Advertisement

बीकानेर-योग विश्व कल्याण के लिए : कालवा

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

योग विश्व कल्याण के लिए : कालवा

श्री डूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 78 वां अंक प्रकाशित करते हुए योग विश्व कल्याण के लिए बताते हुए विस्तृत जानकारी देते हुए कहा । योग का अभ्यास करके और अपने शरीर और मन का पोषण करके हम समग्र कल्याण की ओर अग्रसर होते हैं और मानवता के वैश्विक कल्याण में योगदान देते हैं। ऐसा करते समय, हमें “आलस्यं अमृतं विषम” वाक्यांश में निहित गहन ज्ञान को याद रखना चाहिए। देरी अमृत को भी जहर बना देती है। योग आसन एक मजबूत लसीका प्रणाली को बढ़ावा देने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह हार्मोन स्राव को विनियमित और नियंत्रित करने में भी मदद करता है। यह हार्मोन को संतुलित करता है और बेहतर समग्र शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। अधिक ऊर्जा और बेहतर नींद। नियमित अभ्यास अधिक सुसंगत ऊर्जा स्तरों का समर्थन करता है। योग समुदाय और साझा उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देकर सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। समूह योग सत्र व्यक्तियों को एक साथ आने, अनुभव साझा करने और स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में उनकी यात्रा में एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए एक स्थान बनाते हैं। योग शरीर और मन को एक साथ लाता है और तीन मुख्य तत्वों गति, श्वास और ध्यान पर आधारित है। योग से कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ होते हैं जिनमें बेहतर मुद्रा,लचीलापन शक्ति,संतुलन और शरीर की जागरूकता शामिल है। योग का उद्देश्य हमारे जीवन का समग्र विकास करना है।या इसे ऐसे कह सकते है कि जीवन का सर्वांगीण विकास करना सर्वांगीण विकास से तात्पर्य यहाॅ शारीरिक,मानसिक,नैतिक,आध्यात्मिक व सामाजिक विकास से है। योग जीवन जीने की कला है। इस प्रकार योग का उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार है।जो सभी प्रकार के कष्टों पर विजय प्राप्त कर ‘मुक्ति’ (मोक्ष) या
‘स्वतंत्रता’ (कैवल्य) की प्राप्ति कराता है। यह स्वस्थ जीवन जीने की एक कला और विज्ञान है। ‘योग’ शब्द संस्कृत मूल ‘युज’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘जुड़ना’ या ‘जोड़ना’ या ‘एकजुट होना’। योग शास्त्रों के अनुसार योग का अभ्यास व्यक्तिगत चेतना को सार्वभौमिक चेतना के साथ जोड़ता है, जो मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति के बीच एक पूर्ण सामंजस्य का संकेत देता है।

निवेदन

ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!