वाराणसी,रामनगर की रामलीला 2024 : दशरथ के घर जन्मे राम, भावविभोर हुए लीला प्रेमी, बोले, रामलीला का साक्षी बनना हमारा सौभाग्य…
वाराणसी वाराणसी : रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला का आकर्षण आज भी लोगों के दिलों में गहरा है। दूसरे दिन हजारों नेमी और लीला प्रेमी प्रभु श्रीराम के जन्म के प्रसंग को देखने उमड़े। रामजन्म का जीवंत मंचन देख कर लोग भावविभोर हो गए और बोले, रामनगर की रामलीला अद्वितीय और दिव्य है। रामजन्म की लीला का साक्षी बनना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।
शुक्रवार को रामलीला के दूसरे दिन भगवान श्रीराम सहित उनके तीनों भाइयों के जन्म की सूचना मिलते ही अयोध्या नगरी में मंगल गीत गूंजने लगे। पूरे लीला स्थल पर बधाई और सोहर के गीतों की ध्वनि नें वातावरण को उल्लासमय बना दिया। लीला प्रेमियों नें जयकारे लगाए, और हर तरफ उत्सव का माहौल छा गया। रामनगर के अयोध्या मैदान में लीला शुरू होने से पहले ही भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जहां साधु-संतों नें ढोलक और हारमोनियम की संगत में प्रभु श्रीराम की महिमा का बखान किया। इस मनोहारी झांकी नें पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। भगवान विष्णु के विराट स्वरूप की झांकी देखने के लिए भारी संख्या में लोग लीला स्थल और आसपास की छतों पर जमा हुए। शाम को दुर्ग से शाही सवारी निकली, जिसमें काशी राजपरिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह की एक झलक पाते ही हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
रामजन्म की लीला देखने के लिए वाराणसी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में नेमी और लीला प्रेमी उमड़े। पिछले 40 वर्षों से हर साल रामनगर की रामलीला देखने आ रहे वाराणसी के डॉ. ओमप्रकाश सिंह नें कहा कि रामजन्म की लीला का साक्षी बनना सौभाग्य की बात है। वहीं, मिर्जापुर के जमालपुर से आए श्यामजी यादव रामजन्म की लीला देख भावविभोर नजर आए। कहा कि रामनगर की रामलीला का इतिहास इतना पुराना है कि लोग इसकी शुरुआत के बारे में नहीं बता पाते, लेकिन यह आज भी उतनी ही अद्भुत है। इसका आकर्षण बरकरार है।
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