राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने की सत्संग भवन के लिए विधायक निधि से 30 लाख रुपए देने की घोषणा
शुद्ध चित ही ईश्वर प्राप्ति के योग्य होता है- ब्रह्नचारी जी
बरेली रायसेन मध्य प्रदेश से संवाददाता तखत सिंह परिहार की रिपोर्ट सिलवाह

बरेली। नगर के मानस सत्संग भवन में चल रहीं श्रीशिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ और श्री मानस कथा के चौथे दिवस की कथा में पूज्य ब्रह्मचारी जी महाराज ने चित की एकाग्रता को ईश्वर प्राप्ति का उपाय बताया। उन्होंने बताया कि चित को एकाग्र करने के 6 सूत्र होते हैं। एकांत वास,लघु भोजन,मौन,निराशा औऱ इंद्रियों का निग्रह और प्राण की एकाग्रता।
चित की एकाग्रता के लिए एकांत वास अंदर से और बाहर दोनों तरह से एकांत होना चाहिए। चित की एकाग्रता के लिए
अल्प अहार होना चाहिए। बिना भूख के भोजन जहर है। अहार भूख से आधा भोजन करना चाहिये।
मौन -अंदर से मौन और अंदर मौन
निराशा -किसी से आशा न करना । आशा ही गुलामी का कारण होता है।
जिसने आशा को दास बना लिया,उसका संसार दास हो जाता है।
इंद्रियों का निग्रह – इंद्रियों को नियंत्रित करलो ।
प्राण एकाग्र हो जाना – चित को एकाग्र करने के 6 उपाय हो जाने से चित शुद्ध हो जाता है।
चित को शुद्ध करलो तो चित ईश्वर प्राप्ति के योग्य हो जाता है।अर्थात शुद्ध चित ही ईश्वर प्राप्ति के योग्य है।
हमारे सामने कोई पूज्य आये तो प्रणाम करना चाहिए,जब हमारे पूज्य सामने आते हैं तो हमारे प्राण ऊपर की और उछलते हैं। प्राण ऊपर उछलते है । हमारा शरीर कमजोर होता है। वृद्ध को प्रणाम करने से
हमारे प्राण यथा स्थान पर आ जाते हैं साथ ही पुण्य भी प्राप्त होता है। पूज्य
चार के होते हैं। प्रथम वयो वृद्ध,जो हमसे आयु में बड़ा है। दूसरा आश्रम पूज्य आश्रम पूज्य अर्थात वान प्रस्ति,जिसने वान प्रस्थ आश्रम स्वीकार कर लिया हो। तीसरा होता वर्ण वृद्ध। वर्ण चार होते है। शुद्र,क्षत्रिय,वैश्य और ब्राह्मण। यदि किसी शूद्र के सामने से अन्य तीनो वर्ण का कोई भी सामने आये तो शूद्र को प्रणाम करना चाहिए। क्षत्रिय के सामने वैश्य या ब्राह्मण आय जाए तो क्षत्रिय को दोनों को प्रणाम करना चाहिए। चौथा होता है ज्ञान वृद्ध। ज्ञान वृद्ध को सभी चारो वर्ण वालों को प्रणाम करना चाहिए। ज्ञान वृद्ध सभी के लिए पूज्य होता है। पूज्य ब्रह्मचारी जी महाराज के पूर्व मानस प्रवक्ता राम ज्ञान पांडे वृन्दावन वालों ने भरत चरित्र की विस्तार से व्यख्या की। उन्होंने बताया कि भरत चरित्र सुनने से वैराग्य उत्पन्न हो जाता है।
उमड़ रही है श्रोताओं की भीड़- कथा ब्रह्मचारी महाराज द्वारा वाचित श्री शिव महापुराण का श्रवण करने भारी भीड़ उमड़ रही है। नगर एवं आसपास ग्रामीण अंचल से कथा रस पान करने वालों से सत्संग भवन भर जाता है।
सत्संग भवन के लिए तीस लाख की घोषणा- कथा श्रवण करने पहुँचे राज्यमंत्री ने सत्संग भवन के विकास के लिए 30 लाख की घोषणा की। आयोजन समिति द्वारा 25 लाख का मांग पत्र सौंपा था। राज्यमंत्री नरेंद्रशिवाजी पटेल ने ब्रह्नचारी का आदेश मानकर मांग से 5 लाख से अधिक 30 लाख की घोषणा करदी।

















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