सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

🙏श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
चोघडिया, दिन
शुभ 06:15 – 07:51 शुभ
रोग 07:51 – 09:26 अशुभ
उद्वेग 09:26 – 11:02 अशुभ
चर 11:02 – 12:37 शुभ
लाभ 12:37 – 14:13 शुभ
अमृत 14:13 – 15:48 शुभ
काल 15:48 – 17:24 अशुभ
शुभ 17:24 – 18:59 शुभ
चोघडिया, रात
अमृत 18:59 – 20:24 शुभ
चर 20:24 – 21:49 शुभ
रोग 21:49 – 23:13 अशुभ
काल 23:13 – 24:38* अशुभ
लाभ 24:38* – 26:02* शुभ
उद्वेग 26:02* – 27:27* अशुभ
शुभ 27:27* – 28:51* शुभ
अमृत 28:51* – 30:16* शुभ
(*) समय आधी रात के बाद, लेकिन अगले दिन के सूर्योदय से पहले.
🙏🏻आज का राशिफल🙏🏻
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दिन के प्रारंभ में आप पूर्वाग्रह से ग्रसित रहेंगे। अपने आगे किसी की नही चलने देंगे जिस वजह से हानि संभावित रहेगी। कार्य व्यवसाय की गति भी धीमी रहेगी। घरेलू आवश्यकता पूर्ति करने में असमर्थ अनुभव करेंगे। अतिआत्मविश्वास से बचें आज आपके अधिकांश निर्णय गलत निकलेंगे। परन्तु संध्या के समय व्यवसाय में आकस्मिक वृद्धि होगी धन लाभ भी काम चलाऊ हो जाएगा। आगे की योजनाओं पर खर्च करेंगे। महिलाये आज ईर्ष्यालु प्रवृत्ति से ग्रसित रह सकती है। सामाजिक क्षेत्र पर स्वयं के कारण से हास्य के पात्र बनेंगे।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन शुभ फलदायी रहेगा। प्रातः काल किसी योजना के पूर्ण होने से धन आगम होगा। आज दिनचर्या व्यवस्थित रहेगी कार्य भी समय से पूर्ण होंगे लेकिन यात्रा का मन बनने से आवश्यक कार्य मे बदलाव करना पड़ेगा। आर्थिक रूप से दिन शुभ रहेगा परन्तु हाथ खुला होने से ज्यादा देर टिकेगा नही। उधारी के व्यवहार ज्यादा ना बढ़ाएं अन्यथा उलझने बढ़ेंगी। सामाजिक सम्बन्ध आज दिखावा मात्र ही रहेंगे। परिवार में सुख शान्ति की अनुभूति होगी लेकिन महिला वर्ग का स्वभाव अचानक बदल सकता है सतर्क रहें। शान्ती बनाये रखने के लिए परिजनों की आवश्यकता पूर्ति करनी पड़ेगी।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज दिन का पूर्वार्ध व्यस्तता से भरा रहेगा। व्यवसायी एवं नौकरी वाले लोग अपूर्ण कार्य पूर्ण करने का भरपूर प्रयास करेंगे फिर भी कुछ कार्य अधूरे रह सकते है। परिश्रम की अधिकता एवं स्वास्थ्य की अनदेखी के कारण शारीरिक रूप से कमजोरी थकान रहेगी। आज आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा परन्तु लाभ दिलाने में सहायक नही रहेगा। हतोत्साहित ना हो आशानुकूल ना सही काम चलाने लायक लाभ अवश्य होगा। पति पत्नी अथवा किसी अन्य से गरमा गरमी हो सकती है विवेकि व्यवहार अपनाए। यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी। खर्च आज सोच समझ कर ही करें।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज आप दिन भर मन ही मन खयाली पुलाव पकाएंगे इनको सार्थक बनाने के लिए कोई ना कोई अभाव बाधा डालेगा। कार्य क्षेत्र अथवा घर मे शंकालु प्रवृत्ति रहने से किसी भी निर्णय को खुल कर नही ले सकेंगे। अधिकांश कार्यो के निर्णय अन्य के ऊपर डाल देंगे। आज आप फिजूल के झगड़े झंझटो से बच कर रहेंगे परन्तु फिर भी किसी अन्य के आपत्तिजनक व्यवहार के कारण माहौल उग्र बनेगा। धन संबंधित कार्यो में मध्यम सफलता मिलेगी। परिवार में थोड़ी खींच-तान के बाद भी स्थिति गंभीर नही बनेगी। संध्या पश्चात मनोरंजन के अवसर उपलब्ध होंगे।