज के दिन आपके और आपके जीवनसाथी के लिए गहरी आत्मीयतापूर्ण बातें करने का सही समय है। टी. वी. देखना टाइम पास करने का एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है परन्तु लगातार देखने से आँखों में दर्द संभव है।
तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते)
जो धुंध अभी आपके चारों तरफ़ छायी हुई है और आपकी प्रगति को बाधित कर रही है, उससे बाहर निकलने का समय है। जो व्यापारी अपने कारोबार के सिलसिले में घर से बाहर जा रहे हैं वो अपने धन को आज बहुत संभालकर रखें। धन चोरी होने की संभावना है। लोगों के साथ ठीक तरह से पेश आएँ, ख़ास तौर पर उनके साथ जो आपसे प्यार करते हैं और आपका ख़याल रखते हैं। आज आपके पास खाली समय होगा और इस समय का उपयोग आप ध्यान योग करने में कर सकते हैं। आपको आज मानसिक शांति का अहसास होगा। कोई व्यक्ति आपके जीवनसाथी में काफ़ी दिलचस्पी दिखा सकता है, लेकिन दिन के आख़िर तक आपको एहसास होगा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है। बिना अपने करीबी लोगों को बताए किसी ऐसी जगह निवेश न करें जिसके बारे में आप खुद भी नहीं जानते।
वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू)
आज आपकी सेहत अच्छी रहेगी। आज के दिन आपको अपने उन दोस्तों से बचकर रहने की जरुरत है जो आपसे उधार मांगते हैं और फिर उसे लौटाते नहीं हैं। आपका अड़ियल रवैया घर पर लोगों के दिलों को चोट पहुँचा सकता है, यहाँ तक कि नज़दीकी दोस्त भी आहत हो सकते हैं। आपका जीवनसाथी आपको पूरे दिन याद करता रहेगा। उसे कोई प्यारा सरप्राइज़ देने की योजना बनाएँ और इसे उसके लिए एक ख़ूबसूरत दिन में तब्दील करने के बारे में सोचें। अपने शरीर को दुरुस्त करने के लिए आज भी आप कई बार सोचेंगे लेकिन बाकी दिनों की तरह भी आज यह प्लान धरा का धरा रह जाएगा। संभावना है कि आपके और आपके जीवनसाथी के बीच तनाव और बढ़ सकता है। इससे बचाव न करने की स्थिति में इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे। जिन्दगी का स्वाद तो स्वादिष्ट भोजन को करने में ही है। यह बात आज आपकी जुबान पर आ सकती है क्योंकि आप के घर में आज स्वादिष्ट भोजन बन सकता है।
धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे)
आज आप खेल-कूद में हिस्सा लेने की ज़रूरत है, क्योंकि चिर यौवन का रहस्य यही है। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को आज धन की बहुत आवश्यकता पड़ेगी लेकिन बीते दिनों में किये गये फिजुलखर्च के कारण उनके पास पर्याप्त धन नहीं होगा। घर में तालमेल बनाए रखने के लिए साथ में मिलकर काम करें। आपका प्यार आपके प्रिय के लिए बेहद क़ीमती है। खाली समय का पूरा आनंद उठाने के लिए आपको लोगों से दूर होकर अपने पसंदीदा काम करने चाहिए। ऐसा करके आपमें सकारात्मक बदलाव भी आएंगे। आप और आपका जीवनसाथी मिलकर वैवाहिक जीवन की बेहतरीन यादें रचेंगे। आज का दिन उन चन्द दिनों जैसा है जब घड़ी की सुईयाँ बहुत धीरे-धीरे हिलती हैं और आप लंबे समय तक बिस्तर में पड़े रहते हैं। लेकिन इसके बाद ख़ुद को तरोताज़ा भी महसूस करेंगे और इसकी आपको काफ़ी ज़रूरत भी है।
मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी)
आज आपके पास अपनी सेहत से जुड़ी चीज़ों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय होगा। आपके पिता की कोई सलाह आज कार्यक्षेत्र में आपको धन लाभ करा सकती है. बच्चों से मिली ख़ुशख़बरी दिन बना सकती है। जीवन का आनंद लेने के लिए आपको अपने दोस्तों को भी समय देना चाहिए। अगर आप समाज से कटकर रहेंगे तो आवश्यकता पड़ने पर आपके साथ भी कोई नहीं होगा। आप शादीशुदा ज़िन्दगी से जुड़े चुटकुले सोशल मीडिआ पर पढ़कर खिलखिलाते हैं। लेकिन आज जब आपके वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई चीज़ें आपके सामने आएंगी, तो आप भावुक हुए बिना नहीं रह सकेंगे। आपका कोई दोस्त आज आपकी जमकर तारीफ कर सकता है।
कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द)
आज अपने कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का दबाव और घर में अनबन के चलते आपको तनाव का सामना करना पड़ सकता है- जो काम में आपकी एकाग्रता को भंग करेगा। इस राशि के विवाहित जातकों को आज ससुराल पक्ष से धन लाभ होने की संभावना है। ऐसे विवादास्पद मुद्दों पर बहस करने से बचें, जो आपके और प्रियजनों के बीच गतिरोध पैदा कर सकते हैं। आपको अपनी तरफ़ से सबसे बेहतर तरीक़े से बर्ताव करने की ज़रूरत है – क्योंकि आज आपका प्रिय जल्दी ही नाराज़ हो सकता है। सामाजिक और धार्मिक समारोह के लिए बेहतरीन दिन है। आज अपने जीवनसाथी का वह रुख़ देखने को मिलेगा, जो उतना अच्छा नहीं है। बेवजह की बातों में आप अपना कीमती समय बर्बाद नहीं करें तो आपके लिए अच्छा रहेगा।
मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची)
आज आप विश्वास कीजिए कि ख़ुद पर यक़ीन ही बहादुरी की असली परख है, क्योंकि इसी के बल पर आप लम्बे समय से चली आ रही बीमारी से निजात पा सकते हैं। चंद्र की स्थिति की वजह से आज आपका धन बेवजह की चीजों पर खर्च हो सकता है। अगर आपको धन संचय करके रखना है तो अपने जीवनसाथी या माता पिता से इस बारे में बात करें। अपने दिन की योजना सावधानी से तय करें। ऐसे लोगों से बात करें, जो आपकी मदद कर सकते हैं। इस राशि वालों को आज खुद के लिए काफी समय मिलेगा। इस समय का उपयोग आप अपने शौकों को पूरा करने में कर सकते हैं। आप कोई किताब पढ़ सकते हैं या अपना पसंदीदा म्यूजिक सुन सकते हैं। आपके जीवनसाथी की ओर से मिला कोई ख़ास तोहफ़ा आपके खिन्न मन को ख़ुश करने में काफ़ी मददगार साबित होगा। अगर आज कुछ अधिक करने को नहीं है तो अपने घर के सामानों को दुरुस्त करके आप अपने को व्यस्त रख सकते हैं।
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नव संवत्सर–गुड़ी पड़वा
चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है। इस दिन हिन्दु नववर्ष का आरम्भ होता है। ‘गुड़ी’ का अर्थ ‘विजय पताका’होता है। कहा जाता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसमें मुख्यतया ब्रह्माजी और उनके द्वारा निर्मित सृष्टि के प्रमुख देवी-देवताओं,यक्ष-राक्षस,गंधवारें,ऋषि-मुनियों नदियों,पर्वतों,पशु-पक्षियों और कीट-पतंगों का ही नहीं,रोगों और उनके उपचारों तक का भी पूजन किया जाता है। इसी दिन से नया संवत्सर शुरू होता है। अतः इस तिथि को ‘नवसंवत्सर’ भी कहते हैं। चैत्र ही एक ऐसा महीना है। जिसमें वृक्ष तथा लताएं पल्लवित व पुष्पित होती हैं। शुक्ल प्रतिपदा का दिन चन्द्रमा की कला का प्रथम दिवस माना जाता है। जीवन का मुख्य आधार वनस्पतियों को सोमरस चन्द्रमा ही प्रदान करता है। इसे औषधियों और वनस्पतियों का राजा कहा गया है। इसीलिए इस दिन को वर्षारम्भ माना जाता है।’प्रतिपदा’ के दिन ही पंचांग तैयार होता है। महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसी दिन से सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए ‘पंचांग’ की रचना की। इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारम्भ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है। आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है। इसी प्रतिपदा के दिन आज से २०८१ वर्ष पूर्व उज्जयनी नरेश महाराज विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांत शकों से भारत-भू का रक्षण किया और इसी दिन से काल गणना प्रारम्भ की। उपकृत राष्ट्र ने भी उन्हीं महाराज के नाम से विक्रमी संवत कह कर पुकारा। महाराजा विक्रमादित्य ने भारत की ही नहीं,अपितु समस्त विश्व की सृष्टि की। सबसे प्राचीन कालगणना के आधार पर ही प्रतिपदा के दिन को विक्रमी संवत के रूप में अभिषिक्त किया। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामचन्द्र के राज्याभिषेक अथवा रोहण के रूप में मनाया गया। यह दिन ही वास्तव में असत्य पर सत्य की विजय दिलाने वाला है। इसी दिन महाराज युधिष्टिर का भी राज्याभिषेक हुआ और महाराजा विक्रमादित्य ने भी शकों पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया। आज भी यह दिन हमारे सामाजिक और धार्मिक कार्यों के अनुष्ठान की धुरी के रूप में तिथि बनाकर मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने वाला पुण्य दिवस है। हम प्रतिपदा से प्रारम्भ कर नौ दिन में छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं, फिर अश्विन मास की नवरात्रि में शेष छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं। आज भी हमारे देश में प्रकृति, शिक्षा तथा राजकीय कोष आदि के चालन-संचालन में मार्च, अप्रैल के रूप में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही देखते हैं। यह समय दो ऋतुओं का संधिकाल है। इसमें रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। प्रकृति नया रूप धर लेती है। प्रतीत होता है कि प्रकृति नवपल्लव धारण कर नव संरचना के लिए ऊर्जस्वित होती है। मानव,पशु पक्षी,यहां तक कि जड़-चेतन प्रकृति भी प्रमाद और आलस्य को त्याग सचेतन हो जाती है। वसंतोत्सव का भी यही आधार है। इसी समय बर्फ पिघलने लगती है। आमों पर बौर आने लगता है। प्रकृति की हरीतिमा नवजीवन का प्रतीक बनकर हमारे जीवन से जुड़ जाती है।


















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