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कुछ उच्च न्यायालयों ने बैंक मित्रों (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स) को मजदूर या कर्मचारी की श्रेणी में रखने के संबंध में निर्णय दिए

बरेली रायसेन से कृष्णकुमार भार्गव की रिपोर्ट

जी हाँ, कुछ उच्च न्यायालयों ने बैंक मित्रों (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स) को मजदूर या कर्मचारी की श्रेणी में रखने के संबंध में निर्णय दिए हैं। उदाहरण के लिए:

1. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2022 में एक मामले में यह कहा था कि बैंक मित्रों को भी श्रमिक के रूप में देखा जा सकता है, क्योंकि वे बैंक के लिए नियमित काम करते हैं और बैंक के दिशानिर्देशों के तहत काम करते हैं।

2. केरल उच्च न्यायालय ने भी बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स के अधिकारों और उनके न्यूनतम वेतन की बात उठाई थी, जिसमें उन्हें श्रमिक के रूप में मानने का मुद्दा शामिल था।

हालांकि, यह मामला पूरे भारत में भिन्न-भिन्न उच्च न्यायालयों में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय इस पर निर्भर करेगा कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर क्या फैसला करता है।
नोट – प्राप्त जानकारी के अनुसार

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