भुजरिया तालाब मंदिर पर हुआ गीता स्वाध्याय।
गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी
यदि मनुष्य अहंकार को त्याग कर और वाणी पर संयम रखकर मन लगाकर ग्यारह बार पूरी गीता जी का पाठ मन लगाकर कर लें, तो उसमें स्वाभाविक रूप से विनम्रता आ जायेगी। और अहंकार की भावना अपने आप नष्ट हो जाती है। उपरोक्त विचार भुजरिया तालाब मंदिर पर हुए गीता स्वाध्याय में संत राघवेन्द्र दास जी महाराज भुजरिया तालाब वालों ने व्यक्त किए। स्वाध्याय के पूर्व गीताजी का पूजन संत राघवेन्द्र दास जी ने किया। जिसे पंडित अंकित पाण्डेय जी ने संपन्न कराया। स्वाध्याय गीत, गणेश गौरी, गुरु वंदना तथा अध्याय 9के 6से लेकर 16तक तक के श्र्लोको का वाचन पंडित अंकित पाण्डेय ने कराया। सुभाषित में रामशंकर दुबे ने बताया कि जो मनुष्य दूसरी नारी को माता बहिन समझता है। दूसरे के धन को घूरे जैसा। और दूसरे की आत्मा को अपनी आत्मा जैसे समझता है। वही पंडित है। अमृत वचन में उमाशंकर भार्गव ने कहा कि पुरुषार्थ का अर्थ है,

आलस्य का त्याग, जो लोग जीवन में पुरुषार्थ नहीं करते। उन्हें परमात्मा भी कुछ नहीं देता है। प्रेरक प्रसंग में धर्मवीर सिंह भारतीय ने बताया कि प्रकृति और भूमि जो भी संपदा है। वही प्रभु है। रामस्वरूप सेन ने कहा कि आप अपना सब कुछ छोड़कर अपना जीवन ईश्वर को शरणागत कर दें, तो आपकी रक्षा का दायित्व भगवान का है। इसमें कोई संदेह नहीं है। गीता भजन क्यों व्यर्थ समय बर्बाद करें, आओ हम मिल स्वाध्याय करें। पंडित अंकित पाण्डेय ने सुनाया। स्वाध्याय में श्रीमती सुनील कुमारी, श्रीमती रेखा पाण्डेय, विमला देवी अग्रवाल, राखी भार्गव, माया ओझा,एम एल गुप्ता सेवा निवृत्त ब्लाक शिक्षा अधिकारी, वीरेंद्र भार्गव,

रविन्द्र सिंह रघुवंशी, पंडित मनोज शर्मा, सुधीर सक्सेना,भुवनेश तिवारी, मनोज पाराशर राजाराम, बुंदेलसिंह, भगवान सिंह, परमाल सिंह, केशव बैरागी, जगदीश राठौर, पुरूषोत्तम यादव सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।अंत में महाराज ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन बड़ा ही शुभ है, कि मुझे दूसरी बार गीताजी को पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भविष्य में भी आप कभी भी यहां गीताजी के पाठ का आयोजन कर सकते हैं। गीताजी प्रत्येक मनुष्य को अवश्य पढ़ना चाहिए।अगला गीता स्वाध्याय सियाराम मेरिज गार्डन पुराने बालाजी हास्पीटल के पीछे माखन सिंह गूर्जर के यहां रखा गया है।


















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