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बीकानेर- 28 अगस्त 2024 बुधवार आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

🙏श्री गणेशाय नमः🙏

🙏जय श्री कृष्णा🙏

चोघडिया, दिन
लाभ 06:15 – 07:50 शुभ
अमृत 07:50 – 09:26 शुभ
काल 09:26 – 11:02 अशुभ
शुभ 11:02 – 12:38 शुभ
रोग 12:38 – 14:13 अशुभ
उद्वेग 14:13 – 15:49 अशुभ
चर 15:49 – 17:25 शुभ
लाभ 17:25 – 19:01 शुभ
चोघडिया, रात
उद्वेग 19:01 – 20:25 अशुभ
शुभ 20:25 – 21:49 शुभ
अमृत 21:49 – 23:14 शुभ
चर 23:14 – 24:38* शुभ
रोग 24:38* – 26:02* अशुभ
काल 26:02* – 27:27* अशुभ
लाभ 27:27* – 28:51* शुभ
उद्वेग 28:51* – 30:15* अशुभ
(*) समय आधी रात के बाद, लेकिन अगले दिन के सूर्योदय से पहले.

🙏🏻आज का राशिफल🙏🏻

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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आपका आज का दिन आर्थिक लाभ कराएगा फिर भी ध्यान रखें व्यवहार का रूखापन लाभ को हानि में बदलने के साथ ही सामाजिक प्रेम संबंधों में खटास भी ला सकता है। घर परिवार एवं समाज में आपकी अनदेखी होने के कारण मन खिन्न रहेगा परन्तु धैर्य बनाना अति आवश्यक है अन्यथा स्वयं के साथ परिवार की गरिमा को भी ठेस पहुंच सकती है। महिलाओं को भी आज गुस्से पर काबू रखने की अधिक आवश्यकता है। बात-बात पर नाराज होने से घर का वातावरण अस्त-व्यस्त हो सकता है। धन आने के साथ जाने के रास्ते बना लेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज के दिन आप किसी भी कार्य को लेकर ज्यादा भाग-दौड़ करने के पक्ष में नही रहेंगे। आसानी से जितना मिल जाये उसी में संतोष कर लेंगे। परन्तु महिलाये इसके विपरीत रहेंगी अल्प साधनो से कार्य करने पर भाग्य को दोष देंगी। व्यवसाय की गति पल पल में बदलेगी जिससे सुकून से बैठने का समय नही मिलेगा। किसी पुरानी घटना को याद करके दुखी रहेंगे। पारिवारिक खर्चो में अकस्मात वृद्धि होने से बजट गड़बड़ा सकता है। महिलाओं के मन मे आज उथल पुथल अधिक रहने के कारण बड़ी जिम्मेदारी का कार्य सौपना उचित नही रहेगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन आपको लगभग सभी कार्यो के अनुकूल परिणाम मिलेंगे। अधिकांश कार्य थोड़े से प्रयास से पूर्ण हो जाएंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन ज्यादा लाभप्रद नही फिर भी संतोषजनक स्थिति बनेगी। व्यापार विस्तार की योजना सफल रहेगी। नौकरी पेशा जातक अधिकारी वर्ग से आसानी से काम निकाल सकेंगे। सामाजिक क्षेत्र हो या पारिवारिक अथवा अन्य सभी जगह आपकी जय होगी। अपरिचित भी आपसे संपर्क बनाने को उत्सुक रहेंगे। महिलाओं का स्वभाव अधिक नखरे वाला रहेगा इस वजह से हास्य की पात्र भी बनेंगी।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आपके लिए आज का दिन प्रतिकूल फल देने वाला रहेगा। जिस भी कार्य को करने का मन बनाएंगे उसमे पहले आलस्य बाद में किसी के गलत मार्गदर्शन के कारण विघ्न बाधाएं आएंगी। आज आप अपने जीवनी की समीक्षा भी करेंगे जिससे मन हीनभावना से ग्रस्त रहेगा। व्यावसायिक अथवा अन्य पारिवारिक-धार्मिक कारणों से यात्रा के योग बनेंगे अगर संभव हो तो यात्रा आज ना ही करें वाहन से चोटादि का भय है। सेहत अचानक खराब हो सकती है। चक्कर-वमन अथवा अन्य पेट मस्तिष्क संबंधित समस्या खड़ी होगी। धन की आमद परिश्रम साध्य रहेगी।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आपको आज का दिन धन एवं सम्मान दोनों की प्राप्ति कराएगा। जिस भी कार्य को करेंगे उसमे प्रराम्भ में थोड़ी भाग-दौड़ करनी पड़ेगी लेकिन अंतिम परिणाम प्रसन्नता दायक रहेगा। सरकारी कार्यो में सफलता निश्चित रहेगी परन्तु इनमे आज देरी ना करे अन्यथा लंबित रह जाएंगे। आध्यत्म के प्रति निष्ठा रहेगी पर व्यस्तता के कारण अधिक समय नही दे पाएंगे। कार्य समय से थोड़ा विलंब से पूर्ण होंगे फिर भी धन की प्राप्ति में ज्यादा विलंब नही होगा। घर मे सुख के साधनों की वृद्धि होगी। महिलाये गृहस्थ संबंधित समस्याएं स्वयं सुलझाने की क्षमता रखेंगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज आपको प्रत्येक कार्यो में सफलता मिलेगी लेकिन इसके लिए बौद्धिक परिश्रम अधिक करना पड़ेगा। आध्यत्म अथवा साधना क्षेत्र से जुड़े जातको को साधना में सिद्धि की दिव्य अनुभूति होगी। बेरोजगार व्यक्ति आज थोड़े से प्रयास के बाद अवश्य किसी रोजगार से जुड़ सकते है। नौकरी पेशा लोगो का आज काम के समय भी मन इधर उधर ज्यादा भटकेगा। मन में चल रही कामना अतिशीघ्र पूर्ण होने के योग है। ध्यान रहे आज किसी भी कार्य में आलस्य किया तो दोबारा अवसर नही मिल सकेगा। गृहस्थ में प्रेम बढेगा।