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महाराष्ट्र : “विट्ठल रुक्मिणी मंदिर” इस मंदिर में राधा संग नहीं अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ विराजते हैं भगवान कृष्ण…

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 “विट्ठल रुक्मिणी मंदिर” इस मंदिर में राधा संग नहीं अपनी पत्नी रुक्मिणी के साथ विराजते हैं भगवान कृष्ण…

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www.satyarath.comमहाराष्ट्र आपने अक्सर मंदिरों में देखा होगा कि जहां भी श्रीकृष्ण की मूर्ती की पूजा होती हैं, उनके साथ अधिकांशत: राधा जी की ही मूर्ती लगी होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियां होने के बावजूद उनके अपनी पत्नी के साथ मंदिर बहुत कम देखने को मिलते हैं। आज हम आपको भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। इस मंदिर का नाम हैं विट्ठल रुक्मिणी मंदिर, जो महाराष्ट्र के पंढरपुर नाम के गांव में स्थित हैं। तो आइये जानते हैं इस मंदिर के बारे में।

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महाराष्ट्र के पंढरपुर नाम के गांव में भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी का ‘विट्ठल रुक्मिणी’ नाम का एक मंदिर है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण और देवी रुक्मिणी के काले रंग की सुंदर मूर्तियां हैं। यह मंदिर भक्तों के लिए गहरी आस्था का केन्द्र बना हुआ है।चंद्रभागा नदी के तट पर स्थित विट्ठल रुक्मिणी मंदिर पूर्व दिशा में भीमा नदी के तट पर है। भीमा नदी को यहां पर चंद्रभागा के नाम से जाना जाता है। आषाढ़, कार्तिक, चैत्र और माघ महीनों के दौरान नदी के किनारे मेला लगता है, जिसमें हजारों लोग आते हैं। उन मेलों में भजन-कीर्तन करके भगवान विट्ठल को प्रसन्न किया जाता है।

कई भक्त अपने घरों से मंदिर तक के लिए पैदल यात्रा भी करते हैं। जिसे दिंडी यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा को आषाढ़ी एकादशी या कार्तिकी एकादशी को मंदिर में खत्म करने का महत्व है। इसलिए भक्त इसी समय से कुछ दिन पहले यात्रा शुरू करते हैं, ताकि इस दिन यात्रा पूरी कर सकें।

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