बहराइच : केंद्रीय बजट से बहराइच वासियो के रेल से यात्रा करने के सपने सिर्फ सपने ही रह गए, छलावा साबित हुए वादे, सिर्फ अखबार के पन्नों में ही दौड़ी रेल ।
• केंद्रीय बजट से बहराइच वासियो के रेल से यात्रा करने के सपने सिर्फ सपने ही रह गए, छलावा साबित हुए वादे, सिर्फ अखबार के पन्नों में ही दौड़ी रेल ।
संवाददाता पंकज कुमार शुक्ला , बहराइच
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है,मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है।
अदम गोंडवी की ये लाइन बहराइच रेल जोड़ो आंदोलन चलाने वालो पर ठीक बैठती है, विगत दो दशक से अधिक से बहराइच रेल जोड़ो आंदोलन चलाया गया, पिछली बार के सांसद अक्षयवर लाल गोंड़ ने इसको संसद में रखा और रेलवे ने अपनी कार्य योजना भी बनाई, मात्र लोगों की भावनाओं से खेलने के लिए इसके लिए कमेटी भी बनाई गई और सर्वे का कार्य भी किया गया, लेकिन जनपद वासियों को इस बजट में रेलवे ने पूरी तरह निराश कर दिया,इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया, रेलवे के ऐसे कार्य से बहराइच वासियो में काफी निराशा है और उनके जो सपने रेल यात्रा को लेकर प्रवान चढ़ने लगे थे उस पर अनायास ही तुषारापात हो गया, जनप्रतिनिधियों ने जब रेललाइन के सर्वे की बात आई थी तब यहां पर खूब फुलमलाये पहनी और बढ़ चढ़कर कर भाषण दिए, और खूब वाह वाही लूटी, लेकिन अंतरिम बजट मैं बहराइच रेलवे लाइन का कोई जिक्र भी नहीं है और इसको पूरी तरीके से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, 10बार आंदोलन करने वाले लोग भी अब इस बारे में कुछ भी कहने से कतरा रहे, इस मौके पर जितने भी लोग संघर्ष करने वाले थे वह अब नए मुद्दों को तलासेंगे क्योंकि सरकार से बैर लेना शायद उनकी बस की बात नहीं, लेकिन बहराइच की ठगी हुई है यह जनता आज भी अपने मन में ख्याली पुलाव बना रही है कि शायद केंद्र सरकार और रेलवे कभी उनका यह सपना सरकार करेगी और बहराइच के लोग भी रेल से यात्रा कर पाएंगे, या उनका यह सपना सिर्फ हवा हवाई ही रह जाएगा यह देखने वाली बात होगी, इस मुद्दे पर कई समाजसेवियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और रेलवे की इस बजट से उन्हें काफी निराशा हुई है,और वह आशा करते हैं कि आने वाले समय में केंद्र सरकार और रेलवे इस ओर ध्यान देगी और बहराइच को रेलवे लाइन से जोड़ेगी, लेकिन अब यह भविष्य के गर्भ में ही है कि ऐसा हो भी पाएगा या नहीं।
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