गंजबासौदा
जिला ब्यूरो संजीव शर्मा
कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक से कम पढ़ने लगी जगह

गंजबासौदा। नवीन कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक होने से प्रांगण की व्यवस्थाएं लड़खड़ा गई हैं।फड पर जगह कम पड़ने से व्यापारियों को किसानों के बने शेड के नीचे और व्यापारियों के फडों के आगे तोल कराने मजबूर होना पड़ रहा है। शुक्रवार को 30 बोर्न की आवक रिकॉर्ड की गई इनमें अकेला 21हजार बोरे धान के बताए गए हैं।मालूम होकि कृषि उपज मंडी को नवीन प्रांगण में स्फिट हुए लगभा10 वर्ष का समय गुजर चुका है। जबकि व्यापारियों को शिफ्ट हुए 5 वर्ष लेकिन अनाज एवं तिलहन व्यापारियों की मांग के अनुसार ना तो अभी पानी की पर्याप्त व्यवस्था पूरी हो सकी है। और ना ही जगह की कमी से जूझ रहे व्यापारियों को प्लाटों का आंबटन होसका । प्रशासन के आश्वासन के बाद भी मंडी में राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं खुली व्यापारियों के सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है।जबकि मंडी शिफ्ट होने से पूर्व पुलिस चौकी स्थापित करने की बात व्यापारियों से कही गई थी। जिन किसानों की सुविधा के लिए सुलभ कंपलेक्स बनाए गए थे वह बंद पड़े हुए हैं। अनाज एवं तिलहन व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय अरोरा ने बताया की 6 नवंबर 2021 को व्यापारियों के विरोध के बाद भी मंडी को नवीन प्रांगण में शिफ्ट कर दिया गया था। सुविधा पूरी न होने और अनाज एंव तिलहन व्यापारियों के विरोध के बाद भी प्रथम श्रेणी कृषि उपज मंडी में स्टाफ की कमी से कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।अनाज तिलहन व्यापारी संघ ज्ञापन सौंपकर की व्यवस्था में सुधार की मांग पूर्व में कर चुका है।
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प्रभारी के भरोसे काम काज
प्रदेश में प्रथम श्रेणी कृषि उपज मंडियों में गिनी जाने वाली शहर की कृषि मंडी तीन वर्ष से अधिक समय से प्रभारी मंडी सचिव के भरोसे संचालित हो रही है।अव्यवस्थाओं के चलते कामकाज लगातार प्रभावित हो रहा है। स्टाफ न होने से नीलामी कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है। लगातार आवक बढ़ने से भी नया मंडी प्रांगण भी छोटा पड़ने लगा है। प्रांगण में एकमात्र भर है जो पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं कर पाता सीजन के समय टैंकरों से पानी मंगाया जाता है जो पीने योग्य भी नहीं रहता। व्यापारी पीने के लिए वाटर सप्लाई करने वाले एजेंट से पानी खरीदने को मजबूर होते हैं। कृषको, हम्माल, मजदूर, तुलाबट को पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है।व्यापारी अमित का कहना है कि पिछले वर्षों से मंडी में नई फसल धान भी आने लगी है। इसलिये मंडी परिसर छोटा पड़ने लगा है डांक नीलाम के लिए मंडी के पीछे बाले ग्राउंड अधिग्रहित किया जा चुका है। लेकिन अभी भी इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है व्यापारियों के लिए जितने प्लांट की आवश्यकता है वह पूर्ति भी नहीं हो पा रही है।मंडी विस्थापित के समय से कई व्यापारी अभी भी प्लाट लेने से बंचित रह गए है।
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नहीं बनी पुलिस चौकी
नवीन कृषि उपज मंडी में किसानों और व्यापारियों के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है जबकि मंडी शिफ्टिंग के समय यह आश्वासन व्यापारियों और किसानों को दिया गया था कि यहां नवीन पुलिस चौकी की स्थापना की जाएगी लेकिन 3 वर्ष बाद भी इस पर अमल नहीं किया गया ।व्यापारियों का कहना है। कि लगातार मंडी में चोरी की घटनाएं बढ़ रही है दिनदहाड़े कई व्यापारियों से और किसानों से लूट की घटनाएं तक घटित हो चुकी है इस मन से सुरक्षा के इंतजाम के लिए पुलिस चौकी आवश्यक हो गई है। मंडी में सुरक्षा गार्ड भी पर्याप्त नहीं है। प्रांगण में सीसी टीवी कैमरे लगाये जाये ताकि चोरी की घटनाओं को रोका जा सके पूर्व में कुछ कृषकों के साथ लूट हो चुकी है। जिनका सुराग आज तक नहीं लगा है। अनाज एंव तिलहन व्यापारी संघ के सदस साबन अग्रवाल एवं कृषको का कहना है कि कृषि उपज मंडी शिफ्टिंग से पूर्व राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोले जाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन इसे भी नहीं खोला गया। व्यापारी शहर से 3 किलोमीटर दूर किसानों के भुगतान के लिए लंबी रकम लेकर जाते हैं। और उनके साथ कई बार लूटपाट की वारदात घटित हो चुकी है।किसानों को नगद भुगतान मंडी में दिए जाने से किसान भी चोरी और लूट का शिकार हो जाते हैं यदि राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा मंडी प्रांगण में ही खुल जाए तो किसान और व्यापारियों दोनों को लाभ होगा। कृषि उपज मंडी में किसानों और व्यापारियों का खुला हुआ जींस बाहर रखा रहता है जिसे यह विचरण करने वाले मवेशी नुकसान पहुंचाते हैं कृषि उपज मंडी में चार सौ से अधिक लाइसेंसी व्यापारी है इसके अलावा प्रतिदिन डेढ़ से 2हजार किसान नीलामी के लिए अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं उपज खुली रखने पर सैकड़ो मवेशी उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं जबकि कृषि उपज मंडी समिति में सुरक्षा गार्ड है उनका उपयोग सुरक्षा के लिए नहीं किया जाता। गेट खुले होने के कारण मवेशी यहां प्रवेश कर जाते हैं। कृषि उपज मंडी के पूरे प्रांगण में सीसी कारण किया जाना था लेकिन 2 वर्ष बाद भी इसका सीसी कारण नहीं हुआ है वर्षा के समय यहां कीचड़ और दलदल हो जाने के कारण किसानों और व्यापारियों को परेशानियां होती है।
इनका कहना है
लगातार व्यापारियों द्वारा पूर्व में प्रांगण बढाने की मांग की गई थी। वर्तमान संघ द्वारा भी प्रस्ताव बनाकर धान की फसल तोल के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग उठाई जाएगी। भारी आवक के समय मैदान छोटा पड़ रहा है।
सतीश जैन कटारे अध्यक्ष अनाज एवं तिलहन व्यापारी संघ गंजबासौदा।
















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