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज आपकी दिनचर्या आर्थिक कारणों से उथल-पुथल रहेगी। धार्मिक कार्यो में रुचि रहने पर भी एकाग्रता की कमी रहेगी कार्यो को बेमन से करने के कारण आरम्भ करने से पहले ही सफलता के प्रति आशंकित रहेंगे। आर्थिक लाभ परिश्रमानुसार अवश्य होगा परन्तु उधार के व्यवहारों के कारण बचत मुश्किल से ही कर पाएंगे। महिलाओं को भी आज गृहस्थी में तालमेल बैठाने में अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। पूर्व नियोजित यात्रा पर्यटन की योजना शारीरिक अथवा किसी अन्य कारण से निरस्त करनी पड़ेगी जिससे खास कर सन्ताने निराश होंगी। धर्म लाभ मिलेगा।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन भी आप सुख शांति से व्यतीत करेंगे। कार्य व्यवसाय में छोटी-मोटी बाधाएं आती रहेंगी लेकिन आप इनकी परवाह नही करेंगे। धर्म-आध्यत्म के प्रति गहरी आस्था कर्म पथ से डिगने नही देंगी। कम समय में ज्यादा लाभ कमाने के प्रलोभन भी मिलेंगे परन्तु ये कुछ ही समय प्रभाव दिखाएंगे आज आपके आचरण से किसी का अहित ना हो इसका विशेष ध्यान रखें। भाई-बंधुओ में कुछ समय के लिए अनबन गृहस्थ का वातावरण बिगाड़ेगी किसी बुजुर्ग के सहयोग से स्थिति सामान्य बनेगी फिर भी मन मे क्षोभ बना रहेगा। व्यावसायिक यात्रा की संभावना है लेकिन ज्यादा लाभदायक नही रहेगी।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपको सरकारी पक्ष से लाभ कराएगा आर्थिक स्थिति भी पहले से ज्यादा बेहतर रहेगी। खर्च भी अनावश्यक रहेंगे दिखावे पर ज्यादा खर्च करेंगे। कार्य व्यवसाय क्षेत्र पर आज जल्दबाजी में कार्य करेंगे जिससे कुछ ना कुछ त्रुटि अवश्य रहेगी। व्यावसायिक गतिविधियों से धन सम्मान मिलने पर भी मन मे किसी चीज की कमी खलेगी। मित्र परिचितों के साथ संध्या के समय मौज शौक पूरे करेंगे परन्तु रंग में भंग पड़ने वाली स्थिति बन सकती है सतर्क रहें। विपरीत लिंगीय वर्ग से आकर्षण बढेगा। प्रेम प्रसंगों में नजदिकी आएगी। संताने जिद पर अड़ेंगी।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन भी शुभ फलो की प्राप्ति कराएगा। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध
वाले स्वभाव पर अंकुश लगाएं प्रेम संबंध में खटास बनेगी। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मी अथवा अन्य लोगो के आश्रित रहना पड़ेगा फिर भी जरूरत के अनुसार लाभ अवश्य हो जायेगा। किसी भी महत्त्वपूर्ण निर्णय को लेने से पहले एक बार लाभ हानि की समीक्षा अवश्य करें जल्दबाजी में लिए अधिकांश निर्णय गलत साबित हो सकते है। सामाजिक कार्यो में योगदान के अवसर मिलेंगे। महिलाये आज व्यवहार संयमित रखें मान हानि की संभावना है। आडंबर युक्त जीवन पर खर्च अधिक रहेगा।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आपको प्रत्येक कार्यो में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। दोपहर तक दिनचर्या सामान्य रहेगी। जोड़ तोड़ करके कार्य चलते रहेंगे। नौकरी व्यवसाय दोनों में थोड़ी बहुत समस्या बनी रहेगी फिर भी लाभ के अवसर मिलते रहेंगे। परन्तु संध्या बाद स्थिति प्रतिकूल होने पर विशेष कर सेहत के लिए ज्यादा नुकसानदायक रहेगी। आकस्मिक दुर्घटना चोटादि का भय है। परिजनों की छोटी मोटी बातों का बुरा ना माने भाई बंधुओ से भी व्यर्थ बहस ना करें विवाद बढ़ सकता है। महिलाये आज किसी कारणवश स्वयं को लाचार अनुभव करेंगी।