सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्युरो चीफ
महाशिवरात्रि पर शिवजी के भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा करते हैं। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त,योग और विधि देखें। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव होते हैं। इसलिए हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है और उस दिन शिवजी की विशेष पूजा करते हैं। शिवरात्रि पर्व से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। जो भगवान शिव के प्राकट्य,विवाह,समुद्र मंथन और कैलाश पर्वत से जुड़ी हैं।
शिवरात्रि यानी शिव तत्व वाली रात
शिवरात्रि का अर्थ है वो रात्रि, जिसका शिवतत्व के साथ घनिष्ठ संबंध है। भगवान शिवजी की अतिप्रिय रात्रि को शिवरात्रि कहा गया है। इस व्रत में रातभर जागरण और रुद्राभिषेक करने का विधान है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि महाशिवरात्रि का पूजन, जागरण और उपवास करने वाले का पुनर्जन्म नहीं हो सकता अर्थात उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्मा, विष्णु तथा पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने बताया कि शिवरात्रि व्रत करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। शिव पुराण में मोक्ष के चार रास्ते बताए हैं। इन चारों में भी शिवरात्रि व्रत का विशेष महत्व है, इसलिए इसे जरूर करना चाहिए।
लिंग रूप में प्रकट हुए भगवान शिव
शिव पुराण में लिखा है कि महाशिवरात्रि पर ही भगवान शिव पहली बार प्रकट हुए थे। दरअसल, ब्रह्मा-विष्णु में इस बात पर मतभेद हो गया कि बड़ा कौन है। तब सर्वशक्तिशाली शिव अग्नि स्तंभ बन प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि जो भी उनके आदि या अंत का पता लगा ले, वही श्रेष्ठ है। दोनों असफल रहे और ईश्वर के अस्तित्व को जाना।
शिव-पार्वती के विवाह का दिन
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव पार्वती का विवाह हुआ था। भगवान शिव को पाने के लिए देवी पार्वती ने कठिन तपस्या की। भोलेनाथ ने कहा कि वे किसी राजकुमार से शादी करें क्योंकि एक तपस्वी के साथ रहना आसान नहीं है। पार्वती की हठ के आगे अंततः शिव पिघल गए और दोनों का विवाह हुआ।समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पिया था शिव ने एक मान्यता ये भी है कि समुद्र मंथन में सबसे पहले हलाहल विष निकला। इसकी ज्वाला तेज थी। जिससे देवता और दैत्य जलने लगे और हर तरफ त्राहिमाम होने लगा, तब सबने शंकर जी से प्रार्थना की। तब महादेव उस विष को पी गए। इसी के प्रभाव के चलते शिवजी का कंठ नीला पड़ गया। इस गर्मी को कम करने के लिए देवताओं ने शिवजी पर बिल्वपत्र चढ़ाएं। माना जाता है कि वो शिवरात्रि का दिन था।
एकात्म हुए थे शिव
यौगिक परंपरा में शिव देवता नहीं, आदिगुरु माने गए हैं। यानी पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के बाद एक दिन भगवान शिव कैलाश पर्वत पर पूरी तरह से स्थिर हो गए। तब उनकी सारी गतिविधियां शांत हो गईं और वे पूरी तरह स्थिर हो गए। माना जाता है कि वो दिन महाशिवरात्रि का था। ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं,इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। सभी भक्त प्रभु की पूजा-अर्चना में जुट जाते हैं। कई लोग इस दिन अपने-अपने घरों में रुद्राभिषेक भी करवाते हैं भगवान भोलेनाथ की कई प्रकार से पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन महाशिवरात्रि पर यदि भक्त बेलपत्र से भगवान शिव की विशेष पूजा करें तो उनके धन संबंधी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।
महाशिवरात्रि तिथि
पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11:08 मिनट से होगी. इस तिथि का समापन अगले दिन 27 फरवरी को सुबह 8:54 मिनट पर होगा
महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर निशा काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है।
चार प्रहर की पूजा
महाशिवरात्रि के पर्व काल में धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चार प्रहर की साधना का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की उपासना के अलग-अलग प्रकार का वर्णन मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,यथा श्रद्धा,यथा प्रहर,यथा स्थिति और यथा उपचार के अनुसार साधना करनी चाहिए चार प्रहर की साधना से धन,यश,प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है। जिनके जीवन में संतान संबंधी बाधा हो रही हो,उन्हें भी यह साधना अवश्य करनी चाहिए।
चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर पूजा का समय सायं 06:29 बजे से
रात्रि 09:32 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा का समय रात्रि 09:33 बजे से
मध्यरात्रि 12:36 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा का समय मध्यरात्रि 12:37 बजे से
प्रातः03:40 बजे तक तक
चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: प्रातः03:41 बजे से प्रातः
06:43 बजे तक
महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की महाशिवरात्रि 26 फरवरी, धनिष्ठा नक्षत्र परिघ योग,शकुनी करण और मकर राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में आ रही है। इस दिन चार प्रहर की साधना से शिव की कृपा प्राप्त होगी इस दिन सुबह से ही मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ जमा हो जाती है। शुभ संयोग और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना करने से उनके भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी
पूजा में करें महामृत्युंजय मंत्र का जप
बनवारी लाल पारीक जी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिव पूजा करते समय में अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जप करना चाहिए। इस मंत्र के जप से अनजाना भय और चिंता दूर होती है। महामृत्युंजय मंत्र की वजह से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है,जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
महामृत्युंजय मंत्र- ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
इन चीजों से करें भगवान शिव का अभिषेक
महाशिवरात्रि पर्व के दिन भगवान शिव की उपासना के समय शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना शुभ होता है। ऐसा करने से श्रद्धालु के कार्य जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक दही से करने से भी आर्थिक क्षेत्र में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है। वहीं गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
भगवान शिव का अभिषेक करते समय 108 बार ॐ पार्वतीपतये नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।
ऐसा करने से जीवन में अकाल संकट नहीं आता है.
