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दुल्हन ही दहेज है की प्रेरणा के साथ बिना दहेज एक रुपये और नारियल के साथ संपन्न हुई शादी पढ़े एक सकारात्मक संदेश की खबर

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्युरो चीफ रमाकांत

श्रीडूंगरगढ़ में भी बिना दहेज की शादियाँ हो रही हैं,जो समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है। ऐसा ही एक सन्देश कस्बें के प्रजापत समाज के मंगलचंद प्रजापत घोड़ेला ने दिया दहेज न लेने की सोच को सोच तक सीमित न रखते हुए एक विचारधारा बनानी होगी, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी इस अभिशाप से मुक्ति पा सकेगी। इस सोच को धरातल पर उतारते हुए मंगलचंद प्रजापत (घोड़ेला) ने अपने पुत्र अक्षित प्रजापत की शादी बिना किसी दहेज के पूरी सादगी से संपन्न कराई। यह विवाह सरदारशहर निवासी बाबुलाल प्रजापत(भोभरिया) की पुत्री शीतल के साथ हुआ जिसमे दुल्हन की बिदाई से पूर्व समुठनी की रस्म के दौरान शादी की रस्में शुरू हुई तो दुल्हन व दूल्हा पक्ष द्वारा दहेज के खिलाफ पूर्व से ही तय सोच के अनुसार एक रुपया व नारियल का लेनदेन कर शादी की रस्म सम्पन्न करवाई। जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई इस सार्थक पहल की प्रशंसा शादी समारोह में मौजूद हर व्यक्ति ने की यह विवाह समाज के लिए एक प्रेरणा बनेगा जहां बिना किसी दिखावे और दहेज की मांग के,केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी संपन्न हुई। अक्षित प्रजापत जो शिक्षा में स्नातक हैं,अपने पिता के दिल्ली में गारमेंट व्यवसाय को संभालते हैं,जबकि शीतल प्रजापत स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। दोनों परिवारों ने मिलकर यह संदेश दिया कि विवाह किसी भी प्रकार की आर्थिक लेन-देन पर नहीं,बल्कि आपसी प्रेम,सम्मान और समानता पर आधारित होना चाहिए। मंगलचंद प्रजापत ने अपने बेटे की शादी में बिना दहेज सिर्फ एक रुपये और नारियल लेकर यह सिद्ध कर दिया कि “दुल्हन ही दहेज है” की अवधारणा ही सही मायनों में विवाह की गरिमा को परिभाषित करती है। इस विवाह समारोह ने न केवल दहेज जैसी कुप्रथा को नकारा,बल्कि समाज में एक नई सोच को बढ़ावा दिया,जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होकर इस दिशा में आगे बढ़ सकें। मंगलचंद ने कहा कि कहा कि आज कल लोग अपना स्टैट्स ऊंचा करने के लिए शादी में अनावश्यक रूप से पैसा, समान आदि ले दे कर मिसाल कायम करने का प्रयास करतें है,जो कि गलत है। इसके लिए हम सभी को दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में आगे आना होगा। बिना दहेज लिए शादी करने पर दोनों पक्षों में अपसी सामंजस्य एवं प्रेम बना रहता है। शादी विवाह दो परिवारों का मेल होता है,इसमें दहेज नामक राक्षस को करीब नहीं आने देना चाहिए शिक्षित लोगों द्वारा भी ऐसा प्रदर्शन करना अफसोस जनक है। कभी-कभी संसाधन के आभाव में सुयोग्य लड़की वालों को मनचाहा वर नहीं मिल पाता। यह विवाह उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो दहेज को विवाह का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं। इस पहल से समाज में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद की जा रही है। समाज में इस तरह की शादियां होना अच्छी पहल है।

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