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बलिया में बाढ़ का पानी घटने के बाद भी तटवर्ती गांवों को राहत नहीं, सताने लगा इस बात का खतरा।

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रिपोर्टर अंकित तिवारी की रिपोर्ट बलिया उत्तर प्रदेश 

• बलिया में बाढ़ का पानी घटने के बाद भी तटवर्ती गांवों को राहत नहीं, सताने लगा इस बात का खतरा।

www.satyarath.comबलिया : बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है। लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। बाढ़ प्रभावित करीब 59 गांव व टोला से बाढ़ का पानी कम होने के बाद सड़कों और गांवों के आसपास फैले कचरे व घास-पात के सड़ने के वजह दुर्गंध आ रही है।

ऐसे में ग्रामीणों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने इन ग्राम पंचायतों में 59 स्वास्थ्य कर्मियों की दवा छिड़काव आदि की जिम्मेदारी सौंपी है। बावजूद इसके गांव में जगह- जगह गड्ढे में कई दिनों से रुके पानी काले पड़ गए हैं। जानकार बता रहे हैं कि यह पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए सुरक्षित स्थान है। जैसे ही पानी और कम हुआ कि महामारी फैल जाएगी।बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही लोग अपने-अपने घरों में लौटने लगे है, लेकिन अपने घरों में लौट रहे लोगों का कहना है कि इलाके में मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ गया है। ऐसे में बीमारियों के फैलने का डर सताने लगा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के सड़क व गांव के किनारे फैले कचरे और शौचालय के डूबे होने के कारण अब बाढ़ का पानी उतरने के बाद सड़ांध भरी दुर्गंध से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।

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