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श्रीडूंगरगढ़। पर्युषण महापर्व के छठे दिन जप दिवस का आयोजन श्रीडूंगरगढ़ साध्वी सेवा केंद्र में किया गया

श्रीडूंगरगढ़। पर्युषण महापर्व के छठे दिन जप दिवस का आयोजन श्रीडूंगरगढ़ साध्वी सेवा केंद्र में किया गया।

 

केंद्र व्यवस्थापिका शासनश्री साध्वी कुंथुश्री जी ने अपने प्रवचन में फरमाया कि पर्युषण पर्व त्याग, तपस्या और धर्म आराधना का पर्व है। पर्युषण काल में भोगों पर त्याग का अंकुश लगाकर अधिकाधिक समय धर्म आराधना में लगाना चाहिए। जप साधना मार्ग का एक सोपान है। जप से ज्ञान, दर्शन, व चारित्र की प्राप्ति होती है।

जप वह शक्ति है जिससे हम जैसा चाहे वैसा बन सकते हैं। जप कब, कैसा, व कहां करना चाहिए जिसकी विशेष जानकारी देते हुए साध्वी ने कहा कि तन्मयता से, एकाग्रता से, विधि सहित जप करने से ऊर्जा प्राप्त होती है और मनोवांछित कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। इस अवसर पर साध्वी ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवनवृत्त को अत्यंत रोचक रूप से प्रस्तुत किया।
साध्वी दीपयशा, साध्वी पुनीत प्रभा ने इस अवसर पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखें। साध्वी सुमंगलाश्री ने भगवान पार्श्वनाथ के पूर्व भवों का विस्तार से विवेचन किया

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