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GRAP-2 लागू होने के बाद भी क्यों बढ़ रहा है दिल्ली में प्रदूषण? खूब हो रहा नियमों का उल्लंघन

GRAP-2 लागू होने के बाद भी क्यों बढ़ रहा है दिल्ली में प्रदूषण? खूब हो रहा नियमों का उल्लंघन,

दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। देश की राजधानी में आनंद विहार समेत कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है।

संवाददाता विशाल लील की रिपोर्ट

दिल्ली-NCR में बदल रहे मौसम के साथ बढ़ रहे प्रदूषण से स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। देश की राजधानी में आनंद विहार समेत कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है। इसके दूसरी ओर प्रदूषण के मुद्दे पर सियासी पारा भी हाई है, सियासी दल एक-दूसरे पर वार-पलटवार करने में लगे हुए हैं।


आपको बता दें, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का कहर लगातार जारी है। दिल्ली के लोग दमघोंटू हवा में जीने को मजबूर हैं और वहीं सरकार की ओर से किए गए प्रदूषण नियंत्रण के उपाय भी कोई खास असर नहीं दिखा पा रहे हैं। आज सुबह कई इलाकों में AQI 400 के पार बना हुआ है।

दिल्ली में इन इलाकों में गंभीर श्रेणी में रहा एयर इंडेक्स
आनंद विहार- 436
रोहिणी- 435
नेहरू नगर- 430
पंजाबी बाग- 425
मुंडका- 423
अशोक विहार- 421
वजीरपुर- 420
जहांगीरपुरी- 414
एनएसआइटी द्वारका- 413
द्वारका सेक्टर आठ- 410
पटपड़गंज- 407
बवाना- 405
विवेक विहार- 404
डीयू नार्थ कैंपस- 402
ओखला फेज दो- 402
नजफगढ़- 401

दिल्ली में प्रदूषण के साथ-साथ अब ठंड ने भी दस्तक दे दी है, जिसके चलते प्रदूषण के कहर के साथ अब ठंड ने भी सितम ढहाना शुरू कर दिया है। सोमवार की सुबह न्यूनतम तापमान 19°C दर्ज किया गया है। हफ्ते की शुरुआत में सुबह से ही दिल्ली में AQI 400 के पार दर्ज किया गया है। दिल्लीवासी दमघोंटू जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। सर्दी में प्रदूषण के कारण विजिबिलिटी का लेवल भी लगातार कम होता जा रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम के लिए लगे ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान)- एक व ग्रेप-2 के प्रावधानों और प्रतिबंधों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है। एनसीआर की सड़कों पर बगैर पीयूसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र) के वाहन रफ्तार भर रहे हैं। अपनी उम्र पूरी कर चुके वाहन भी सड़कों पर प्रदूषण फैला रहे हैं। कई निर्माणाधीन और विध्वंस स्थलों पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा ग्रेप के नियमों का पालन नहीं करने पर की कार्रवाई के आंकड़े हकीकत दिखा रहे हैं। इस बीच दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सीएक्यूएम ने दिल्ली सहित एनसीआर में प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार सरकारी एजेंसियों को सख्ती बढ़ाने और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं।

22 अक्टूबर को ग्रेप-2 के प्रावधानों को लागू किया गया
एनसीआर में 15 अक्टूबर को ग्रेप-एक व 22 अक्टूबर को ग्रेप-2 के प्रावधानों को लागू किया गया था। सीएक्यूएम ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए किए गए प्रावधानों पर कार्रवाई की निगरानी व फॉलोअप के लिए एनसीआर से संबंधित राज्यों में ग्रेप निगरानी कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं, जिसका प्रमुख सीएक्यूएम के सदस्य को बनाया गया है। सेंट्रल कंट्रोल रूम व राज्यों के नोडल अधिकारियों के बीच बिना रोकटोक के एक दूसरे तक सूचनाएं पहुंचाने के लिए एक वाट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया है।

विध्वंस स्थलों पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए उपाय नहीं
आयोग के अनुसार ग्रेप लगने के बाद 15 से 31 अक्टूबर के बीच एनसीआर में सात हजार निर्माण व विध्वंस स्थलों का निरीक्षण किया गया। जिसमें से 653 निर्माण व विध्वंस स्थलों पर प्रदूषण की रोकथाम के लिए उपाय नहीं किए गए थे। इस वजह से 597 निर्माण व विध्वंस स्थलों पर काम करने वाली एजेंसियों के खिलाफ जुर्माने के रूप में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया गया है। 56 निर्माण व विध्वंस स्थल बंद करा दिए गए हैं।

दिल्ली में कूड़ा जलाने की धटनाएं भी हो रही
एनसीआर में पीयूसी नहीं होने पर 54 हजार वाहनों के चालान किए गए हैं। वहीं समय पूरा होने के बाद भी सड़कों पर रफ्तार भरने वाले 3900 पुराने वाहन जब्त किए गए हैं। करीब 1400 औद्योगिक ईकाइयों व 1300 डीजल जनरेटर (डीजी सेट) का निरीक्षण किया गया। नियमों का पालन नहीं होने पर कई डीजी सेट बंद कराए गए। ठोस कचरा प्रबंधन में भी लापरवाही बरती जा रही है और कूड़ा जलाने की धटनाएं भी हो रही हैं। सीएक्यूएम की टीम ने अवैध मलबा डालने की साइटों का भी निरीक्षण किया है। सीएक्यूएम के अनुसार एनसीआर में ऐसे 5300 निरीक्षण किए गए हैं। इस दौरान कूड़ा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

वाटर स्प्रिंकलर व एंटी स्माग गन बढ़ाए गए
सीएक्यूएम ने दावा किया है कि सड़कों पर धूल की रोकथाम व पानी की छिड़काव के लिए एनसीआर में वाटर स्प्रिंकलर व एंटी स्माग गन बढ़ाए गए हैं। दिल्ली में सड़कों की सफाई व धूल हटाने के लिए औसतन 81 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन (एमआरएसएम) प्रतिदिन लगाए जाते हैं। वहीं एनसीआर में स्थित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहरों में 36 मशीनें हैं। इसी तरह एनसीआर में प्रतिदिन औसतन 600 वाटर स्प्रिंकलर व 600 एंटी स्माग गन तैनात किए गए हैं।

संवाददाता विशाल लील की रिपोर्ट

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