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज आप दिन के आरंभ में जितना परिश्रम करेंगे मध्यान के बाद उसका फल धन लाभ एवं सम्मान के रूप में मिलेगा। परन्तु कार्य व्यवसाय में आज अधिकांश कार्य बीच मे भी छोड़ सकते है। चल- अचल संपत्ति से लाभ होगा। प्रतिस्पर्धी आज आपके आगे ज्यादा देर नही टिक पाएंगे। हृदय में आज कोमलता अधिक रहेगी परोपकार के लिए प्रेरित होंगे। बीच-बीच मे अहम की भावना आने से लोगो से व्यवहारिक दूरी बढ़ेगी। महिलाओ का जिद्दी स्वभाव कुछ समय के लिये घर पर अशांति कर सकता है। फिर भी पिछले कुछ दिनों की तुलना में आज शान्ति अनुभव करेंगे।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आप अकस्मात घटनाओं से सतर्क रहें। घरेलू दिनचर्या वैसे तो सामान्य ही रहेगी परन्तु आज जिस भी कार्य मे हाथ डालेंगे उसमे आशा के विपरीत अकस्मात क्षति के योग बनेंगे। घर मे भी महिलाओं के हाथ कुछ ना कुछ नुकसान अवश्य होगा। व्यवसाय में निवेश आज भूल कर भी ना करें पुराने उधार के व्यवहार यथा शीघ्र निपटाने के प्रयास करें अन्यथा ये अतिरिक्त सरदर्दी बढ़ाएंगे। सरकार की तरफ से कोई नोटिस अथवा अशुभ समाचार मिलने की संभावना है। संतान की गतिविधियों के ऊपर नजर रखें। धन की कमी रहेगी।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज का दिन आर्थिक दृष्टिकोण से उन्नति वाला रहेगा। धन संबंधित समस्याएं काफी हद तक सुलझने पर दिन भर प्रसन्नता रहेगी। कार्य व्यवसाय से प्रारंभिक परिश्रम के बाद दोपहर के समय से धन की आमद शुरू हो जाएगी जो संध्या तक रुक रुक कर चलती रहेगी। मितव्ययी रहने के कारण खर्च भी हिसाब से करेंगे धन कोष में वृद्धि होगी। महिलाये किसी मनोकामना पूर्ति से उत्साहित होंगी। आज महिला वर्ग से कोई भी काम निकालना आसान रहेगा मना नही कर सकेंगी। दाम्पत्य सुख में भी वृद्धि होगी। पर्यटन की योजना बनेगी।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज के दिन आप सम्भल कर ही कार्य करेंगे फिर भी सफलता में संशय बना रहेगा। व्यवहारिकता की कमी के कारण जितना लाभ मिलना चाहिए उतना नही मिल सकेगा। घर अथवा बाहर बेवजह कलह के प्रसंग बनेगे। व्यापार व्यवसाय में सहकर्मियो की।मनमानी के कारण असुविधा एवं अव्यवस्था बनेंगी लेकिन फिर भी स्वयं के पराक्रम से खर्च लायक धनार्जन कर ही लेंगे। आस-पड़ोसी एवं भाई बंधुओ से बात का बतंगड़ ना बने इसके लिए मौन रखने की जरूरत है फिर भी महिलाये स्वभावानुसार बनती बात बिगाड़ लेंगी। विपरीत लिंग के प्रति कामासक्त रहेंगे।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन आप बुद्धि विवेक से कार्य करेंगे परन्तु परिस्थिति हर तरह से कार्यो में बाधा डालेगी। कार्य व्यवसाय से मन ऊबने लगेगा धैर्य से कार्य करते रहें संध्या तक संतोषजक लाभ अवश्य मिलेगा पारिवारिक एवं सामाजिक क्षेत्र पर आपके विचारो की प्रशंसा होगी लेकिन केवल व्यवहार मात्र के लिए ही। आर्थिक विषयो को लेकर किसी से विवाद ना करें धन डूबने की आशंका है। गृहस्थ में प्रेम स्नेह तो मिलेगा परन्तु स्वार्थ सिद्धि की भावना भी अधिक रहेगी। महिलाये अधिक बोलने की समस्या से ग्रस्त रहेंगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन कार्यो के प्रति मन मे उच्चाटन रहेगा। नौकरी पेशा एवं व्यवासायिक लोगो को अपने क्षेत्र में विविध कष्टो का सामना करना पड़ेगा। कोई भी कार्य बिना किसी के सहयोग के बनाना असंभव ही लगेगा। आर्थिक कारणों से भविष्य को लेकर चिंता रहेगी। परन्तु आज आपका ध्यान आध्यात्म की ओर अधिक आकर्षित रहेगा। मन मे सत्संग प्रवचन सुनने की लालसा रहेगी धर्म के गूढ़ रहस्यों को जानने में रुचि लेंगे। महिलाये धार्मिक अथवा सामाजिक कार्यो में सक्रियता दिखाएंगी। घर का वातावरण मामूली विषयो को छोड़ मंगलमय रहेगा।
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शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्स र्वविघ्नोपशान्तये॥

