सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
सूडसर। समीपवर्ती गांव कोटासर के भोमियाजी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कथा में अमर कथा और शुकदेवजी के जन्म का वृतांत का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा वाचक पं. प्रकाश तिवाड़ी ने कहा कि सभी श्रोताओं पर ठाकुर जी की कृपा है। जो हम सब कथा का आनंद ले रहे है। श्रीमद भगवत कथा का रसपान कर पा रहें है,क्योंकि जिन्हें गोविन्द प्रदान करते है,जितना प्रदान करते है,उसे उतना ही मिलता है। कथा में यह भी बताया की अगर आप भागवत कथा सुनकर कुछ पाना चाहते है,कुछ सीखना चाहते है तो कथा में प्यासे बन कर आए कुछ सीखने के उद्देश्य से,कुछ पाने के उद्देश्य से आएं,तो ये भागवत कथा सबकी कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ देती है। मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है। लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा हुआ है। उसका सारा ध्यान संसारिक विषयों को भोगने में ही लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है,और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि हमें जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो हमारे लिए इससे प्रभु से बढ़कर कोई और सुख व संपत्ति नहीं है। भगवत कथा के माध्यम से स्वयं श्रीकृष्ण आपसे मिलने आए है और जो भी इस भागवत कथा अमृत को सच्चे मन से सुनता व मनन करता है तो भागवत उसका सदैव कल्याण करती है। इस अवसर पर लखासर से महेन्द्र सिंह तंवर,दुलचासर से भागीरथ नाई मोहनराम महिया,भोजास से ओमप्रकाश सोनी समेत आस पास के गांवों से बड़ी सँख्या में श्रद्धालु पहुंचे और व्यासपीठ से आर्शीवाद लिया। इस दौरान कार्यकताओं ने व्यवस्था संभाली।






















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