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपको लगभग सभी कार्यो में सफलता दिलाएगा जहां असफल होंगे वहां कारण किसी अन्य की दखलंदाजी रहेगी। नौकरी पेशा जातको को जटिल कार्य सौंपे जाएंगे जिससे आरंभ में थोड़ी असुविधा रहगी परन्तु बाद में वही कार्य लाभ के साथ सम्मान भी दिलाएगा। व्यवसायी वर्ग कार्य क्षेत्र पर खुल कर निर्णय ले सकेंगे फिर भी आर्थिक लाभ के लिए थोड़ा इंतजार एवं किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी। महिलाये कार्य बोझ के कारण चिड़चिड़ी रहेंगी फिर भी घरेलू दिनचर्या को बिगड़ने नही देंगी।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज धन की प्राप्ति जितनी सुगम रहेगी खर्च भी उतनीं ही जल्दी हो जाएगा। खर्चो पर नियंत्रण ना रहने से आर्थिक उलझने बनेगी। व्यवसाय में विस्तार की योजना बनाएंगे परन्तु आज निवेश ना करें धन फंसने की संभावना अधिक है। नौकरी वाले जातक कार्यो की अधिकता से परेशान रहेंगे। आर्थिक लाभ दिन भर होता रहेगा अगर खर्च पर नियंत्रण रख सके तो यह धन आने वाले समय मे अतिउपयोगी सिद्ध होगा। घर के बुजुर्ग अथवा अधिकारी वर्ग से उचित मार्ग दर्शन मिलेगा फिर भी स्वभाव में जल्दबाजी के कारण इसका लाभ कम ही उठा पाएंगे।
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आपके मन मे कुछ ना कुछ उधेड़-बुन लगी रहेगी। किसी बड़े कार्य को करने की योजना बनाएंगे लेकिन आर्थिक कारणों से पीछे हटना पड़ेगा। गलती करने पर भी ना मानने के कारण घर एवं बाहरी लोगो से बुरा-भला सुनना पड़ सकता है। कार्य व्यवसाय में परिश्रम अधिक रहेगा लेकिन प्राप्ति अल्प मात्रा में होगी। खर्चे आज आवश्यकता पर ही करेंगे। महिलाओं का विपरीत व्यवहार घर मे कलह कराएगा। संध्या के बाद से मन मे चंचलता अधिक रहेगी पल पल में बातों से पलटेंगे जिससे परिजनों के साथ मित्रो को भी असुविधा होगी।
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श्रीमद्भागवत प्रसंग – (१६३३)
भाई-बहनों, भगवद्गीता का ज्ञान इतना दिव्य है कि जो भी अर्जुन तथा श्रीकॄष्ण के बीच का संवाद जान लेता है वह पुण्यात्मा बन जाता है और वार्तालाप को भूल नहीं सकता, आध्यात्मिक जीवन की यह दिव्य स्थिति है, यानी जब कोई गीता को सही स्त्रोत से अर्थात् प्रत्यक्ष श्रीकॄष्ण से सुनता है तो उसे पूर्ण भगवद्भक्ति प्राप्त होती है, भगवद्भक्ति का फल यह होता है कि वह अत्यधिक प्रबुद्ध हो जाता और जीवन का भोग आनन्द सहित कुल काल तक ही नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षण करता हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि व्यासजी की कृपा से संजय ने भी अर्जुन को दिखाये गये श्रीकृष्ण के विराट रुप को देखा था, निस्सन्देह यह कहा जाता है कि इसके पूर्व भगवान् श्रीकॄष्ण ने कभी ऐसा रुप प्रकट नहीं किया था यह केवल अर्जुन को दिखाया गया था लेकिन उस समय कुछ महान् भक्त भी उसे देख सके थे व्यासदेवजी उनमें से एक थे, व्यासजी भगवान् के परम भक्तों में से है और श्रीकॄष्ण के शक्त्यावेश अवतार माने जाते है।