प्रभु श्री गणेश के कई अवतार हैं !!

ॐ गजाननं भूतागणाधि सेवितम्,कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाश कारकम्,नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।। एकदंताय विद्महे,वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दंती प्रचोदयात्। महाकर्णाय विद्महे,वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दंती प्रचोदयात्। गजाननाय विद्महे,वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दंती प्रचोदयात्।`

सृष्टि के आरंभ में गणेश:

भगवान गणेश भगवान शिव के पुत्र बनकर उत्पन्न हुए। यह बात तो कई कथाओं में आपने सुनी होगी लेकिन शिव के पुत्र रुप में जन्म लेने से पहले भी सृष्टि में गणपति का अस्तित्व था। गणेश पुराण में सृष्टि के कर्ता के रुप में गणेश जी का वर्णन मिलता है। पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया तो अपनी सृष्टि की मंगल कामना के लिए गणपति की पूजा की। ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर गणेशजी ने अवतार लेकर सृष्टि के निर्माण में ब्रह्मा जी का सहयोग किया। इस तरह सृष्टि में गणपति का पहला अवतार हुआ।

दशभुजा रूप में प्रकट हुए गणेश;

ब्रह्मा जी पुकार पर सृष्टि के निर्माण के समय गणेश जी ने दस भुजाओं से युक्त होकर अवतार लिया था। गणेश जी का पहला अवतार होने के कारण यह आदि_गणेश कहलाए। इस अवतार में गणेश जी ने सृष्टि निर्माण के कार्य में ब्रह्मा जी को बाधा पहुंचाने वाले असुरों का वध किया। देवी आदिशक्ति ने दशभुजाधारी गणेश जी के हाथों में अपने समान अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और गणेश जी को अपना वाहन सिंह दिया। गणेश जी सिंह पर सवार होकर गणासुर,रूद्र केतु और उसके पुत्र नारान्तक का अंत किया। इन असुरों के मारे जाने के बाद धूम्राक्ष नामक असुर की पत्नी जृम्भा एवं पुत्र अंधकासुर ने गणेश जी को माया युद्घ के लिए ललकारा ने गणेश जी ने अपनी माया से इन्हें भी परास्त कर दिया। अंत में दैत्यों का राजा गणासुर आया। जिसका वध करने के बाद आदिगणेश गणपति कहलाने लगे। मान्यता है कि काशी के राजा ने आदि गणेश की भक्ति करके अष्टसिद्घियों को प्राप्त किया। इन्हीं सिद्घियों के बल पर इन्हें देवराज इन्द्र का पद प्राप्त हुआ।

