!!: प्रश्न: क्या गणेश प्रतिमा विसर्जन शास्त्र सम्मत है ?
उतर: हाँ बिल्कुल
अभी एक ह्वाट्सएप मैसेज में देखा कि गणपति जी का विसर्जन नहीं करना चाहिए..!!! अब ये मैसेज कहां से चलते हैं , कभी हनुमान जयंती पर कभी दही हांडी की ऊंचाई पर तो कभी श्रावण मास के दुग्धाभिषेक पर ..यह तो वही जानें किंतु भाव प्रतिष्ठा , प्राण प्रतिष्ठा के, चल , अचल , कालातीत और पूजन की समय सीमा के अनुसार अलग अलग विधान हैं ,,
जो विधि विधान पहले से पुराणों में वर्णित है , उसमें प्राकृतिक सामग्री से गणपति बप्पा की प्रतिमा निर्माण का निर्देश दिया गया है, घरों में गोमय से गणपति बनाए जाते थे , इनका विसर्जन पूर्णतः पर्यावरण की रक्षा करने वाला होता है, अत: रासायनिक घटकों से मुक्त शुद्ध प्राकृतिक वस्तुओं से गणपति बप्पा की प्रतिमा बनाएं ,, एक नया ही मैसेज चल रहा है कि गणपति जी महाराष्ट्र में मेहमान बन कर गए थे बाकी जगह विसर्जन न करें .. किस आधार पर ये टूलकिट रचना हुई यह तो इसको प्रचारित करने वाले ही जानें .. मध्य काल की बर्बरता में ये उत्सव सार्वजनिक रूप से नहीं मना पाते थे, जिस परंपरा का पुनरुत्थान लोकमान्य तिलक जी ने किया था।
श्री गणेश पुराण उपासना खण्ड में भाद्रपद मास की श्री गणेश चतुर्थी से पूजन का विधान और अंत में विसर्जन का स्पष्ट उल्लेख है ।
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