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बाराबंकी : जिला सहकारी बैंक के 12 संचालकों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक।

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नोट : इस चर्चित प्रकरण में भाजपा और सपा के बीच चल रहा था सारा खेल 

रिपोर्टर ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार उत्तर प्रदेश बाराबंकी सत्यार्थ न्यूज़

• जिला सहकारी बैंक के 12 संचालकों को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक।

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बाराबंकी : जिला सहकारी बैंक के 12 संचालकों के पद से हटाए जाने और उनको तीन साल के लिए चुनाव लड़ने से रोक की कार्रवाई के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत करार देते हुए रोक लगाकर नोटिस के जरिये जवाब मांगा है।इस मामले में 12 संचालकों को हटाने के अगले दिन 17 अगस्त 024 को अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने सभापति के पद का दायित्व संभाल लिया था।

अपर जिला सहकारी अधिकारी बैकिंग व अपर जिला सहकारी अधिकारी नवाबगंज को संचालन समिति का सदस्य भी बनाया गया था। नए निजाम की पहली बैठक भी हुई थी। नए चुनाव की कार्यवाही प्रगति पर चल रही थी इसी बीच कोर्ट का फैसला आ गया।उपायुक्त व उपनिबंधक सहकारिता अयोध्या मंडल विनोद कुमार ने शुक्रवार को बैंक की प्रबंध समिति के निदेशकों सिद्धांत पटेल, सुभाष चंद्र, सुरेश चंद्र, देशराज, रंजीत कुमार, लीना वर्मा, शिवदेवी, रामलाल, रीना वर्मा, शशि वर्मा, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह व राजकुमारी को बैंक की प्रबंध समिति की दो अगस्त, 16 जुलाई व दो अगस्त की बोर्ड बैठकों में न जाने पर पद के अयोग्य घोषित कर दिया था। पिछले साल फरवरी माह में चुनाव कराकर सिद्धांत पटेल को सभापति चुन लिया गया था। आरोप था कि भाजपा की सरकार रहते हुए संगठन के पदाधिकारियों से राय शुमारी के बिना सपा के समर्थक सिद्धांत पटेल के पदासीन होने पर एतराज सामने आने लगे थे। गतिरोध गहराया तो सिद्धांत ने निजी कारण बताते हुए पद से त्यागपत्र दे दिया था।

इस बीच सभापित का दायित्व भाजपा जिला महामंत्री गुरुशरण लोधी को सभापति का दायित्व मिल गया था। लोधी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए 12 सदस्यों ने उनके खिलाफ खिलाफ लामबंदी शुरु कर दी थी। इससे बैंक का कामकाज भी प्रभावित हो रहा था।इस पूरे प्रकरण में उच्च न्यायालय नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

अधिवक्ता फारूक अयूब बोले साजिश का शिकार हुये संचालक।

संचालकों के हाईकोर्ट के सीनियर अधिवक्ता फारूक अयूब ने बताया कि 16 अगस्त 024 को हुए एकपक्षीय व मनमाना था। संचालकों के खिलाफ साजिश करते हुए जिला में तैनात शाहयक आयुक्त व शाहयक निबंधक सहकारिता द्वारा वास्तविक रिपोर्ट सच्चाई से कोसो दूर थी। जिसे न्यायालय ने संज्ञान लिया और गैर कानूनी फैसलों पर रोक लगा दी।

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