छह भुजाओं सहित प्रकट हुए शुभंकर;

सृष्टि निर्माण का कार्य पूरा हुआ और सतयुग आरंभ हुआ।
ब्रह्मा जी की बनाई दुनिया में लक्ष्मी और विष्णु की कृपा से लोग खुशहाल और धर्म-कर्म में लगे हुए थे। उस समय मिथिला के राजा चक्रपाणि का पुत्र सिंधु का जन्म हुआ।
सिंधु में असुरों वाले गुण थे। इसने भगवान सूर्य की तपस्या करके अपार शक्ति प्राप्त कर ली थी। शक्ति में अहंकार में आकर सिंधु असुरों का राजा बन गया और देवताओं को परास्त कर दिया। इसने भगवान विष्णु को हराकर उनसे लक्ष्मी छीन ली। सिंधु के इस व्यवहार से दुःखी होकर देवताओं ने महाकाली की आराधना की काली ने छह भुजाओं वाले गणेश को प्रकट किया। छह भुजाओं वाले इस अवतार
में गणेश जी का वाहन मोर था। गणेश जी सिंधु का वश करके विष्णु को पुनः लक्ष्मी प्रदान किया। मान्यता है कि शिव द्वारा दक्ष प्रजापति के यज्ञ को नष्ट कर दिए जाने के बाद मुद्गल।ऋषि के कहने पर दक्ष ने छह भुजाओं वाले गणेश जी की आराधना की और यज्ञ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और तब गणेश जी शुभंकर कहलाए।

तीसरे अवतार में हुए पार्वती के पुत्र:

मूषक पर सवार जिस गणेश की पूजा की जाती है वह गणेश का तीसरा अवतार है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर गणपति ने शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में अवतार लेने का वरदान दिया। यह अवतार उस समय हुआ जब भगवान शिव कैलाश पर नहीं थे। शिव से गणेश का युद्घ हुआ और इनका सिर कट कर भूमि पर गिर पड़ा। बाद में गौरी के कहने पर गणेशजी
के धड़ से हाथी का सिर जोड़ दिया गया और गणेश गजानन कहलाए। इसी अवतार में लंबे पेट के कारण लंबोदर भी नाम पड़ा। गणेश जी ने इस अवतार में मूषक को अपना वाहन बनाया और रिद्घि एवं सिद्घि के साथ इनका विवाह हुआ। माना जाता है कि गणेश जी का यह अवतार त्रेतायुग में हुआ था।

चौथे अवतार में लिख डाला पूरा महाभारत:

गणेश जी का चौथा अवतार द्वापर युग में उस समय हुआ जब पराशर मुनि की विवाहिता पत्नी वत्सला ने गजानन की आराधना करके उन्हें पुत्र रूप में पाने का वरदान प्राप्त किया। इस अवतार में भगवान गणेश का नाम धूम्रकेतु हुआ। इसके अलावा यह शूपकर्ण एवं सुमुख नाम से जाने गए। धूम्रकेतु अवतार में ही गणेशजी ने पराशर मुनि की प्रेमिका से उत्पन्न व्यास जी के साथ मिलकर वेदों पुराणों की रचना की।
व्यास जी वेदों पुराणों की ऋचा बोलते गए और गणेश जी ने वेद पूराण एवं पूरी महाभारत लिख डाली। जिस स्थान पर महाभारत लिखा गया वह स्थान बद्रीनाथ से तीन किलोमीटर की दूर पर माणा गांव में स्थित गणेश गुफा है। कलियुग में भी इनका अवतार सम्भावित है और इस अवतार में इनका वाहन अश्व होगा।

💐#सन्दर्भ_गणेश_पुराण💐

प्रभु श्री गणेश समस्त चराचर प्राणियों

एवं सकल विश्व का कल्याण करें💐

जयति पुण्य सनातन संस्कृति💐

जयति पुण्य भूमि भारत💐

जयतु जयतु हिंदुराष्ट्रं💐

सदा सर्वदा सुमंगल💐

हर हर महादेव💐

ॐ गं गणपतये नमः💐

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