व्यासजी ने इसे अपने शिष्य संजय के समक्ष प्रकट किया। भाई-बहनों, भगवान् श्रीकॄष्ण की महिमा इतनी अपरन्पार है। उसी भगवान् को अहीर की छोरियाँ छछिया भर छाछ के लिये नाच नचाती हैं। माँ के सामने भगवान् को रूलवा देते है। कान पकड़वा देते है और रोते-रोते कहलवा देते है कि मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो, यह भावों का खेल है। भक्त और भगवान् का खेल है। मीराबाई जैसी भक्त श्रीकॄष्ण को पति के रुप में वरण कर ही लेती है, मीराबाई की तरह कोई मिटे तो विष के प्याले अमृत क्यों न होंगे? तब तो मीराबाई की पायल की एक झंकार को सुनने के लिये श्रीकॄष्ण वृन्दावन की कुँज गलियों में से क्यों न आयेंगे? जरुर आयेंगे। भक्ति करते हुये क्या कभी हमारी अपनी आँखों से दो आँसू ढुलके है? क्या मन्दिर में जाकर यह भाव कभी जगा है कि हे प्रभु! मुझे अपने में स्वीकारों आपके बगैर मैं जी नहीं सकता जिस तरह पत्नी दो-तीन दिन के लिये पीहर चली जाय तो जीना हराम हो जाता है। क्या वैसी ही तड़पन, वैसी ही पीड़ा हमें मन्दिर में जाने पर सताती है? पीड़ा पनपी नहीं तो कैसे उसका मिलन होगा ? यहाँ तो सब कुछ लुटाना पड़ता है। मकान और राजमहलों के भाव छोड़ देने पड़ते हैं। एकलयता होनी जरुरी है। खुद से ऊपर उठ जाना होता है। सज्जनों तब कहीं जाकर भगवान् साकार होकर अपने शंख को ध्रुव के होंठों पर छूते है और कहते है कि तू प्रकाश से भर जा, तभी कोई चैतन्य महाप्रभु अहोनृत्य करते है, तभी कोई मीरा नाचती है। तभी कोई तुलसीदासजी चन्दन घिसते है और श्रीरामजी तिलक कराने ठेठ बैकुँठ से धरती पर पहुँचते हैं, यहाँ तो मिटे बिना मिलन सम्भव ही नहीं है।जो मिटने को तैयार है उसी का श्रीकॄष्ण का मिलन पक्का हैं। सूरदासजी भगवान् की भक्ति में निमग्न थे। अपने इकतारे पर संगीत के रस में डूबे हुये वे भगवद्स्वरूप को गुनगुना रहे थे। तभी उस ओर से श्रीकॄष्ण के साथ राधाजी का गुजरना हुआ।
राधे-कृष्ण प्रत्यक्ष हुये पर अन्धा कैसे देखे? राधाजी ने वरदान देना चाहा तो सूरदासजी ने कहा- माँ! आपको जी भर निहारने की इच्छा है। राधाजी मुस्कराई वे समझ गई कि सूरदासजी ने ऐसा कहकर उससे क्या माँगा है? राधाजी के वरदान के कारण सूरदासजी को आँखें मिल गई अपनी आँखों से श्रीराधे-कृष्ण के उनके रासलीलामय् भगवद्स्वरूप को निहारकर सूरदासजी धन्य-धन्य हो उठे कृत-कृत्य हो उठे नृत्य करने लगे सूरदासजी की आँखों से श्रद्धा,समर्पण और धन्यवाद के आँसू छलछला पड़े, सूरदासजी अपना आपा खो बैठे, श्रीकॄष्ण प्रमुदित हो उठे और कहने लगे कि भक्त और क्या चाहते हो? सूरदासजी बोले कि प्रभु! माँ ने जो आँखें दी है वे आप वापस ले लों, मैं नहीं चाहता कि जिन आँखों से भगवत् स्वरूप को देखा है। उन आँखों से अब और किसी को देखूँ। श्रीकॄष्ण ने देखा कि सूरदासजी की बात सुनकर राधाजी का ह्रदय गदगद् हो उठा राधाजी ने कहा- “योगक्षेमं वहाम्यहम्” यानी तुम्हारे कुशल-क्षेम को मैं वहन करूँगी कितना गहरा भाव है। सूरदासजी की प्रार्थना कितनी निश्छल,नि:स्वार्थ भरी है। भगवान् तो चारों ओर व्याप्त हैं, शक्ति तो हमारी पुकार में होनी चाहिये हमने ही अपने ही द्वार अपने हाथों से बन्द कर रखे हैं। फिर सूरज की किरणे हमारे भीतर कैसे प्रवेश करेगी?


















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