पूजन विधि-
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करा कराएं केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं पूरी रात्रि का दीपक जलाएं चंदन का तिलक लगाएं बेलपत्र,भांग,धतूरा,गन्ने का रस तुलसी,जायफल,कमल गट्टे,फल,मिष्ठान,मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं। सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें घर में कैसा शिवलिंग रखें जो लोग शिव मंदिर में पूजा नहीं कर पाते हैं,वे घर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा कर सकते हैं। घर में शिवलिंग स्थापना के लिए महाशिवरात्रि बहुत शुभ दिन है। अगर घर में शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं तो शिवलिंग का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए बड़े शिवलिंग मंदिरों के लिए ही शुभ होते हैं घर के लिए तो छोटा सा शिवलिंग शुभ रहता है।
इस धातु का शिवलिंग न रखें
शिव पुराण में बताया गया है कि घर में हाथ के अंगूठे के पहले भाग से बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए शिवलिंग के साथ ही गणेश जी,देवी पार्वती,कार्तिकेय स्वामी और नंदी की छोटी सी प्रतिमा भी रखनी चाहिए शिवलिंग सोना,चांदी पीतल का या मिट्टी-पत्थर का शुभ रहता है। एल्युमीनियम स्टील या लोहे के शिवलिंग की पूजा करने से बचना चाहिए. पूजा-पाठ के लिए ये धातु शुभ नहीं मानी जाती हैं। इन धातुओं के अलावा स्फटिक और पारद के शिवलिंग भी घर में स्थापित कर सकते हैं. शिव परिवार की पूजा एक साथ करने से पूजा का फल जल्दी मिल सकता है।
पौराणिक कथा
शिवपुराण के मुताबिक एक बार ब्रह्मा-विष्णु के बीच विवाद हो गया झगड़े की वजह ये थी कि दोनों ही देवता खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे। जब दोनों देवता दिव्यास्त्रों से युद्ध शुरू करने वाले थे,ठीक उसी समय भगवान शिव लिंग रूप में इनके सामने प्रकट हो गए शिव जी ने कहा कि आप दोनों में से जो भी इस लिंग का छोर (अंत) खोज लेगा,वही श्रेष्ठ माना जाएगा ये बात सुनकर एक छोर की ओर ब्रह्मा जी और दूसरे छोर की ओर विष्णु जी चल दिए बहुत समय तक ब्रह्मा-विष्णु अपने-अपने छोर की ओर आगे बढ़ते रहे लेकिन उन्हें लिंग का अंत नहीं मिलाउस समय ब्रह्मा जी खुद को श्रेष्ठ घोषित करने के लिए एक योजना बनाई ब्रह्मा ने एक केतकी का पौधा लिया और उससे झूठ बोलने के लिए कहा कि वह शिव-विष्णु के सामने बोले कि ब्रह्मा जी ने लिंग का अंत खोज लिया है ब्रह्मा केतकी के पौधे को लेकर शिव जी के पास पहुंचे, विष्णु जी भी वहां आ गए और उन्होंने कहा कि मैं इस लिंग का अंत नहीं खोज सका ब्रह्मा ने कहा कि मैंने इस लिंग का अंत खोज लिया है,ये बात आप केतकी के पौधे से भी पूछ सकते हैं। केतकी ने भी भगवान के सामने झूठ बोल दिया ब्रह्मा जी का झूठ सुनते ही शिव जी क्रोधित हो गए उन्होंने कहा कि आपने झूठ कहा है,इसलिए आज से आपकी कहीं भी पूजा नहीं होगी और केतकी ने आपके झूठ में साथ दिया,इसलिए इसके फूल मेरी पूजा में वर्जित रहेंगे इसके बाद विष्णु जी सर्वश्रेष्ठ घोषित हो गए ये घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की ही मानी जाती है,इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है।
अभिषेक सामग्री लिस्ट : शिवजी के अभिषेक के लिए दूध दही,शहद,घी,शक्कर,इत्र,गंगा जल,सफेद चंदन,गोल सुपारी रोली,मौली,पीला चंदन,चावल,लौंग-इलायची,अबीर,पान का पत्ता, हल्दी,काली मिट्टी शिवलिंग बनाने के लिए,शिवजी पार्वती जी के वस्त्र,फल,मिठाई,धूप-बत्ती,घी का दीपक और जनेऊ को पूजा सामग्री में जरूर शामिल करें।
अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य पण्डित बनवारीलाल पारीक से संपर्क कर सकते हैं।
9461110599


















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